Money Market Record: भारतीय मनी मार्केट में ऐतिहासिक उछाल; TREPS कारोबार ₹5.5 लाख करोड़ के सर्वकालिक उच्च स्तर पर, बैंकों में कर्ज की मांग 2 साल में सबसे तेज

Money Market Record: भारतीय मनी मार्केट में ऐतिहासिक उछाल; TREPS कारोबार ₹5.5 लाख करोड़ के सर्वकालिक उच्च स्तर पर, बैंकों में कर्ज की मांग 2 साल में सबसे तेज

Money Market Record: भारतीय मनी मार्केट में ऐतिहासिक उछाल; TREPS कारोबार ₹5.5 लाख करोड़ के सर्वकालिक उच्च स्तर पर, बैंकों में कर्ज की मांग 2 साल में सबसे तेज

मुंबई/नई दिल्ली: देश के वित्तीय और मनी मार्केट (Money Market) में उधारी और कारोबार का एक नया ऐतिहासिक महा-रिकॉर्ड बन गया है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा संचालित बैंकिंग प्रणाली में सरकारी और निजी बैंकों द्वारा कर्ज (Credit Demand) की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए बड़े पैमाने पर अल्पकालिक उधारी ली जा रही है। इसके चलते मनी मार्केट की गतिविधियां अभूतपूर्व रफ्तार से तेज हो गई हैं।

ब्लूमबर्ग (Bloomberg) द्वारा जारी कड़े आंकड़ों के अनुसार, 13 मई को ट्राइ-पार्टी रेपो (TREPS – Tri-Party Repo) सेगमेंट में दैनिक कारोबार 5.5 लाख करोड़ रुपये के सर्वकालिक उच्च स्तर (All-Time High) पर पहुंच गया। यह सेगमेंट अकेले भारत के कुल मनी मार्केट का करीब 70 प्रतिशत हिस्सा संभालता है, और इस रिकॉर्ड उछाल के बाद भी बाजार में कारोबार का स्तर लगातार ऊंचा बना हुआ है।

 वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत; इन सेक्टर्स में बढ़ी मांग

अमेरिका और ईरान के बीच जारी भू-राजनीतिक तनाव और उससे पैदा हुए वैश्विक ऊर्जा संकट (Energy Crisis) के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था अदम्य मजबूती के साथ आगे बढ़ रही है। यही विधिक कारण है कि देश के कॉर्पोरेट जगत और उद्योगों की ओर से कर्ज की मांग लगातार कड़क बनी हुई है:

 उधारी की लागत बढ़ी: बैंकों के सामने जमा (Deposit) जुटाने की कड़ी चुनौती

बैंकों की इस भारी फंडिंग जरूरत का सीधा असर मनी मार्केट के ब्याज विन्यास पर भी दिखाई दे रहा है:Money Market Record: भारतीय मनी मार्केट में ऐतिहासिक उछाल; TREPS कारोबार ₹5.5 लाख करोड़ के सर्वकालिक उच्च स्तर पर, बैंकों में कर्ज की मांग 2 साल में सबसे तेज

मुख्य अर्थशास्त्री का विश्लेषण: यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की मुख्य अर्थशास्त्री कनिका पासरिचा का कहना है कि मौजूदा लिक्विडिटी परिस्थितियों में मनी मार्केट बैंकों के लिए सबसे सस्ता, सुलभ और आसान फंडिंग स्रोत बन गया है। यही कारण है कि बैंक अपनी दैनिक जरूरतों को पूरा करने के लिए इस बाजार का आक्रामक रूप से इस्तेमाल कर रहे हैं।

दो साल की सबसे तेज रफ्तार; कर्ज और जमा के बीच 400 बेसिस प्वाइंट का अंतर

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के ताजा और प्रामाणिक आंकड़ों ने बैंकिंग क्षेत्र के इस असंतुलन और तेज ग्रोथ को पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है:

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि क्रेडिट की मांग इसी तरह मजबूत बनी रहती है और जमा वृद्धि अपेक्षाकृत धीमी रफ्तार से आगे बढ़ती है, तो आने वाले महीनों में भी मनी मार्केट में उधारी का यह कड़ा स्तर और भारी वॉल्यूम लगातार बना रहेगा।

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