कृष्ण जन्माष्टमी 2026: जानिए इस साल कब मनाया जाएगा यह पावन पर्व, शुभ मुहूर्त और पूजन विधि
Janmashtami Muhurt: 16 अगस्त को विशेष शुभ मुहूर्त और लक्ष्मी‑नारायण योग से मेष, कर्क, कन्या, वृश्चिक एवं मकर राशियों को मिलेगा बड़ा लाभ
कृष्ण जन्माष्टमी 2026: जानिए इस साल कब मनाया जाएगा यह पावन पर्व, शुभ मुहूर्त और पूजन विधि
नई दिल्ली: सनातन धर्म में श्री कृष्ण जन्माष्टमी का विशेष महत्व है। भगवान विष्णु के आठवें अवतार भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव हर साल भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, रक्षाबंधन के लगभग 6-7 दिन बाद आने वाला यह पर्व इस वर्ष 4 सितंबर 2026 (शुक्रवार) को मनाया जाएगा।
जन्माष्टमी 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त
विवरण
समय एवं तिथि
जन्माष्टमी पर्व तिथि
4 सितंबर 2026, शुक्रवार
अष्टमी तिथि प्रारंभ
4 सितंबर 2026 को रात 02:25 AM से
अष्टमी तिथि समाप्त
5 सितंबर 2026 को मध्यरात्रि 12:13 AM तक
रोहिणी नक्षत्र प्रारंभ
4 सितंबर 2026 को 12:29 AM से
रोहिणी नक्षत्र समाप्त
4 सितंबर 2026 को रात 11:04 PM तक
निशिता (मुख्य पूजा) मुहूर्त
4 सितंबर की रात 11:57 PM से 12:43 AM (5 सितंबर)
व्रत पारण समय
5 सितंबर 2026 को सुबह 06:01 AM के बाद
चौघड़िया मुहूर्त (4-5 सितंबर 2026)
चर (सामान्य): 06:00 AM से 07:35 AM
लाभ (उन्नति): 07:35 AM से 09:10 AM
अमृत (सर्वोत्तम): 09:10 AM से 10:45 AM
शुभ (उत्तम): 12:20 PM से 01:55 PM
चर (सामान्य): 05:05 PM से 06:39 PM
लाभ (उन्नति): 09:30 PM से 10:55 PM
शुभ (उत्तम – रात्रि): 12:20 AM से 01:45 AM (5 सितंबर)
पूजन विधि
दिनभर का व्रत: श्रद्धालु पूरे दिन उपवास रखते हैं और भगवान कृष्ण के बाल स्वरूप (बाल गोपाल) का ध्यान व भजन-कीर्तन करते हैं।
रात 12 बजे अभिषेक: मुख्य पूजा मुहूर्त (रात 12 बजे) पर बाल गोपाल की मूर्ति का दूध, दही, घी, शहद और शक्कर (पंचामृत) तथा गंगाजल से अभिषेक किया जाता है।
शृंगार: अभिषेक के बाद बाल गोपाल को नए वस्त्र पहनाए जाते हैं और उनका मोरपंख, बांसुरी, मुकुट व वैजयंती माला से सुंदर शृंगार किया जाता है।
विशेष भोग: भगवान कृष्ण को माखन-मिश्री, धनिया पंजीरी, पंचामृत, तुलसी दल और खीर का भोग लगाया जाता है।