NEET 2026 Scam: इतिहास ने खुद को दोहराया-2024 के ‘ब्लूप्रिंट’ पर ही हुआ 2026 का पेपर लीक? 30 लाख छात्रों का भविष्य फिर दांव पर
NEET 2026 Scam: इतिहास ने खुद को दोहराया-2024 के ‘ब्लूप्रिंट’ पर ही हुआ 2026 का पेपर लीक? 30 लाख छात्रों का भविष्य फिर दांव पर। साल 2026 की नीट परीक्षा रद्द होने और सीबीआई (CBI) जांच के आदेश ने देश के करोड़ों अभिभावकों और 30 लाख छात्रों को झकझोर कर रख दिया है। आज की स्थिति को देखकर 2024 का वो दौर याद आता है, जब पहली बार एनटीए (NTA) की विश्वसनीयता पर सवालिया निशान लगा था। आइए, फ्लैशबैक में चलते हैं और समझते हैं कि 2024 का वो ‘ब्लूप्रिंट’ क्या था, जिसका साया आज भी परीक्षाओं पर मंडरा रहा है।
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NEET 2026 Scam: इतिहास ने खुद को दोहराया-2024 के ‘ब्लूप्रिंट’ पर ही हुआ 2026 का पेपर लीक? 30 लाख छात्रों का भविष्य फिर दांव पर
2024 का वो ‘जला हुआ’ सच
5 मई 2024 को जब परीक्षा हुई, तो किसी को अंदाजा नहीं था कि पर्दे के पीछे एक संगठित अपराध अपनी जड़ें जमा चुका है। पटना पुलिस की आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने छापेमारी में जले हुए प्रश्नपत्र बरामद किए थे। सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि उन जले हुए पन्नों के सीरियल नंबर असली पेपर से हूबहू मेल खा रहे थे। यह इस बात का पहला प्रमाण था कि पेपर लीक हो चुका है।
नतीजों का ‘असंभव’ चमत्कार
4 जून 2024 को आए नतीजों ने शिक्षा जगत में भूचाल ला दिया था:
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टॉपर्स की बाढ़: पहली बार इतिहास में 67 छात्रों ने 720 में से 720 अंक हासिल किए।
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तकनीकी पहेली: कुछ छात्रों के 718 और 719 अंक आए। नीट की मार्किंग स्कीम के अनुसार ये अंक लाना नामुमकिन था, जिसे बाद में एनटीए ने ‘ग्रेस मार्किंग’ का नाम देकर दबाने की कोशिश की।
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एक ही केंद्र से टॉपर्स: हरियाणा के झज्जर का एक परीक्षा केंद्र ‘टॉपर्स की फैक्ट्री’ बन गया, जहां एक ही सेंटर से कई छात्रों ने टॉप किया।
2026: क्या फिर वही कहानी?
आज जब दिल्ली से भोपाल तक छात्र सड़कों पर हैं और पुतले फूंके जा रहे हैं, तो सवाल वही है— क्या सिस्टम ने 2024 की गलतियों से कोई सबक नहीं लिया? 2026 में भी पेपर लीक का पैटर्न लगभग वैसा ही दिख रहा है जैसा 2024 में था। संगठित गिरोहों का नेटवर्क, परीक्षा केंद्रों की मिलीभगत और एनटीए की लचर सुरक्षा व्यवस्था ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि सुधार के दावे सिर्फ कागजी थे।
छात्रों की चीख और ‘यश भारत’ का सवाल
क्या हर दो साल में सीबीआई जांच ही एकमात्र समाधान है? क्या देश के सबसे कठिन मेडिकल एंट्रेंस एग्जाम को हम एक सुरक्षित ‘लीक-प्रूफ’ सिस्टम नहीं दे सकते? 30 लाख छात्रों की मेहनत जब पेपर माफियाओं की भेंट चढ़ती है, तो केवल परीक्षा रद्द नहीं होती, बल्कि देश के भरोसे की हत्या होती है।

