भोपाल (यशभारत)। Madhya Pradesh News मध्य प्रदेश सरकार द्वारा सेवानिवृत्ति की उम्र सीमा में बदलाव नहीं किए जाने से दो साल बाद कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति मंगलवार से शुरू हो गई। 2018 में तत्कालीन शिवराज सरकार ने कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति की उम्र सीमा 60 से बढ़ाकर 62 साल कर दी थी। इसकी वजह थी पदोन्नति में आरक्षण का मामला सुप्रीम कोर्ट में होने के कारण प्रमोशन न हो पाना।
पिछली कमल नाथ सरकार ने वित्तीय संकट के कारण कई बार आयु सीमा बढ़ाने या संविदा नियुक्ति देने पर विचार किया, लेकिन अब तक निर्णय नहीं हो पाया। इस साल लगभग 12 हजार कर्मचारियों के सेवानिवृत्त होने का अनुमान है। ये सारे कर्मचारी भी बिना पदोन्नति के सेवानिवृत्त हो जाएंगे। कोरोना वायरस संक्रमण के चलते इन लोगों का विदाई समारोह भी नहीं हो पाएगा।
राज्य सरकार ने अपनी खराब माली हालत और कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति के बाद सरकारी कामकाज पर पड़ने वाले असर को देखते हुए पूर्व में कमल नाथ सरकार ने सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों को संविदा नियुक्ति देने पर विचार शुरू किया था, लेकिन उस पर कोई निर्णय नहीं हो पाया था।
इसी कारण 31 मार्च को जिन कर्मचारियों का आखिरी कार्यदिवस था, वे सेवानिवृत्त हो गए। उधर, मप्र का पदोन्नति में आरक्षण का मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, इसलिए मप्र में पदोन्नति पर रोक लगी है। इससे कामकाज प्रभावित हो रहा था तो 2018 में शिवराज सरकार ने कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति आयु सीमा दो साल बढ़ाकर 62 साल कर दी थी। दो साल की यह अवधि 31 मार्च को खत्म हो गई है।

