सागर। चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधीन नए-पुराने मेडिकल कॉलेजों को पर्याप्त डॉक्टर नहीं मिल पा रहे हैं। जो हैं, वे नौकरी छोड़कर जा रहे हैं। पहले स्थानीय और अब प्रदेश स्तर पर सीधी भर्ती प्रक्रिया आयोजित होने के बावजूद क्लीनिकल और नॉन क्लीनिकल कैटेगरी में डॉक्टरों के पद खाली पड़े हैं।
विभाग अब प्रदेश से बाहर के डॉक्टरों को लाने के लिए जल्द ही राष्ट्रीय स्तर पर विज्ञापन जारी कर खाली पदों को भरने की प्रक्रिया प्रारंभ कर सकता है। यह हाल तब है, जब प्रदेश के सभी कॉलेजों को डॉक्टरों की सीधी भर्ती के अधिकार मिल चुके हैं।
प्रदेश में सरकारी नौकरी से डॉक्टरों का मोहभंग होता जा रहा है। सरकारी नौकरी के लिए डॉक्टर इच्छुक नहीं दिख रहे। खासतौर से चिकित्सा शिक्षा विभाग में हालात चिंताजनक हैं। सरकार द्वारा भर्ती नियमों को शिथिल करने, प्रमोशन सिस्टम को बायपास करने व कॉलेजों की कमेटी को भर्ती का अधिकार मिलने के बाद भी डॉक्टर नहीं मिल पा रहे हैं। बार-बार भर्ती प्रक्रिया आयोजित होने के बावजूद भी कॉलेजों में डॉक्टरों के पद खाली पड़े हैं। बीएमसी में तीन महीने में तीन बार भर्ती प्रक्रिया आयोजित की गई, लेकिन अब भी डॉक्टरों के बड़ी संख्या में पद खाली पड़े हैं।
सरकार ने भर्ती नियम तक बदल दिए
दरअसल सरकार ने नए-पुराने मेडिकल कॉलेजों को मान्यता दिलाने और डॉक्टरों के खाली पदों की पूर्ति के लिए चिकित्सा शिक्षा विभाग में भर्ती नियमों में संशोधन कर मप्र स्वशासी चिकित्सा महाविद्यालय शैक्षणिक आदर्श सेवा नियम 2018 का लागू किया गया है। इसमें प्रत्येक मेडिकल कॉलेज में संभाग कमिश्नर की अध्यक्षता में गठित समितियों को स्वशासी के तहत डॉक्टरों की भर्ती का अधिकार दिया गया है।
20 से अधिक पद अब भी खाली
बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में पहले आंतरिक भर्ती प्रक्रिया आयोजित कर करीब आधा दर्जन डॉक्टरों के पद भरे गए थे। इसके बाद कुल खाली हुए 38 पदों के लिए प्रदेश स्तर पर विज्ञापन प्रकाशित कर आवेदन बुलाए गए थे। तीन दिन चली सीधी भर्ती के दौरान महज 21 डॉक्टरों के पद भरे जा सके। फिलहाल बीएमसी में 17 पद अभी भी खाली हैं।
पूर्व से पदस्थ डॉक्टर दूसरे कॉलेजों में ज्वाइन किया
प्रदेश में 7 नए मेडिकल कॉलेजों में भी पिछले दिनों सीधी भर्ती प्रक्रिया आयोजित की गई थी। इसमें डॉक्टरों को प्रमोशन के अघोषित विकल्प के साथ घर के नजदीक पहुंचने का मौका भी मिल गया। इंदौर, भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर, रीवा, सागर मेडिकल कॉलेज में पदस्थ डॉक्टरों ने यहां साक्षात्कार दिए और सीधी भर्ती के तहत चयनित हो गए। इसके अलावा पूर्व से पदस्थ डॉक्टरों को महानगरों में पहुंचने का विकल्प भी मिल गया। सागर से करीब आधा दर्जन से अधिक डॉक्टरों ने दूसरे मेडिकल कॉलेजों में ज्वाइन कर लिया।
मप्र में इतने सरकारी मेडिकल कॉलेज
पूर्व से संचालित: गांधी मेडिकल कॉलेज भोपाल, महात्मा गांधी मेडिकल कॉलेज इंदौर, गजराराजा मेडिकल कॉलेज ग्वालियर, नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज जबलपुर, श्यामशाह मेडिकल कॉलेज रीवा सहित 2009 में सागर में बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज प्रारंभ हुआ।
साल 2018 से प्रारंभ नए मेडिकल कॉलेज
प्रदेश में इस साल से सात नए मेडिकल कॉलेज प्रारंभ किए गए हैं जिनमें रतलाम, विदिशा, शिवपुरी, छिंदवाड़ा, शहडोल, खंडवा और दतिया शामिल हैं।
राष्ट्रीय स्तर पर विज्ञापन जारी करेंगे
मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टरों की कमी पहले से है। नियम बदलने के बाद व स्वशासी से डॉक्टरों की भर्ती के अधिकार मिलने के बाद स्थिति सुधरी है। नए कॉलेजों में हमारे यहां के डॉक्टर भी गए हैं। बीएमसी में भर्ती प्रक्रिया के दौरान अधिकांश पद भर गए हैं। जो खाली हैं, उनके लिए जल्द ही नेशनल लेवल पर विज्ञापन जारी कर सीधी भर्ती प्रारंभ की जाएगी।
-डॉ. जीएस पटेल, डीन बीएमसी सागर
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