MP के एक लाख से अधिक सरकारी स्‍कूलों में कैमरे की निगरानी में बंट रहा मध्याह्न भोजन

भोपाल । प्रदेश में 1.13 लाख सरकारी स्कूलों के 63 लाख से ज्यादा विद्यार्थियों को कैमरे की निगरानी में मध्यान्‍ह भोजन (सूखा राशन) बांटा जा रहा है। इस काम में 71 हजार से ज्यादा स्व-सहायता समूह की सेवाएं ली जा रही हैं। इन समूहों के सदस्य विद्यार्थियों के घर मध्या- भोजन पहुंचा रहे हैं। दरअसल, कोरोना संक्रमण के चलते स्कूल बंद होने के कारण पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने यह व्यवस्था की है। भोजन वितरण में किसी तरह की गड़बड़ी न हो, इसलिए ब्लॉक से स्कूल स्तर तक वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी की व्यवस्था की गई है। मालूम हो, सुप्रीम कोर्ट ने स्कूली बच्चों को मध्यान्‍ह भोजन देने के निर्देश दिए थे।

कोरोना संक्रमण की वजह से (शैक्षणिक सत्र 2020-21) अप्रैल 2020 से शुरू नहीं हो पाया। इससे 81,382 प्राइमरी स्कूलों में पढ़ने वाले 39 लाख और 31,623 मिडिल स्कूलों में पढ़ने वाले 25 लाख से ज्यादा बच्चों को 73 दिन का मध्यान्‍ह भोजन बांटने में दिक्कत खड़ी हो गई।

लिहाजा विभाग ने 71 हजार से ज्यादा समूहों की मदद से व्यवस्था बनाई है। प्राइमरी स्कूल के बच्चे को 100 ग्राम प्रति दिन के हिसाब से तीन किलो गेहूं या चावल, दो किलो तुअर दाल व 523 ग्राम सोया तेल और मिडिल स्कूल के बच्चों को 150 ग्राम प्रतिदिन के हिसाब से साढ़े चार किलो गेहूं या चावल, तीन किलो तुअर दाल और 783 ग्राम सोया तेल प्रतिमाह दिया जा रहा है।

दाल और तेल की मास्टर किट बनाई गई है तो गेहूं या चावल स्थानीय उचित मूल्य की दुकान से लेकर किट में शामिल किया है। ये बैग समूह के सदस्यों की मदद से बच्चों के घर भेजे जा रहे हैं। पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी कराई जा रही है। इसके लिए समूह के सदस्यों को 6.40 रुपये प्रति किलो ग्राम की दर से राशि दी जा रही है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग अब तक 12.76 करोड़ रुपये राशि बांट चुका है।

इनका कहना है

ये चुनौतीपूर्ण काम था, जो हमने किया है। कोरोना संकट के चलते बंद स्कूलों के 63 लाख से ज्यादा बच्चों तक खाद्य सामग्री पहुंचाई गई है।

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