Katni: नगर निगम की घोर लापरवाही- बिना आउटलेट के जोड़ी जा रही थी सीवर लाइन, जगमोहन दास वार्ड में भारी हंगामा

Katni: नगर निगम की घोर लापरवाही- बिना आउटलेट के जोड़ी जा रही थी सीवर लाइन, जगमोहन दास वार्ड में भारी हंगामा

कटनी। शहर में स्वच्छता और अतिक्रमण हटाने के नाम पर एक तरफ तो आम जनता और छोटे दुकानदारों पर रोज सख्त कार्रवाई की जा रही है, वहीं दूसरी तरफ नगर निगम और ठेकेदारों की घोर लापरवाही व धांधली सामने आ रही है। ताजा मामला नई बस्ती (जगमोहन दास वार्ड) का है, जहाँ बिना किसी अंतिम निकासी (Final Outlet) की व्यवस्था किए ही सीवर लाइन को सीधे लोगों के घरों से कनेक्ट किया जा रहा था। स्थानीय नागरिकों की सतर्कता से एक बड़ा हादसा और बदबूदार पानी का संकट टल गया।

बिना नक्शे के काम, पूछने पर दिखाई कच्ची ड्राइंग

घटना के दौरान जब वार्ड के सजग नागरिकों ने मौके पर चल रहे काम को देखा और पूछा कि पानी आगे जाकर कहाँ स्टोर या ड्रेन होगा, तो कर्मचारी कोई जवाब नहीं दे पाए। नागरिकों का कहना था कि “अगर आज कनेक्शन जोड़ दिया जाएगा और आगे रास्ता ही नहीं है, तो सीवर का पानी सीधे लोगों के घरों में उल्टे भर जाएगा।”

जब ठेकेदार के बारे में पूछा गया तो बताया गया कि ठेकेदार मौके पर मौजूद ही नहीं है। नक्शा मांगने पर सुपरवाइजर ने रजिस्टर खोलकर एक हाथ से बनी कच्ची ड्राइंग दिखा दी, जो पूरी तरह गैर-जिम्मेदाराना और अवैध प्रतीत हो रही थी।

बारिश ने खोली पोल, सुपरवाइजर ने मजदूरों पर फोड़ा ठीकरा

नागरिकों की बहस के दौरान ही अचानक बारिश शुरू हो गई। निकासी न होने के कारण सीवर लाइन में तुरंत पानी भर गया, तब जाकर कर्मचारियों को असलियत समझ आई और आनन-फानन में जोड़े गए कनेक्शनों को वापस काटा गया।

जब नागरिकों ने घेराव किया तो सुपरवाइजर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए पूरा ठीकरा दिहाड़ी मजदूरों पर फोड़ने लगा। उसने कहा कि “मजदूरों से गलती हो गई है।” इस पर स्थानीय लोगों ने तीखा सवाल दागा— “क्या अनपढ़ मजदूर अपनी मर्जी से पूरे शहर का सीवर नक्शा तय कर रहे हैं? जब सुपरवाइजर और इंजीनियर मौके पर हैं, तो जिम्मेदारी मजदूरों की कैसे हो गई?”

महापौर के हस्तक्षेप से रुका काम, मलबे का अंबार छोड़ा

मामले की गंभीरता को देखते हुए नागरिकों ने तुरंत महापौर से संपर्क किया। महापौर के हस्तक्षेप के बाद अधिकारियों को निर्देश दिए गए, जिसके बाद काम रुकवाया गया। ठेकेदार के लोग सीमेंट-मसाला तो समेट ले गए, लेकिन पूरे मोहल्ले में खुदाई करके भारी कचरा और मलबा वैसे ही छोड़ दिया, जिससे लोगों का चलना-फिरना दूभर हो गया है।

गरक चौराहा भी बेहाल, सफाई के नाम पर सिर्फ दिखावा

नागरिकों का कहना है कि यही हाल गरक चौराहे का भी है। वहाँ सीवर लाइन के कारण जलभराव की स्थिति बनी हुई है और पिछले दो-तीन दिनों से सफाई तक नहीं हुई है। कचरे का ढेर लगा हुआ है।

नागरिकों का तीखा सवाल:

“एक तरफ नगर निगम रोड एनक्रोचमेंट (अतिक्रमण) के नाम पर गरीबों की दुकानें हटा रहा है, लेकिन दूसरी तरफ खुद निगम की लापरवाही से अगर टॉयलेट और सीवर का पानी घरों में घुस जाता तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेता? क्या पूरे शहर में सीवर का काम बिना किसी लॉजिक और फाइनल कनेक्टिविटी के सिर्फ कागजी खानापूर्ति के लिए ‘हल्के में’ किया जा रहा है?”

अगर जगमोहन दास वार्ड के एकजुट पड़ोसी मौके पर डटकर इस घटिया काम को न रुकवाते, तो आज दर्जनों घरों के अंदर बदबूदार गंदा पानी भर चुका होता। जनता अब इस पूरे फर्जीवाड़े पर ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रही है।

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