NGT का जबलपुर प्रशासन पर कड़ा रुख: नालियों से गुजर रही पेयजल पाइपलाइन पर खिंचाई
NGT का जबलपुर प्रशासन पर कड़ा रुख: नालियों से गुजर रही पेयजल पाइपलाइन पर खिंचाई
NGT का जबलपुर प्रशासन पर कड़ा रुख: नालियों से गुजर रही पेयजल पाइपलाइन पर खिंचाई
NGT का जबलपुर प्रशासन पर कड़ा रुख: नालियों से गुजर रही पेयजल पाइपलाइन पर खिंचाई
जबलपुर: जबलपुर शहर में नालियों के बीच से गुजर रही पेयजल पाइपलाइनों और उससे हो रहे जल प्रदूषण के बेहद गंभीर मामले में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने कड़ा रुख अख्तियार किया है। एनजीटी ने इस संवेदनशील जनहित के मुद्दे पर जिला प्रशासन और नगर निगम जबलपुर के असहयोगपूर्ण रवैये पर भारी नाराजगी जताई है।
डॉ. पीजी नाजपांडे और रजत भार्गव द्वारा दायर मूल आवेदन पर सुनवाई करते हुए एनजीटी के न्यायिक सदस्य दिनेश कुमार सिंह एवं विशेषज्ञ सदस्य सुधीर कुमार चतुर्वेदी की युगलपीठ ने एक कड़ा आदेश जारी किया है।
‘प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड’ को नहीं मिल रहा सहयोग, निरीक्षण अटका
सुनवाई के दौरान मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPPCB) ने ट्रिब्यूनल के सामने प्रशासन की लापरवाही को उजागर किया:
निरीक्षण में बाधा: बोर्ड ने बताया कि नगर निगम और जिला प्रशासन द्वारा आवश्यक सहयोग नहीं दिए जाने के कारण प्रभावित स्थलों का संयुक्त निरीक्षण (Joint Inspection) नहीं हो सका।
आदेश की अवहेलना: कोर्ट ने इससे पहले मामले की गंभीरता को देखते हुए एक महीने के भीतर विस्तृत जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के स्पष्ट निर्देश दिए थे, जिसका पालन नहीं हो सका।
एनजीटी रजिस्ट्रार को निर्देश: कलेक्टर और निगमायुक्त को लिखें पत्र
प्रशासनिक ढीलेपन को गंभीरता से लेते हुए एनजीटी की युगलपीठ ने ट्रिब्यूनल के रजिस्ट्रार को सीधे निर्देश दिए हैं:
वे कलेक्टर जबलपुर और नगर निगम आयुक्त को इस संबंध में तत्काल पत्र लिखें।
दोनों शीर्ष अधिकारियों को निर्देशित किया जाए कि वे मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के साथ होने वाले संयुक्त निरीक्षण में शत-प्रतिशत सहयोग सुनिश्चित करें, ताकि जमीनी हकीकत सामने आ सके।
एनजीटी ने इस मामले में लापरवाही की गुंजाइश को खत्म करते हुए समय-सीमा तय कर दी है:
रिपोर्ट के लिए 2 हफ्ते: ट्रिब्यूनल ने हर हाल में निरीक्षण पूरा कर रिपोर्ट पेश करने के लिए केवल दो सप्ताह का समय दिया है।
जवाब के लिए अंतिम अवसर: नगर निगम जबलपुर को अपना पक्ष और जवाब प्रस्तुत करने के लिए चार सप्ताह का अंतिम अवसर (Last Chance) प्रदान किया गया है।
नोटिस तामील का आदेश: याचिकाकर्ताओं की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता हर्षवर्धन तिवारी को निर्देश दिए गए हैं कि आवेदक एक सप्ताह के भीतर शेष प्रतिवादियों को नोटिस तामील कराना सुनिश्चित करें।
इस बेहद महत्वपूर्ण और जनता के स्वास्थ्य से जुड़े मामले की अगली सुनवाई 12 अगस्त 2026 को मुकर्रर की गई है।