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सरकारी अस्पतालों की दवाएं फेल: 13 दवाएं अमानक मिलीं

सरकारी अस्पतालों की दवाएं फेल: 13 दवाएं अमानक मिलीं

सरकारी अस्पतालों की दवाएं फेल: 13 दवाएं अमानक मिलीं मध्य प्रदेश पब्लिक हेल्थ सप्लाई कॉर्पोरेशन ने दो से चार वर्ष के लिए संबंधित दवा की आपूर्ति पर लगाई रोक, वितरण भी रोका। सरकारी अस्पतालों में निश्शुल्क वितरण की जाती हैं, पिछले वर्ष पांच दवाएं गुणवत्ता जांच में हो गई थी फेल।

मध्य प्रदेश में रोगियों को रोग से अधिक दर्द सरकारी व्यवस्था दे रही है। जो दवाएं खाकर रोगी खुद के ठीक होने की उम्मीद लगाए रहता है, वही दवाएं गुणवत्ता में फेल हो रही हैं। एक-दो नहीं बल्कि इस वर्ष अभी तक 13 दवाएं गुणवत्ता जांच में अमानक मिल चुकी हैं।

किसी में दवा का पावडर कम मिला है, किसी में दूसरी कमियां सामने आई हैं। अलग-अलग जिलों के सरकारी अस्पतालों से विभिन्न लैब में भेजे गए सैंपलों की जांच में इसकी पुष्टि हुई है। एंटीबायोटिक जेंटामाइसिन और सेफोटैक्सिम सहित चार दवाएं तो अकेले जुलाई माह में गुणवत्ता जांच में फेल पाई गई हैं।

संक्रमण कम होने की जगह बढ़ सकता है
साल 2023 में पांच दवाएं ही अमानक मिली थीं। उनमें एंटीबायोटिक भी शामिल थीं। एंटीबायोटिक दवाएं संक्रमण खत्म करने के लिए होती हैं। इनके अमानक होने पर संक्रमण कम होने की जगह बढ़ सकता है। सैंपल फेल होने के बाद मप्र पब्लिक हेल्थ सप्लाई कॉर्पोरेशन दवाओं का वितरण रोकने के लिए जिलों के सीएमएचओ और सिविल सर्जन को अलग-अलग तारीख में पत्र लिख चुका है।

इसके साथ ही कंपनी से उस दवा की आपूर्ति पर दो से चार वर्ष के लिए रोक लगा दी है। ये दवाएं मेडिकल कॉलेज से संबद्ध अस्पतालों से लेकर, जिला अस्पताल और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक में मरीजों को निश्शुल्क दी जाती हैं। डॉक्टर बाजार की दवा रोगी को नहीं लिख सकते।

ऐसे होती है सैंपलिंग
हर बैच की दवा का सैंपल जांच के लिए सरकार द्वारा अनुबंधित लैब, केंद्र सरकार या प्रदेश सरकार की लैब में भेजा जाता है। किसी बैच का सैंपल किसी अस्पताल ने भेज दिया तो दूसरे अस्पताल से भेजने की आवश्यकता नहीं होती। लैब का चयन सॉफ्टवेयर अपने आप करता है।

इस वर्ष यह दवाएं मिलीं अमानक
सिफोटैक्सिम (एंटीबायोटिक) – संक्रमण रोकथाम
जेंटामाइसिन (एंटीबायोटिक) – संक्रमण रोकथाम
फुरोसेमाइड – सूजन होने पर
एमलोडोपिन – बीपी के लिए
डेक्सामेथासोन (स्टेरायड) इंजेक्शन – दवाओं का प्रभाव बढ़ाने के लिए
एड्रेनालाइन (इंजेक्शन) – हार्मोन के संतुलन के लिए
फेरस एस्कार्बेट और फोलिक एसिड टैबलेट – आयरन और फोलिक एसिड की कमी दूर करने के लिए
पैरासिटामाल सायरप – बुखार उतारने के लिए
मल्टीविटामिन – विभिन्न तरह के विटामिन्स की कमी दूर करने के लिए
ब्रोमेक्जिन हाइड्रोक्लोराइड बाटल – श्वास नली का संक्रमण खत्म करने के लिए
जेंटामाइसिन – आंख और कान का ड्राप
विटामिन बी1, बी2, बी6 बाटल – विटामिन्स की कमी होने पर
बिसाकोडिल – कब्जियत दूर करने के लिए
कंपनी के खिलाफ कार्रवाई भी
दवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए ही सैंपलों की जांच कराई जाती है। जांच भी हम ही कराते हैं। गुणवत्ता जांच के लिए अधिक से अधिक दवाओं के सैंपल लेकर जांच के लिए भेजे जा रहे हैं। इसी कारण अमानक रिपोर्ट की संख्या ज्यादा दिख रही हैं। अमानक दवा मिलने पर संबंधित कंपनी के विरुद्ध कार्रवाई भी करते हैं, जिससे गुणवत्ता में सुधार आ रहा है। – डॉ. पंकज जैन, प्रबंध संचालक, मप्र पब्लिक हेल्थ सप्लाई कॉर्पोरेशन

डॉक्टर भी कराएंगे जांच, एमटीए ने लिखा पत्र
इंदौर मेडिकल कॉलेज में अमानक दवाओं के मामले सामने आने के बाद प्रोग्रेसिव मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन ने भी व्यवस्था पर प्रश्न उठाए हैं। एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. राकेश मालवीय और महासचिव डॉ. अशोक ठाकुर ने मेडिकल कॉलेजों के अंतर्गत आने वाले सभी डाक्टरों से कहा है कि रोगी के उपचार में यदि कोई दवा कम या बिल्कुल प्रभावी नहीं होने की आशंका लगती है तो अपने अस्पताल अधीक्षक को बता कर औषधि निरीक्षकों से सैंपल कराएं। डॉक्टर का पहला उद्देश्य रोगी को ठीक करना है।

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