LIVE संसद : अमित शाह ने फिर दोहराया-पीओके भी हमारा, उसके नागरिक भी हमारे

  • नागरिकता संशोधन बिल के पारित होते ही छह दशक पुराना नागरिकता कानून-1955 बदल जाएगा।
  • पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आने वाले गैरमुस्लिम शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता देने की प्रक्रिया सहज हो जाएगी।
गृह मंत्री अमित शाह ने आज लोकसभा में नागरिकता संशोधन विधेयक पेश किया। भारी हंगामे के बीच उन्होंने इसे सदन में रखा जिसका विपक्षी दलों खासकर कांग्रेस ने जोरदार विरोध किया। बिल को सदन में पेश किए जाने पर वोटिंग पर भी हुई जिसके बाद इस पर चर्चा शुरू हुई। अमित शाह ने सरकार का पक्ष सदन के सामने रखा।
अब तक का अपडेट-

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दयानिधि मारन को जवाब देते हुए कहा कि हमें सभी की चिंता है। उन्होंने फिर से दोहराया कि पीओके भी हमारा है और उसके नागरिक भी हमारे हैं।

अमित शाह ने कहा…
जो शरणार्थी है, वो प्रताड़ित होकर हमारी शरण में आया है। वह घुसपैठिया नहीं है।  मैं आपको बताना चाहता हूं कि भारत में क्या हो रहा है। उन्होंने कहा कि भारत में 1951 में 84 फीसदी हिंदू थे लेकिन 2011 में 79 फीसदी हिंदू थे। इसी तरह 1951 में मुस्लिम 9.8 और आज 14.23 प्रतिशत हैं। हम आगे भी धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं होगा। उन्होंने कहा कि पड़ोस के देशों में प्रताड़ना होगी तो भारत मूक दर्शक नहीं बनेगा। उन्हें बचाना पड़ेगा और सम्मान देना होगा।

देश का विभाजन धर्म के आधार पर हुआ। इसी वजह से मुझे यह बिल लाना पड़ेगा। जिस हिस्से में मुस्लिम भाई ज्यादा रहते थे, उसे पाकिस्तान बनाया। बचा हुआ हिस्सा भारतीय संघ बना। आगे चलकर पश्चिमी और पूर्वी पाकिस्तान अलग हुआ और बांग्लादेश बना। मगर बीच एक विभिषिका आई, जिसमें मारना-काटना हुआ। जिन्होंने विभाजन को झेला, वही इस दर्द को बता सकते हैं।

गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि सारे लोग बोले हमने धैर्य से सुना। हमें ठीक लगे या न लगे, लेकिन हमने सभी को सुना। मेरा निवेदन है कि अब मुझे बोलने का मौका मिले
उन्होंने कहा कि 48 सदस्यों ने पक्ष और विपक्ष के चर्चा में हिस्सा लिया। यह बिल लाखों करोड़ों शरणार्थियों को यातना से मुक्ति दिलाने का काम करने जा रहा है। नेहरू लियाकत समझौते में बात हुई कि दोनों देश अपने—अपने शरणार्थियों का ख्याल रखेंगे। मगर 1950 में हुए इस समझौते का पालन नहीं हुआ।

शिवसेना सांसद को नहीं मिला मौका

सदन में बहस के दौरान शिव सेना सांसद अरविंद सावंत को बोलने का मौका नहीं मिला। स्पीकर की भूमिका निभा रहीं मीनाक्षी लेखी ने उनका नाम बुलाया, लेकिन उन्होंने सुना नहीं। इसके बाद उन्होंने सांसद भृतहरि महताब का नाम पुकारा।

इसके बाद अरविंद सावंत अपनी सीट से खड़े हुए और कहा कि उन्हें सुनाई नहीं दिया था। मगर मीनाक्षी लेखी ने फिर से मौका नहीं दिया।

सांसद लॉकेट चटर्जी ने विधेयक को जल्द से जल्द पारित कराने की मांग की
हुगली से भाजपा सांसद लॉकेट चटर्जी ने विधेयक को जल्द से जल्द पारित कराने की मांग की। विधेयक के माध्यम से उन्होंने विपक्ष और कांग्रेस पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में हिंदुओं का नहीं बल्कि रोहिंग्या मुसलमानों का स्वागत किया जाता है।

लॉकेट चटर्जी ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में 70 लाख से ज्यादा घुसपैठिए हैं। राज्य में इन्हीं की वजह से अपराध बढ़ रहा है। वे अपराध करते हैं और बॉर्डर के बाहर भाग जाते हैं। मालदा में हुए दुष्कर्म का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इस मामले में घुसपैठिया शामिल है।

ओवैसी ने सदन में फाड़ा नागरिकता संशोधन बिल
एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने अपना विरोध जताते हुए इस बिल को फाड़ दिया। उन्होंने कहा, ‘संविधान की प्रस्तावना भगवान या खुदा के नाम से नहीं है। आप मुस्लिम लोगों को नागरिकता मत दीजिए। मैं गृह मंत्री से बस यह जानना चाहता हूं कि मुसलमानों से इतनी नफरत क्यों है?’ ओवैसी ने कहा कि विधेयक को हमें एनआरसी के नजरिए से देखना चाहिए। जो हिंदू छूट गए, उनके लिए विधेयक लाया गया। यह मुसलमानों को राज्य विहीन करने की साजिश है। उन्होंने कहा कि देश एक और बंटवारे की तरफ जा रहा है। यह विधेयक हिटलर के कानून से भी ज्यादा बदतर है।

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AIMIM leader Asaduddin Owaisi tore a copy of #CitizenshipAmendmentBill2019 in Lok Sabha.

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एनसीपी की सुप्रिया सुले ने कहा: हमारे लोकतंत्र का पूरा चरित्र ही समानता पर आधारित है। मैं गृह मंत्री से सहमत नहीं हूं। ये सुप्रीम कोर्ट में खारिज हो जाएगा। मैं उनसे गुजारिश करती हूं कि वह इस बिल को वापस ले लें।

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Supriya Sule, NCP on #CitizenshipAmendmentBill2019 in Lok Sabha: Entire ethos of our democracy is equality and talking about Article 14&15, I am not convinced by Home Minister, it will be struck down in Supreme Court. I request him to rethink of it and please withdraw the bill.

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बीजद के प्रसन्ना आचार्य ने कहा- हम इस बिल का समर्थन करेंगे। लेकिन हमारी मांग है कि इसमें श्रीलंका को भी शामिल करना चाहिए क्योंकि अतीत में वहां अल्पसंख्यकों पर अत्याचार हुआ है। साथ ही सरकार को इस धारणा को भी खत्म करना चाहिए कि ये बिल मुस्लिमों के खिलाफ है।

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