MP High Court: ‘रिटायरमेंट के करीब ट्रांसफर पर पहले सुनें कर्मचारी की बात’; शिक्षिका के तबादले पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक
MP High Court: 'रिटायरमेंट के करीब ट्रांसफर पर पहले सुनें कर्मचारी की बात'; शिक्षिका के तबादले पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक
MP High Court: ‘रिटायरमेंट के करीब ट्रांसफर पर पहले सुनें कर्मचारी की बात’; शिक्षिका के तबादले पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक
जबलपुर। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने शासकीय कर्मचारियों के स्थानांतरण (Transfer) को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और राहत भरा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि किसी कर्मचारी का तबादला उसकी सेवा के आखिरी पड़ाव (रिटायरमेंट के नजदीक) में किया जाता है, तो उस पर कर्मचारी द्वारा दर्ज कराई गई आपत्ति या अभ्यावेदन (Representation) पर पहले नियमानुसार और विधिसम्मत निर्णय लिया जाना अनिवार्य है।
हाई कोर्ट ने इस मामले में अनूपपुर जिले की एक प्राथमिक शिक्षिका के तबादले पर अंतरिम रोक लगाते हुए उन्हें फिलहाल पुराने स्कूल में ही यथावत कार्यरत रखने के निर्देश दिए हैं। याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट में अधिवक्ता मोहन लाल शर्मा, शिवम शर्मा और जितेंद्र गर्ग ने मजबूती से पैरवी की।
30 दिनों के भीतर स्पष्ट आदेश जारी करने का निर्देश
मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति विशाल धगत की एकलपीठ (Single Bench) ने याचिका का अंतिम निराकरण कर दिया है। कोर्ट ने संबंधित सक्षम प्राधिकारी (Competent Authority) को कड़े निर्देश दिए हैं कि याचिकाकर्ता शिक्षिका द्वारा विभाग के समक्ष लंबित अभ्यावेदन पर 30 दिनों के भीतर एक कारणयुक्त और पूरी तरह स्पष्ट आदेश पारित किया जाए।MP High Court: ‘रिटायरमेंट के करीब ट्रांसफर पर पहले सुनें कर्मचारी की बात’; शिक्षिका के तबादले पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक
हाई कोर्ट के आदेश के अनुसार, जब तक विभाग शिक्षिका के आवेदन पर कोई अंतिम और न्यायसंगत फैसला नहीं ले लेता, तब तक वह अपने वर्तमान पदस्थापना स्थल यानी शासकीय संदीपनी स्कूल, पचखुरा (विकासखंड कोतमा, जिला अनूपपुर) में ही अपनी सेवाएं देती रहेंगी। उन्हें उनके पद से तब तक कार्यमुक्त नहीं किया जा सकेगा।
कर्मचारियों के लिए क्यों खास है यह फैसला?
मध्य प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों के ट्रांसफर को लेकर अक्सर विवाद सामने आते रहते हैं। हाई कोर्ट का यह रुख उन कर्मचारियों के लिए एक बड़ा सुरक्षा कवच बनेगा जो अपनी सेवानिवृत्ति (Retirement) के बेहद करीब हैं। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि सेवा के अंतिम समय में बिना कर्मचारी की बात सुने या उनके अभ्यावेदन का निराकरण किए एकतरफा ट्रांसफर की कार्रवाई को सही नहीं ठहराया जा सकता।