Monday, May 4, 2026
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MP News मरने के दो वर्ष बाद खुला अभिमत का लिफाफा तो मिला प्रमोशन, जानिए ये अजीबोगरीब मामला

MP News मध्यप्रदेश में सरकारी अमले में एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है। जीते जी एक अधिकारी को जांच के चलते प्रमोशन नहीं मिला मरने के 2 साल बाद जब तत्कालीन अनुशंसा का बन्द लिफाफा खोला गया तो पता लगा कि उनकी जांच पर का प्रकरण समाप्त हो गया था। अब उनके परिवार पेंशन में इस प्रमोशन के लाभ का फायदा देने की बात कही जा रही है।

ये है पूरा मामला

छतरपुर में पदस्थ रहे तत्कालीन डिप्टी कलेक्टर संतोष कुमार चंदेल सहित उनके बैच के अन्य अफसरों को एक जनवरी 2019 की स्थिति में कनिष्ठ श्रेणी वेतनमान से वरिष्ठ श्रेणी वेतनमान में क्रमोन्नति देने के लिए 28 दिसंबर 2019 को चयन समिति बैठक हुई थी। इस बैठक में चंदेल के नाम पर भी विचार किया गया। उस समय चंदेल के नाम अनुशासनात्मक कार्यवाही प्रचलित होंने की जानकारी सामने आई। जबलपुर संभागायुक्त द्वारा दिये गये कारण बताओ नोटिस पर चंदेल के जवाब और प्रतिउत्तर पर आयुक्त जबलपुर का अभिमत नहीं मिल पया था। इसके चलते आने पर उनके प्रमोशन के संबंध में अनुसंशा सील बंद लिफाफे में रखी गई थी।

चंदेल के सेवा में रहते हुए जांच पूरी नहीं हो पाई और 29 अप्रैल 2021 को उनका असामयिक निधन हो गया। निधन के बाद सामान्य प्रशासन विभाग के निर्देशों के पालन में उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही का प्रकरण 14 जुलाई 2021 को समाप्त कर दिया गया। इसके बाद सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा 18 अप्रैल 2023 को दिए अभिमत के आधार पर संतोष कुमार चंदेल के कनिष्ठ से वरिष्ठ श्रेणी वेतनमान में क्रमोन्नति हेतु एक जनवरी 2019 में समिति की सील बंद अनुशंसा को 18 मई 2023 को खोला गया जिसमें स्वर्गीय संतोष कुमार चंदेल को वरिष्ठ श्रेणी वेतनमान हेतु उपयुक्त पाया गया।


अब राज्य शासन ने स्वर्गीय संतोष कुमार चंदेल तत्कालीन डिप्टी कलेक्टर छतरपुर को उनसे कनिष्ठ आशाराम मेश्राम राप्रसे की राज्य प्रशासनिक सेवा के वरिष्ठ श्रेणी वेतनमान में दी गई क्रमोन्नति के दिनांक 30 दिसंबर 2019 से वरिष्ठ श्रेणी वेतनमान में नियुक्ति(क्रमोन्नति )प्रदान करने का निर्णय लिया है।
चंदेल को वरिष्ठ श्रेणी वेतनमान में नियुक्त होने के दिनांक 30 दिसंबर 2019 से उनके शासकीय सेवा में रहते हुए असामयिक निधन 19 अप्रैल 2021 तक की अवधि का लाभ काल्पनिक रुप से देते हुए कार्य नहीं वेतन नहीं सिद्धांत के आधार पर उन्हें कोई वेतन, भत्ते और एरियर्स की पात्रता नहीं होगी। मौत के बाद मिली क्रमोन्नति का लाभ अब पेंशन के रुप में उनके परिवार को मिलेगा।

Ashutosh shukla

30 वर्षों से निरन्तर सकारात्मक पत्रकारिता, संपादक यशभारत डॉट काम