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कैमोर-झुकेही मुख्यमार्ग पर रेल अंडर पास बना मुसीबत, भारी वाहनों का आवागमन हो रहा प्रभावित, तकनीकी खामियों के कारण अंडरपास के अंदर फंस रहे वाहन

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कटनी(YASH BHARAT.COM)। कैमोर-झुकेही मुख्य मार्ग पर ग्राम बड़ारी स्थित रेल फाटक बंद करके रेल्वे ने अंडर पास का निर्माण किया है। इस अंडरपास के निर्माण में तकनीकी कमियों और सर्वे में की गयी लापरवाही का नतीजा है कि जिस दिन से अंडरपास आवागमन के लिए खोला गया है, उस दिन से कैमोर-झुकेही मुख्य मार्ग का यातायात बुरी तरह प्रभावित हो रहा है । खनिज क्षेत्र होने की वजह से इस मार्ग से प्रतिदिन सैंकड़ों ट्रक डंपर एवं बल्कर आदि गुजरते हैं। अंडरपास में अचानक मोड़ होने के कारण अचानक ब्रेक लगाने से वाहन क्षतिग्रस्त हो जाते हैं और कभी-कभी तो 24 घंटे तक वाहन रिपेयर न होने पर अंडरपास में जाम की स्थिति निर्मित हो जाती है। इस तरह के अंडरपास मुख्यमार्ग में बनाना समझ से परे है। अंडर पास के दोनों तरफ खडी़ चढ़ाई बना दी गयी है, जिससे भारी वाहन चढ़ नहीं पाते और पीछे लुढक़ जाते हैं। जिससे कभी भी यहां बड़ी दुर्घटना भी घट सकती है। बड़ारी अंडर पास में वाहन के बिगडऩे पर जब लंबा जाम लगता है तो रेल्वे के अधिकारी कर्मचारी मूकदर्शकों की भांति व्यवहार करते हैं। 24 घंटे गुजर जाने पर भी रेल्वे द्वारा कोई एक्शन नहीं लिया जाता है।

कैमोर-अमेहटा के बीच रहता है भारी यातायात का दबाव

अडानी एसीसी सीमेंट प्लांट अमेहटा और कैमोर में स्थित है। इन दोनों प्लांट्स के बीच भारी वाहनों के यातायात का दबाव होता है। बडाऱी में रेल्वे साइडिंग होने की बजह से प्रतिदिन गिट्टी के रैक लोड होते हैं, जिसकी मटेरियल शिफ्टिंग क्रसरों खदानों से होती है। अंडर पास छोटा होने के कारण वाहन फंस जाते हैं।

रेल मंत्रालय तक पहुंची शिकायत

बड़ारी रेल अंडर पास के निर्माण के समय से ही ग्राम बड़ारी के निवासी आश्चर्य तिवारी ने सीपी ग्राम लोक शिकायत विभाग दिल्ली में शिकायत की लेकिन डीआरएम जबलपुर ने शिकायत पर कोई विशेष ध्यान नहीं दिया। तकनीकी खामियों से निर्मित बड़ारी रेल अंडरपास को सिर्फ छोटे वाहनों के इस्तेमाल तक सीमित कर रेल्वे गेट पुन: खोलने का आग्रह अपनी शिकायत में आश्चर्य तिवारी ने विगत दिवस किया है। ग्रामीणों ने बताया कि जब से अंडर पास चालू किया गया है तब से 24 बार ट्रक फंसने की वजह से जाम लग चुका है। वहीं एक ट्रक पिछलने की वजह से अंडरपास के पिलर क्षतिग्रस्त हो गए हैं। जिस स्थान पर अंडर पास बनाया गया है, वहां सरकारी नाला था। जिससे पहाड़ का पानी बारिश में बहुत ज्यादा बहता था। अंडर पास गहराई में होने की वजह से बारिश के मौसम में जलमग्न हो गया था और भविष्य में भी यह बारिश में भर जायेगा। रेल्वे के इंजीनियर्स की लापरवाही के कारण इस तरह का घटिया तकनीकी खामियों से परिपूर्ण रेल अंडर पास किसी भी दिन बड़े हादसे की वजह बन सकता है।

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