Mother’s Day 2020: मजदूर मां का बेटा बना डिप्टी कलेक्टर, खेतों में करती थी काम
बचपन में ही पिता का साया बेटे के सिर से छिन गया। मां पर ही दो भाई और एक बहन की सारी जिम्मेदारी थी। घर में पुश्तैनी संपत्ति के नाम पर एक कच्चा मकान और आधा एकड़ से भी कम जमीन थी। मगर मां के हौसले ने न केवल उसे जीना सिखाय। बल्कि आज बेटा डिप्टी कलेक्टर है। उनका कहना है कि वे जो कुछ हैं मां के आशीर्वाद, मेहनत और त्याग के बदौलत हैं। जांजगीर-चांपा जिले के जैजैपुर ब्लॉक के ग्राम चिस्दा निवासी उदयाला तेंदुलकर का परिवार बहुत ही गरीब था। मजदूरी करके वह अपनी पत्नी, दो बेटे व एक बेटी का भरण-पोषण किसी तरह कर रहे थे। वर्ष २००१ में बीमारी की वजह घर के मुखिया असमय ही चल बसे। इसके बाद सारी जिम्मेदारी उसकी पत्नी राममति तेंदुलकर पर आ गई।
गांव में मजदूरी करके वह किसी तरह अपना परिवार पाल रही थी। मगर नियति को यह भी मंजूर नहीं था और इनका बड़ा बेटा राजकुमार भी बीमारी से चल बसा। कुछ दिन बाद बेटी की भी मौत हो गई। अब एकलौते बेटे की देखरेख व पढ़ाई राममति के लिए बड़ी चुनौती थी। फिर भी उसने हार नहीं मानी।
मेहनत मजदूरी करके उसने अपने बेटे को हसौद के सरस्वती शिशु मंदिर में आठवीं तक पढ़ाया। इसके बाद उसने ९वीं से १२ वीं तक पढ़ाई के लिए उसे बिलासपुर भेज दी। यहां उसने मन लगाकर पढ़ाई की और वहीं रहकर कोचिंग करने लगा। वर्ष २०१५ में कौशल की मेहनत रंग लाई और पीएससी द्वारा आयोजित परीक्षा में उसने सफलता प्राप्त की।
साक्षात्कार के बाद उनका चयन डिप्टी कलेक्टर पद के लिए हुआ। सामान्य वर्ग में उनका रेंक ५६ वॉ तथा अजा कैटेगरी में पहला था। वर्तमान में वे कोरिया जिले में डिप्टी कलेक्टर हैं। उनका कहना है कि वे जो कुछ भी है मां की मेहनत, प्रेरणा और आशीर्वाद से हैं। मां खेतों में मजदूरी करने के बाद भी घर का पूरा काम करती थी और उसे पढ़ने के लिए हमेशा प्रेरित करती थी। अब मां भी अपने बेटे के साथ खुश हैं।

