Tuesday, May 19, 2026
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ladli behna yojana लाड़ली बहना’ से शिवराज की वापसी का गणित, फिलहाल बैकफुट पर विपक्ष

ladli behna yojana मेरे भैया की ये गूंज अगली बार फिर शिवराज सरकार की दस्तक देती दिखाई देती है. लाड़ली बहना योजना मध्यप्रदेश में फिर भाजपा सरकार की वापसी का रोडमैप तैयार करती दिख रही है. प्रदेश में लगभग 5 करोड़ 40 लाख मतदाता हैं. लाड़ली बहनों की पंजीकृत संख्या करीब एक करोड़ 25 लाख है और लगभग सभी मतदाता हैं, यानी कुल मतदाताओं का 25 फीसदी. ये 25 फीसदी शिवराज सरकार को अगले चुनाव में 150 से ज्यादा सीटें दिलवा सकती हैं.

लाड़ली बहना के सामने कांग्रेस की नारी सम्मान योजना है. भाजपा के एक हजार रुपए (अब 1250) के सामने कांग्रेस ने 1500 रुपए का ऐलान किया है. बावजूद इसके जनता के बीच उसकी चर्चा ज्यादा है. इस बारे में राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि जनता चेहरे पर भरोसा करती है, कागजी पुर्जों पर नहीं. मध्यप्रदेश में शिवराज सिंह चौहान वह चेहरा बन चुके हैं जिन पर जनता, खासकर आर्थिक कमजोर और महिला वर्ग को बेहद भरोसा है. वे उन्हें वादा निभाने वाले अपने बीच के आदमी लगते हैं, जबकि कांग्रेस के कमलनाथ का सीधे जनता से कोई जुड़ाव नहीं है. वे एक उद्योगपति की छवि में कैद हैं. ऐसे में लाड़ली बहना के करीब एक करोड़ वोट शिवराज के चेहरे को मिलने की संभवना ज्यादा है. कांग्रेस की नारी सम्मान योजना कहीं भी इस दौड़ में नहीं दिखती.

मध्य प्रदेश में जिस तरह से लाड़ली बहना योजना की प्रतिक्रिया दिख रही है, उसने कांग्रेस की पूरी रणनीति को बैकफुट पर कर दिया है. आइए समझते हैं लाड़ली बहना का मतदान से गणित,

  • कुल एक करोड़ 25 लाख लाड़ली बहना का पंजीयन, इन्हें अब 1250 रुपए प्रतिमाह मिल रहे हैं 
  • एक करोड़ 25 लाख में से आधे वोट भी अगर बीजेपी को मिलते हैं तो ये करीब 50 लाख वोट होंगे 
  • 50 लाख वोट यानी कुल मतदाताओं का करीब दस फीसदी 
  • 50 लाख वोट, अगर पिछले चुनाव के वोटिंग ट्रेंड्स, 70 फीसदी मतदान, से देखें तो यह आंकड़ा कुल मतदान का करीब 15 फीसदी होगा 
  • मध्यप्रदेश में भाजपा कांग्रेस के बीच वोट प्रतिशत का अंतर एक से तीन फीसदी ही अब तक रहा है 
  • ऐसे में 15 फीसदी वोट की बढ़त मध्य प्रदेश में सरकार की करीब 30-35 फीसदी सीट में इजाफा करेगी 

एक करोड़ से ज्यादा लाड़ली बहना बनीं प्रचारक 
इस योजना को बारीकी से देखेंगे तो यह सिर्फ सवा करोड़ महिलाओं के वोट का मामला नहीं है.

Ashutosh shukla

30 वर्षों से निरन्तर सकारात्मक पत्रकारिता, संपादक यशभारत डॉट काम