Site icon Yashbharat.com

MP: त्रि-स्तरीय पंचायत चुनाव : जिला पंचायत अध्यक्ष पद का आरक्षण 14 दिसंबर को

images 13

भोपाल । मध्य प्रदेश में त्रि-स्तरीय पंचायत चुनाव का रास्ता साफ हो गया है। पंचायत विभाग ने जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए आरक्षण की प्रक्रिया शुरू कर दी है। 14 दिसंबर को भोपाल स्थित जल एवं भूमि प्रबंध संस्थान (वाल्मी) में आरक्षण की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। विभाग ने इस संबंध में सभी कलेक्टर और मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत को निर्देश जारी कर दिए हैं। अध्यक्ष पद के लिए अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी), अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) और सभी वर्गों की महिलाओं के लिए लाटरी निकाली जाएगी।

गौरतलब है कि प्रदेश में पिछले ढाई साल से पंचायत चुनाव टल रहे है। जिला पंचायत अध्यक्ष पद के आरक्षण की प्रक्रिया शुरू करने के अलावा मतदाता सूची को अंतिम रूप दिया जा रहा है। दरअसल, कांग्रेस सरकार ने वर्ष 2019 में परिसीमन और आरक्षण किया था। उसे भाजपा सरकार ने निरस्त कर दिया है इसलिए अब वर्ष 2014 के परिसीमन और आरक्षण के आधार पर चुनाव कराए जाने हैं।

 

इस आधार पर अब मतदाता सूची तैयार की जा रही है। जिसका अंतिम प्रकाशन छह दिसंबर को किया जा रहा है। यह प्रक्रिया पूरी होते ही राज्य निर्वाचन आयोग चुनाव की तारीख घोषित कर सकता है। उल्लेखनीय है कि सरकार वर्ष 2019 के परिसीमन और आरक्षण को निरस्त कर अध्यादेश ला चुकी है। अब विधानसभा के 20 दिसंबर से शुरू हो रहे शीतकालीन सत्र में संशोधन विधेयक प्रस्तुत किया जाएगा।

कार्यक्रम की सूचना चस्पा करेंगे कलेक्टर

पंचायत विभाग ने कलेक्टर कार्यालय, संचालक पंचायत राज संचालनालय और सभी जिला पंचायत कार्यालयों में आरक्षण की सूचना चस्पा करने के निर्देश दिए हैं। ताकि आरक्षण की जानकारी सभी को मिल जाए।

आरक्षण पर कांग्रेस को आपत्ति

जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए आरक्षण कराने पर कांग्रेस को आपत्ति है। पार्टी का कहना है कि जब ग्राम पंचायत और जनपद पंचायत के चुनाव वर्ष 2014 के आरक्षण के आधार पर कराए जा रहे हैं, तो जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए नए सिरे से आरक्षण क्यों किया जा रहा है। त्रि-स्तरीय पंचायत राज संगठन के पदाधिकारियों ने जबलपुर हाई कोर्ट और इंदौर, ग्वालियर बेंच में अध्यादेश के नियमों को चुनौती दी है।

संगठन के संयोजक डीपी धाकड़ कहते हैं कि आधा चुनाव वर्ष 2014 के आरक्षण से और आधे के लिए नया आरक्षण। यह तो संविधान की भावना के खिलाफ हो रहा है। वे कहते हैं कि संविधान में व्यवस्था दी गई है कि चक्रानुक्रम में आरक्षण होगा। यानी हर बार आरक्षण कराना है। फिर वर्ष 2014 के आरक्षण को मानना सरासर गलत है। उन्होंने कहा कि आरक्षण व्यवस्था को लेकर कोर्ट में मामला पहुंच चुका है। सरकार वास्तव में चुनाव कराना ही नहीं चाहती है इसलिए प्रक्रिया को उलझाया जा रहा है।

Exit mobile version