Manipur: मणिपुर की हिफाजत विभाजक मुद्दे उठाकर नहीं की जा सकती, Jra Sochiye To। मणिपुर में सेना पर कीचड़ उछालने वाले भयानक देशद्रोह कर रहे हैं। यह वह सेना है, जिसकी बदौलत असम, नगालैंड, मिजोरम और मणिपुर भारत का अभिन्न अंग बने हुए हैं। मणिपुर की भौगोलिक एकता पूरे भारत से जुड़ी हुई है। इसकी हिफाजत विभाजक मुद्दे उठाकर नहीं की जा सकती।
दो महीने से ज्यादा वक्त हो गया, मणिपुर में सुधरते-बिगड़ते हालात के बीच आ रहे बयानों से हमारे माथे पर चिंता की लकीरें पड़नी चाहिए। अमेरिका में प्यार की पींगों के बाद अमेरिकी राजदूत एरिक गार्सेटी ने कोलकाता स्थित अमेरिकी वाणिज्य दूतावास में संवाददाताओं से बात करते हुए कहा कि मणिपुर की घटनाएं मानवीय चिंता का विषय हैं।
‘हम शांति की कामना करते हैं
अंग्रेजी दैनिक द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा, ‘हम शांति की कामना करते हैं। जब आप हिंसा में बच्चों को मरता देख रहे हों, तब आपको परवाह करने के लिए भारतीय होना जरूरी नहीं है। अगर कहा जाए, तो हम हर तरह से सहायता करने को तैयार हैं। मार्गदर्शक सिद्धांत यह हो कि हर व्यक्ति जुड़ाव महसूस करे। हम वहां अधिक सहकार, अधिक परियोजनाएं और अधिक निवेश ला सकते हैं।
भारत के पूर्व और पूर्वोत्तर से हमारा सरोकार- अमेरिका
भारत के पूर्व और पूर्वोत्तर से हमारा सरोकार है। यहां के लोगों, स्थानों, क्षमताओं और भविष्य से हमारा सरोकार है।’ म्यांमार, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान से लगे चीन की पहुंच वाले क्षेत्र में बेलौस मुहब्बत तो यह फिक्र नहीं पैदा कर रही, हालांकि गार्सेटी ने यह बताना आवश्यक समझा कि अमेरिका का सरोकार सामरिक नहीं है।
पूर्वोत्तर में बहुराष्ट्रीय कंपनियों के विकास मॉडल का उदाहरण आईएएस अधिकारी आशीष कुंद्रा ने गहन फील्ड वर्क के बाद हाल में प्रकाशित किताब ए रिसर्जेंट नॉर्थ ईस्ट : नैरेटिव्स ऑफ चेंज में दिया है। असम में एक किसान ने उन्हें बताया कि बहुराष्ट्रीय निगमों ने खाद्य वस्तुओं के पीछे षड्यंत्र चला रखा है; वे हाइब्रिड बीज बेचते हैं, जिससे स्थानीय फसलें और जीन पूल तबाह हो रहे हैं।
दूसरा बयान मिजोरम के मुख्यमंत्री और एनडीए के समर्थक, मिजो नेशनल फ्रंट के नेता जोरमथंगा का है। मणिपुर में एक कुकी का सिर काटे जाने के बाद उन्होंने संकेत दिया कि एक प्रशासकीय यूनिट के तहत सभी मिजो जनों को रखने की फ्रंट की ऐतिहासिक मांग फिर रखी जा सकती है। हमारी कामना है कि चर्चों को जलाए जाने, हत्याओं और हिंसा की एक भी फोटो या वीडियो क्लिप अब देखने को न मिले। अगर शांति स्थापित करने का एक ही रास्ता है, तो क्या हम उसे चुनेंगे? सांविधानिक पद पर बैठे किसी व्यक्ति को इस तरह का बयान नहीं देना चाहिए। लेकिन इसकी भी पृष्ठभूमि है। 18 जून को मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने जोरमथंगा से अनुरोध किया कि मिजोरम के मैती निवासियों की सुरक्षा के लिए कदम उठाए जाएं।
भौगोलिक अखंडता की रक्षा में अंतिम अस्त्र सेना को निशाना बनाया जाने लगा
नासूर के फैलाव का यह परिणाम है कि भारत की भौगोलिक अखंडता की रक्षा में अंतिम अस्त्र सेना को निशाना बनाया जाने लगा। मणिपुर में सेना पर कीचड़ उछालने वाले भयानक देशद्रोह कर रहे हैं।
यह वह सेना है, जिसकी बदौलत असम, नगालैंड, मिजोरम और मणिपुर भारत का अभिन्न अंग बने हुए हैं। मणिपुर पुलिस को मैती-कुकी आधार पर बांट दिया गया। अर्द्ध सैनिक बलों की निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न लगाए जाने लगे। सब कुछ बिखर जाए, तो पाकिस्तान और चीन के ही मंसूबे पूरे होंगे।
इशारा कुकियों की ओर था।
मणिपुर में हिंसा के शुरुआती दौर में ही कथानक गढ़ा जाने लगा कि नशे के कारोबारी चोट पड़ने की वजह से हिंसा पर उतर आए हैं। इशारा कुकियों की ओर था। कुकी बहुल पहाड़ी जिले चूराचंद्रपुर का सीमावर्ती इलाका मोरेह तरह-तरह के काले कारोबार का गढ़ है। सुदीप चक्रवर्ती ने अपनी चर्चित पुस्तक द ईस्टर्न गेट में मोरेह प्रवास का आंखें खोल देने वाला विवरण दिया है। हेरोइन विक्रेता, एक मैती महिला ने उन्हें बताया कि लगभग 150 विक्रेताओं में बहुमत कुकियों का है, मगर इनमें करीब बीस फीसदी मैती हैं; इसके अलावा तमिल और अन्य जातीय लोग भी हैं।
चक्रवर्ती बताते हैं कि कर्नाटक और तमिलनाडु के लाल चंदन को मोरेह लाकर म्यांमार और वहां से दक्षिण-पश्चिम चीन भेजा जाता है। भारत के पूर्वोत्तर की तुलना में वहां कीमत चार-पांच गुना हो जाती है। इस धंधे में लगे कुछ असरदार तमिलों की पहुंच पूर्वोत्तर से लेकर हजारों मील दूर दक्षिण भारत तक है। जाहिर है, अंतरराष्ट्रीय तस्कर इतने बड़े मकड़जाल को विशाल भू-भाग में विभिन्न स्तरों पर सरकारी मिलीभगत के बिना सुरक्षित नहीं रख सकते।
कुकी मैतियों के साथ नहीं रहना चाहते
जहरीली मानसिकता सिर्फ एक बिंदु को देखती है। तकरीबन शांत चल रहे मणिपुर में तीन मई को भड़की हिंसा के बाद कुकी मैतियों के साथ नहीं रहना चाहते। उधर मणिपुर के नगाबहुल, करीब एक तिहाई हिस्से पर नगालैंड की नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नगालैंड (आई-एम) पहले से ही दावा कर रही है। मणिपुर की भौगोलिक एकता पूरे भारत से जुड़ी हुई है। इसकी हिफाजत विभाजक मुद्दे उठाकर नहीं की सकती।








