RBI Action: डॉलर-रुपया स्वैप नीलामी को मिला बंपर रिस्पांस; ₹96.96 के रिकॉर्ड निचले स्तर से रुपये को उबारने के लिए रिजर्व बैंक का बड़ा दांव
मुंबई: भारतीय मुद्रा (रुपये) में जारी रिकॉर्ड गिरावट और बैंकिंग सिस्टम में नकदी के संतुलन को बनाए रखने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने मंगलवार को एक बड़ी डॉलर/रुपया खरीद/बिक्री स्वैप (Dollar-Rupee Swap) नीलामी आयोजित की। इस नीलामी को बाजार से जबरदस्त रिस्पांस मिला है, जिसमें घोषित राशि से लगभग दोगुनी बोलियां (Bids) प्राप्त हुईं।
RBI द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, केंद्रीय बैंक को कुल 9.80 बिलियन डॉलर की बोलियां मिलीं, लेकिन उसने पूर्व घोषित 5 बिलियन डॉलर की सीमा के तहत 910 पैसे के कट-ऑफ प्रीमियम पर केवल 5 बिलियन डॉलर की बोलियां ही स्वीकार कीं।
नीलामी के मुख्य आंकड़े (बिड-टू-कवर रेशियो 1.96)
इस पूरी नीलामी प्रक्रिया का वित्तीय लेखा-जोखा इस प्रकार रहा:
- कुल प्राप्त बोलियां: 254 (मूल्य: $9.80 बिलियन)
- स्वीकृत बोलियां: 144 (मूल्य: $5.00 बिलियन)
- बिड-टू-कवर अनुपात: 1.96 (जो बाजार के भारी उत्साह को दर्शाता है)
- आंशिक आवंटन प्रतिशत: कट-ऑफ प्रीमियम पर प्रतिस्पर्धी बोलियों का आंशिक आवंटन 18.10 प्रतिशत रहा।
दो चरणों में पूरा होगा स्वैप लेन-देन (3 साल की अवधि)
रिजर्व बैंक ने इस स्वैप डील को दो चरणों में विभाजित किया है, जिसकी परिपक्वता (Maturity) तीन साल की होगी:
- पहला चरण (शुरुआती चरण – 29 मई): इस चरण का निपटान ‘ऑन-स्पॉट’ आधार पर होगा। इसके तहत सफल बोलीदाता (व्यावसायिक बैंक) तय FBIL संदर्भ दर पर रिज़र्व बैंक को अमेरिकी डॉलर बेचेंगे। इसके बदले में RBI बैंकों के चालू खाते में रुपये जमा करेगा और बैंकों को डॉलर RBI के ‘नोस्ट्रो खाते’ (Nostro Account) में ट्रांसफर करने होंगे।
- दूसरा चरण (वापसी चरण – 29 मई, 2029): ठीक तीन साल बाद यह प्रक्रिया उलट दी जाएगी। बैंकों को अपने अमेरिकी डॉलर वापस पाने के लिए, प्राप्त रुपये को तय स्वैप प्रीमियम के साथ रिजर्व बैंक को वापस लौटाना होगा।
₹96.96 के सर्वकालिक निचले स्तर पर पहुंचा था रुपया
यह वित्तीय कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब भारतीय करेंसी (INR) अंतरराष्ट्रीय बाजार में लगातार कमजोर होकर पिछले हफ्ते 1 डॉलर के मुकाबले 96.96 के सर्वकालिक निचले स्तर (Record Low) पर बंद हुई थी। हालांकि, केंद्रीय बैंक के हस्तक्षेप और कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों में आई गिरावट के चलते रुपये में थोड़ा सुधार हुआ और यह फिलहाल 95.50 के स्तर के आसपास कारोबार कर रहा है।
इस स्वैप से भारतीय बाजार पर क्या असर पड़ेगा?
विशेषज्ञों के अनुसार, केंद्रीय बैंक पिछले कुछ समय से रुपये को बचाने के लिए अपने विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserve) से लगातार डॉलर बेच रहा था, जिससे बैंकिंग सिस्टम से रुपये की लिक्विडिटी कम होने और ब्याज दरें बढ़ने का खतरा पैदा हो गया था।
- लिक्विडिटी में सुधार: 25 मई तक बैंकिंग प्रणाली में तरलता लगभग 67,285.42 करोड़ रुपये अधिशेष (Surplus) में रहने का अनुमान है। इस स्वैप के जरिए आरबीआई बैंकिंग सिस्टम में दोबारा रुपये की नकदी डालेगा।
- फॉरवर्ड प्रीमियम में गिरावट: नीलामी के नतीजों के बाद लंबी अवधि के डॉलर-रुपया फॉरवर्ड प्रीमियम में गिरावट दर्ज की गई है। तीन साल का फॉरवर्ड प्रीमियम, जो पहले लगभग 9.25 रुपये पर था, कम होकर 9 रुपये पर आ गया है।
- ब्याज दरों पर असर: बॉन्ड यील्ड कर्व इस समय सपाट बना हुआ है, क्योंकि बाजार जून के महीने में ही छोटी अवधि की ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावनाओं को मानकर चल रहा है।

