Multistate Co-operative Society: लो नम्बर वन इंदौर को लगी करोड़ो को चपत, भाग गई ज्ञानराधा को- ऑपरेटिव सोसायटी । ज्यादा ब्याज और पूंजी बढ़ाने का लालच देकर एक संस्था ने शहर में हजारों लोगों को करोड़ों रुपये की चपत लगी दी है।
ज्ञानराधा मल्टीस्टेट को-आपरेटिव सोसायटी का दफ्तर रातोंरात बंद कर दिया गया है। संस्था में पैसा जमा करने वाले लोगों की संख्या तीन हजार बताई जा रही है। अनुमान है कि इन लोगों से कम से कम 20 करोड़ रुपये संस्था के पास जमा है। जमाकर्ता करीब चार महीने से रुपया वापस मिलने की उम्मीद में संस्था के चक्कर लगा रहे थे। रातोंरात संस्था के खजूरी बाजार स्थित दफ्तर पर ताला लग गया है।
खजूरी बाजार में किताबों की दुकानों और दांत के दवाखाने के पास ज्ञानराधा मल्टीस्टेट को-आपरेटिव सोसायटी का दफ्तर है। इससे बैंक की तरह सेवाएं दी जा रही थीं। सोसायटी कम से कम नौ तरह की जमा योजनाएं पेश कर बेहतर रिटर्न का वादा कर रही थी। इनमें बचत जमा योजना से लेकर फिक्स्ड डिपाजिट, रिकरिंग, डबल बचत से लेकर कन्यादान योजना जैसी योजनाएं शामिल थी।
बैंक से दोगुना ब्याज 13 से 14 प्रतिशत तक ब्याज का लालच देकर सोसायटी पैसे जमा करवाती रही। आम लोगों से लेकर कई धनी व्यापारी तक इसके फेर में पड़ गए। कई लोगों ने एकमुश्त लाखों रुपये जमा किए। सात-आठ दिनों से दफ्तर नहीं खुला तो पीड़ितों की धड़कनें बढ़ गई हैं। अब ठगाए लोग एक-जुट होकर मोर्चा खोलने की तैयारी कर रहे हैं।
अक्टूबर से लौटाना बंद किया
संस्था से ठगाए लोग बता रहे हैं कि अक्टूबर के बाद से तमाम लोगों का रुपया लौटाने में आनाकानी की जा रही थी। बचत खातों या एफडीआर की राशि निकालने के लिए लोग संस्था जा रहे थे तो उन्हें अभी रुपया नहीं होने की बात कहकर बाद में आने के लिए कहा जाने लगा। दिसंबर में रुपया लौटाने का समय स्थानीय दफ्तर पर तैनात लोगों ने दिया।
इस बीच नए लोगों से एफडीआर और जमा राशि ली जाती रही। जनवरी की तारीख देकर फिर से पैसा लौटाने से इनकार कर दिया। फरवरी में जमाकर्ताओं की घबराहट उस समय बढ़ गई जब पता चला कि महाराष्ट्र के बीड व आसपास के जिलों में इसी संस्था पर लाखों लोगों का पैसा हजम करने का आरोप लगा है। सप्ताह कुछ लोगों संस्था के दफ्तर पहुंचे और हंगामा किया।
इसके बाद से दफ्तर बंद है। सप्ताहभर से ताला भी नहीं खुला। कपड़ा बाजार के कई व्यापारियों के ही एक करोड़ रुपये संस्था में जमा होने की बात कही जा रही है। सैकड़ों खुदरा निवेशकों का रुपया भी यहां जमा है।
दिसंबर में की थी शिकायत
संस्था द्वारा पैसा नहीं देने की शिकायत लेकर मुकेश शर्मा नामक एक खातेदार 21 दिसंबर को सराफा थाना भी पहुंचा था। खातेदार ने लिखित शिकायत की थी कि उसके व उसके पुत्र-पुत्री के नाम से एफडीआर परिपक्व होने के बाद भी संस्था ने रुपया देने से मना कर दिया है। हालांकि मामले में पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। पीड़ितों ने अब एकजुट होकर मोर्चा खोलने की तैयारी कर ली है।
पीड़ितों को एक जुट कर रहे परमानंद सोनी के अनुसार गुरुवार को संस्था के बंद शटर के बाहर ही पीड़ितों की बैठक बुलाई है। हमें डर है कि संस्था के स्थानीय कर्ताधर्ता भी मौके का लाभ उठाकर फरार हो सकते हैं।
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