चार दशक पुराना सिंधिया राजघराने का संपत्ति विवाद खत्म; ₹40 हजार करोड़ की संपत्ति के बंटवारे पर बुधवार को ग्वालियर कोर्ट में लगेगा राजीनामा
ग्वालियर। देश के सबसे संपन्न और रईस राज परिवारों में शुमार ग्वालियर के सिंधिया राजघराने का करीब चार दशक (40 वर्ष) पुराना संपत्ति विवाद आखिरकार खत्म होने जा रहा है。 राजघराने की लगभग 40 हजार करोड़ रुपये की अकूत संपत्ति को लेकर आपसी सहमति से सुलह का फॉर्मूला तैयार कर लिया गया है, जिस पर बुधवार (8 जुलाई) को ग्वालियर जिला न्यायालय में औपचारिक समझौते (राजीनामे) की कानूनी प्रक्रिया पूरी कर मुहर लगा दी जाएगी।
केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनकी बुआओं के बीच हुआ समझौता
इस बहुचर्चित पारिवारिक और कानूनी विवाद में एक तरफ केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया हैं, तो दूसरी तरफ उनकी तीनों बुआ— राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया, मध्य प्रदेश की पूर्व मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया और ऊषा राजे सिंधिया हैं। लंबे समय से महलों, जमीनों, भवनों (चल-अचल संपत्तियों) और कीमती आभूषणों के मालिकाना हक को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई को दोनों पक्षों ने अब आपसी बातचीत और समझदारी से शांतिपूर्ण ढंग से सुलझा लिया है।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट में दर्ज होगी उपस्थिति
अदालती सूत्रों के मुताबिक, बुधवार को होने वाली इस ऐतिहासिक सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों के मुख्य सदस्य व्यक्तिगत रूप से कोर्ट आने के बजाय वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) के माध्यम से न्यायालय के समक्ष उपस्थित होंगे। दोनों पक्षों के वकील कोर्ट में समझौते के दस्तावेज और आपसी सहमति के नियम-शर्तें पेश करेंगे, जिसके बाद अदालत इस ऐतिहासिक राजीनामे को अपनी अंतिम मंजूरी देगी।
कैसे शुरू हुआ था 40 हजार करोड़ का यह विवाद?
- 1971 से पड़ी नींव: इस विवाद की पृष्ठभूमि करीब पांच दशक पहले वर्ष 1971 में मौखिक समझौते के बाद ही तैयार होने लगी थी।
- बेटियों का समान अधिकार: राजमाता विजयाराजे सिंधिया की बेटियों (ऊषा राजे, वसुंधरा राजे और यशोधरा राजे) ने कोर्ट में दावा दायर कर कहा था कि उनके पिता (जीवाजी राव सिंधिया) की पैतृक संपत्तियों पर बेटियों का भी समान वैधानिक अधिकार है और उन्हें उनका हिस्सा मिलना चाहिए।
- ज्योतिरादित्य सिंधिया का दावा: दूसरी ओर, केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी पैतृक अधिकारों के तहत संपत्तियों पर अपना दावा पेश किया था।
- 16 साल की कानूनी लड़ाई: यह मामला करीब 16 वर्षों तक जिला अदालत में चलने के बाद साल 2017 में सिविल रिवीजन के रूप में हाई कोर्ट पहुंचा था। इसके बाद देश के कई शहरों (जैसे पुणे और मुंबई) में भी इससे जुड़े मुकदमे चलते रहे।
मध्यस्थों की भूमिका ने बनाया सुलह का रास्ता
इस अरबों रुपये के विवाद को हमेशा के लिए खत्म करने में राजसी परिवार से जुड़े करीबी रिश्तेदारों और मध्यस्थों ने बड़ी भूमिका निभाई है। कई दौर की सीक्रेट बैठकों के बाद एक सर्वसम्मत फॉर्मूला तैयार किया गया, जिसके तहत संपत्तियों का स्पष्ट और शांतिपूर्ण बंटवारा तय हुआ। ज्योतिरादित्य सिंधिया की ओर से पहले ही कोर्ट को सूचित कर दिया गया था कि वे समझौते के लिए पूरी तरह तैयार हैं। इस ऐतिहासिक समझौते के बाद सिंधिया परिवार का यह ऐतिहासिक कानूनी संघर्ष हमेशा-हमेशा के लिए शांत हो जाएगा।
