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कटनी में पारा बढ़ने पर प्रशासन अलर्ट: कलेक्टर ने जारी की हीट वेव एडवायजरी; जानें लक्षण, बचाव और प्राथमिक उपचार के तरीके

कटनी। कटनी में पारा बढ़ने पर प्रशासन अलर्ट: कलेक्टर ने जारी की हीट वेव एडवायजरी; जानें लक्षण, बचाव और प्राथमिक उपचार के तरीके।   भारतीय मौसम विभाग (IMD) द्वारा मध्य भारत सहित पूरे मध्य प्रदेश में औसत से अधिक तापमान रहने की आशंका जताए जाने के बाद कटनी जिला प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद हो गया है। आम जनमानस को जानलेवा लू और तपती गर्मी के प्रकोप से सुरक्षित रखने के लिए कटनी कलेक्टर श्री आशीष तिवारी ने एक विस्तृत जनहित एडवायजरी (Advisory) जारी की है।

कटनी में पारा बढ़ने पर प्रशासन अलर्ट: कलेक्टर ने जारी की हीट वेव एडवायजरी; जानें लक्षण, बचाव और प्राथमिक उपचार के तरीके

प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे हीट स्ट्रोक (लू लगना) से बचने के लिए गाइडलाइन का सख्ती से पालन करें। इस सरकारी गाइडलाइन में हीट वेव के लक्षण, आपात स्थिति और प्राथमिक उपचार को लेकर बेहद महत्वपूर्ण जानकारियां दी गई हैं।

1. हीट वेव के लक्षण और गंभीर स्थितियां

एडवायजरी के अनुसार, अत्यधिक गर्मी के कारण शरीर पर तीन अलग-अलग चरणों में गंभीर असर पड़ सकता है:

  • सन बर्न (त्वचा का जलना): इसमें त्वचा पर लाल चकत्ते, सूजन, फफोले पड़ना, बुखार और सिरदर्द जैसी समस्याएं होती हैं।

  • शारीरिक ऐंठन और थकावट: पैरों और पेट की मांसपेशियों में तेज दर्द, अत्यधिक पसीना आना, कमजोरी महसूस होना, शरीर का ठंडा व पीला पड़ जाना, नब्ज कमजोर होना, उल्टी या मूर्छा (बेहोशी) आना इसके मुख्य लक्षण हैं।

  • ताप-दाह (Heat Stroke – आपात स्थिति): यह सबसे खतरनाक स्थिति है। इसमें मरीज को अत्यधिक तेज बुखार होता है, त्वचा बिल्कुल सूखी और गर्म हो जाती है, नब्ज तेज चलती है, लेकिन मरीज को पसीना आना बंद हो जाता है। यह एक मेडिकल इमरजेंसी है।

2. स्थिति बिगड़ने पर क्या करें? (प्राथमिक उपचार)

  • सन बर्न होने पर: प्रभावित व्यक्ति को बार-बार सामान्य पानी से नहलाएं। फफोले होने पर स्टरलाइज ड्रेसिंग करें और डॉक्टर को दिखाएं।

  • थकावट या ऐंठन होने पर: व्यक्ति को तुरंत किसी छायादार या ठंडे स्थान पर ले जाएं। ऐंठन वाले हिस्से को हल्के हाथों से सहलाएं और दबाएं। मरीज को ओआरएस (ORS), नींबू पानी, छाछ या आम का पना पिलाएं। यदि उल्टी (उकबाई) आ रही हो, तो कुछ भी पीने को न दें।

  • ताप-दाह (Heat Stroke) होने पर: पसीना बंद होने और बेहोशी छाने पर तत्काल 108 एम्बुलेंस को कॉल करें। एम्बुलेंस आने तक मरीज को एसी (AC) या ठंडे कमरे में ले जाएं, कपड़े ढीले करें और पूरे शरीर पर ठंडे पानी की पट्टी (स्पंजिंग) करें। इस स्थिति में मरीज को कुछ भी पीने को बिल्कुल न दें और जरूरत पड़ने पर सीपीआर (CPR) शुरू करें।

3. हीट वेव से बचाव के लिए प्रशासन की गाइडलाइन

कलेक्टर आशीष तिवारी द्वारा जारी निर्देशों में नागरिकों से निम्नलिखित सावधानियां बरतने को कहा गया है:

  • दोपहर में बाहर जाने से बचें: यथासंभव दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे के बीच तेज धूप में बाहर निकलने से परहेज करें।

  • तरल पदार्थों का सेवन: प्यास न लगी हो तब भी थोड़ी-थोड़ी देर में पानी पीते रहें। घर से बाहर निकलते समय पानी की बोतल हमेशा साथ रखें। लस्सी, छाछ, नींबू पानी, और आम के पने का नियमित सेवन करें।

  • पहनावा: धूप में निकलते समय सिर को कपड़े, टोपी या छतरी से ढकें। हमेशा सूती, हल्के रंग के और ढीले कपड़े पहनें। सिंथेटिक और गहरे रंग के कपड़ों से बचें।

  • इन बातों का रखें विशेष ध्यान: भारी, वसायुक्त (ऑयली) और ज्यादा प्रोटीन वाले भोजन से परहेज करें। अल्कोहल (शराब), चाय और कॉफी का सेवन कम से कम करें क्योंकि ये शरीर में पानी की कमी (Dehydration) पैदा करते हैं। धूप से सीधे आने के तुरंत बाद न नहाएं।

  • मूक पशुओं का ध्यान: अपने पालतू जानवरों और मवेशियों को हमेशा छांव वाले स्थान पर बांधें और उनके लिए पीने के साफ पानी की पर्याप्त व्यवस्था रखें।

प्रशासन ने जिले के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को भी अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति में मरीजों को तुरंत इलाज मुहैया कराया जा सके।

Usha Pamnani

20 वर्षों से डिजिटल एवं प्रिंट मीडिया की पत्रकारिता में देश-विदेश, फ़िल्म, खेल सहित सामाजिक खबरों की एक्सपर्ट, वर्तमान में यशभारत डॉट कॉम में वरिष्ठ जिला प्रतिनिधि