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MeToo: 78 फीसदी मामलों में शिकायत ही नहीं होती

बेंगलुरू।  पूरे देश में जैसे-जैसे मी-टू अभियान जोर पकड़ रहा है एक-एक कर महिलाएं सामने आ रही हैं तथा अपने साथ हुए यौन उत्पीडऩ की घटनाओं को सामने रख रही हैं। इनमें सिनेमा, मीडिया, लेखन, राजनीति सहित तमाम क्षेत्रों से जुड़ी रही महिलाएं अपने अनुभव साझा कर रही हैं। जो घटनाएं अभी तक सामने आई हैं वे तो सिर्फ एक छोटा सा हिस्सा हैं लेकिन इन्होंने महिलाओं की सुरक्षा के मुद्दे खासकर यौन उत्पीडऩ के मामलों को एक बार फिर से केंद्र में ला दिया है। हाल ही में कराए गए एक सर्वेक्षण में 78 फीसदी महिलाओं ने बताया कि उनके साथ या किसी परिचित के साथ हुई यौन उत्पीडऩ की घटना के मामले में ऑफिसियल शिकायत ही नहीं की गई। केवल 22 फीसदी मामलों में ही महिलाओं ने एचआर अथवा उच्च अधिकारियों के सामने शिकायत की।

19 फीसदी घटनाएं ऑफिस टाइम के बाद में हुईं
सर्वे में शामिल 32 फीसदी महिलाओं ने स्वीकार किया कि उनके साथ अथवा उनके परिवार के किसी सदस्य के साथ कार्यस्थल पर यौन दुव्र्यवहार की घटना हुई है। वहीं 45 फीसदी महिलाओं ने खुद अथवा किसी जानकार के साथ ऐसी घटना न होने की बात कही। तेईस फीसदी ने इस मामले में अनभिज्ञता जताई। यौन उत्पीडऩ की जानकारी देने वाली पचास फीसदी महिलाओं ने बताया कि ऐसी घटना ऑफिस टाइम में दफ्तरों के अंदर ही घटी थी जबकि 19 फीसदी घटनाएं ऑफिस टाइम के बाद में हुईं। 31 फीसदी महिलाओं ने बताया कि यौन उत्पीडऩ की घटनाएं उस समय हुईं जब कोई पार्टी या फंक्शन किसी निजी स्थान पर आयोजित किया गया।

यौन उत्पीडऩ की घटनाओं में शराबखोरी की घटनाएं न के बराबर थीं
महिलाओं ने बताया कि यौन उत्पीडऩ के 50 फीसदी मामले शरीर को छूने से संबंधित थे जबकि 19 फीसदी मामलों में महिलाओं से शारीरिक संबंध बनाने का प्रस्ताव रखा गया। वहीं 31 फीसदी मामलों में बताया गया कि महिलाओं को छिपे अर्थों में कमेंट किया गया अथवा वयस्क पिक्चर अथवा वीडियो दिखाने की कोशिश की गई। लोकल सर्किल नाम की संस्था द्वारा आयोजित इस सर्वे में कुल 28000 लोगों से मिले जवाब को शामिल किया गया।

Ashutosh shukla

30 वर्षों से निरन्तर सकारात्मक पत्रकारिता, संपादक यशभारत डॉट काम

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