MP Police Shabash: जेसीबी से था मिट्टी धंसने का खतरा, तो जवानों ने हाथों से गड्ढा खोदकर बचाई मासूम की जान; SP करेंगे पुरस्कृत
गोविंदगढ़ : मध्य प्रदेश में पुलिस की संवेदनशीलता, तत्परता और सूझबूझ से एक बार फिर एक बड़े हादसे को टालते हुए मासूम की जिंदगी कड़ाई से बचा ली गई है। जिले के गोविंदगढ़ थाना क्षेत्र के ग्राम चुआ में आंगन में खेलते-खेलते पिलर के संकरे गड्ढे में गिरे एक साल के मासूम बच्चे को पुलिस और ग्रामीणों ने महज एक घंटे के भीतर “पैरेलल रेस्क्यू ऑपरेशन” चलाकर पूरी तरह सुरक्षित बाहर निकाल लिया है।
इस घटना के बाद से पूरे अंचल में गोविंदगढ़ पुलिस और स्थानीय युवाओं की बहादुरी की कड़क तारीफ हो रही है।
खेलते-खेलते हुआ हादसा; 10 फीट गहरे मौत के कुएं में गिरा मासूम
यह दिल दहला देने वाली घटना ग्राम चुआ के महाजन टोला की है। यहाँ रहने वाले बाबू केवट का १ वर्षीय बेटा शिवेंद्र केवट हमेशा की तरह घर के आंगन में खेल रहा था:
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लापरवाही का गड्ढा: घर में नए निर्माण और पिलर डालने के उद्देश्य से 10 फीट गहरा और मात्र 1 फीट चौड़ा संकरा गड्ढा खोदा गया था।
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अचानक गिरा बच्चा: खेल-खेल में मासूम शिवेंद्र का पैर फिसला और वह सीधे उस तंग गड्ढे के भीतर जा गिरा। बच्चे की रोने की आवाज सुनकर परिजनों के होश उड़ गए। उन्होंने बिना एक पल गंवाए तुरंत डायल 112 और गोविंदगढ़ थाना पुलिस को आपातकालीन सूचना दी।
जेसीबी का इस्तेमाल था खतरनाक; पुलिस ने लगाया ‘मैन्युअल समानांतर विन्यास’
जैसे ही सूचना मिली, गोविंदगढ़ थाना प्रभारी अपनी पूरी पुलिस टीम के साथ तत्काल मौके पर पहुंचे। हालात बेहद कड़े और संवेदनशील थे, क्योंकि गड्ढा सिर्फ १ फीट चौड़ा था:
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जेसीबी को रोका गया: पुलिस ने मौके पर तकनीकी सूझबूझ दिखाई। अगर जेसीबी मशीन से खुदाई की जाती, तो कंपन की वजह से मिट्टी धंसने का कड़ा खतरा था, जिससे बच्चे की सांसें थम सकती थीं।
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समानांतर गड्ढे का फैसला: थाना प्रभारी ने ग्रामीणों और गांव के जांबाज युवाओं के साथ मिलकर बगल से एक नया समानांतर (Parallel) गड्ढा खोदने का विधिक निर्णय लिया।
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फावड़े-कुदाल से कड़ा मुकाबला: पुलिस जवानों और गांव के युवाओं ने कड़क गर्मी के बीच फावड़े और कुदाल से युद्धस्तर पर मैन्युअल खुदाई शुरू की। महज 45 मिनट की कड़ी मशक्कत के बाद बगल में 10 फीट गहरा गड्ढा खोद दिया गया। इसके बाद पुलिस के एक जवान ने अपनी जान जोखिम में डालकर बेहद सावधानी से सुरंग बनाकर बच्चे तक पहुंच बनाई और उसे कड़ाई से अपनी गोद में समेटकर ऊपर खींच लिया।
परिजनों की आंखों में आए आंसू; बोले- “पुलिस हमारे लिए देवता बनकर आई”
गड्ढे से सुरक्षित निकलते ही मासूम शिवेंद्र को तुरंत पानी पिलाया गया। गनीमत रही कि इतने बड़े हादसे के बाद भी बच्चे को कोई गंभीर चोट नहीं आई थी, उसके शरीर पर महज मामूली खरोंचें थीं।
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अस्पताल रेफर: सुरक्षा और विधिक स्वास्थ्य मानकों को ध्यान में रखते हुए पुलिस ने तुरंत 108 एंबुलेंस के जरिए बच्चे को गोविंदगढ़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भिजवाया, जहां डॉक्टरों ने गहन परीक्षण के बाद बच्चे को पूरी तरह स्वस्थ और कड़क घोषित किया।
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पिता का भावुक बयान: बच्चे के सकुशल बाहर आते ही परिजनों के आंसू छलक पड़े। पिता बाबू केवट ने रोते हुए कहा, “गोविंदगढ़ पुलिस और गांव के युवा हमारे लिए साक्षात देवता बनकर आए। अगर 10 मिनट की भी देरी हो जाती तो अनहोनी हो सकती थी। हम जिंदगी भर पुलिस का यह कड़ा अहसान नहीं भूलेंगे। MP Police Shabash: जेसीबी से था मिट्टी धंसने का खतरा, तो जवानों ने हाथों से गड्ढा खोदकर बचाई मासूम की जान; SP करेंगे पुरस्कृत
एसपी गुरुकरण सिंह ने की तारीफ; पूरी टीम को मिलेगा कड़क पुरस्कार
इस सफल और त्वरित रेस्क्यू ऑपरेशन की जानकारी मिलते ही जिले के एसपी गुरुकरण सिंह ने गोविंदगढ़ पुलिस टीम की पीठ थपथपाई है। एसपी ने कहा कि पुलिस का पहला विधिक और नैतिक कर्तव्य जनता की जान माल की रक्षा करना है। गोविंदगढ़ पुलिस ने जिस कड़क सूझबूझ, अदम्य साहस और तेजी से काम किया है, वह बेहद काबिल-ए-तारीफ है। इस जांबाज टीम को जिला स्तर पर विशेष रूप से पुरस्कृत किया जाएगा।
⚠️ गोविंदगढ़ पुलिस की कड़क जन-अपील: इस घटना से सबक लेते हुए गोविंदगढ़ पुलिस और ग्राम सरपंच ने संयुक्त रूप से नागरिकों से कड़ी अपील की है कि वे अपने घरों या खेतों में निर्माण कार्य के दौरान खोदे गए किसी भी प्रकार के गड्ढे या बोरवेल को खुला न छोड़ें। उन्हें तुरंत मजबूत ढक्कन से ढंकें या चारों तरफ घेराबंदी (Fencing) करें। छोटे बच्चों पर हमेशा खास नजर रखें, क्योंकि जरा सी लापरवाही एक हंसते-खेलते परिवार का चिराग बुझा सकती है।
