दोस्ती हो तो ऐसी! न तूफान का डर, न मौत का खौफ: आकाशीय बिजली की चपेट में आए दोस्त को बचाने के लिए 10 KM तक दौड़ाई ट्राइसाइकिल, लेकिन…
दोस्ती हो तो ऐसी! न तूफान का डर, न मौत का खौफ: आकाशीय बिजली की चपेट में आए दोस्त को बचाने के लिए 10 KM तक दौड़ाई ट्राइसाइकिल, लेकिन…। आज के दौर में जहां मामूली बातों पर लोग अपनों का साथ छोड़ देते हैं, वहीं ओडिशा के कोरापुट जिले से दोस्ती और इंसानियत की एक ऐसी बेमिसाल कहानी सामने आई है, जिसे सुनकर हर किसी की आंखें नम हो जा रही हैं।
दोस्ती हो तो ऐसी! न तूफान का डर, न मौत का खौफ: आकाशीय बिजली की चपेट में आए दोस्त को बचाने के लिए 10 KM तक दौड़ाई ट्राइसाइकिल, लेकिन…
एक मजदूर ने अपने घायल साथी की जान बचाने के लिए तेज बारिश, कड़कती बिजली और आंधी-तूफान की परवाह किए बिना अपनी पूरी ताकत झोंक दी। वह अपने दोस्त को मोटर ट्राइसाइकिल पर लादकर करीब 10 किलोमीटर दूर अस्पताल ले गया, लेकिन अफसोस कि वह किस्मत की लकीरों को नहीं बदल सका और अस्पताल पहुंचने से ठीक पहले उसके दोस्त ने दम तोड़ दिया।
मैदान में बैठे थे दोस्त, अचानक गिरी आकाशीय बिजली
यह दिल दहला देने वाली घटना कोरापुट जिले के लक्ष्मीपुर इलाके की है। जानकारी के मुताबिक, पश्चिम बंगाल के रहने वाले कुछ मजदूर कोरापुट में रहकर मजदूरी का काम करते थे। रविवार को काम खत्म करने के बाद शेख जमील नाम का मजदूर अपने अन्य साथियों के साथ एक खुले मैदान में पेड़ के नीचे बैठा हुआ था। इसी दौरान अचानक मौसम का मिजाज बदल गया और तेज आंधी-तूफान के साथ मूसलाधार बारिश होने लगी।
इससे पहले कि मजदूर संभल पाते, आसमान से कड़कती हुई बिजली (आकाशीय बिजली) सीधे उनके पास आ गिरी। इस हादसे में शेख जमील बुरी तरह झुलस गया और वहीं अचेत होकर गिर पड़ा।
जब नहीं मिली एम्बुलेंस, तो दोस्त ने दिखाई हिम्मत
बिजली गिरते ही चारों तरफ अफरा-तफरी मच गई। जमील की हालत लगातार बिगड़ रही थी और वह जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहा था। खराब मौसम और भारी बारिश के कारण तुरंत कोई एम्बुलेंस या बड़ी गाड़ी मिलना नामुमकिन लग रहा था। ऐसे में जमील के एक दोस्त ने हिम्मत नहीं हारी। उसने बिना वक्त गंवाए अपनी मोटर ट्राइसाइकिल निकाली, घायल जमील को उस पर लिटाया और सैलाब बनी सड़कों पर अस्पताल की तरफ भाग पड़ा।
तूफान को चीरते हुए तय किया 10 किलोमीटर का सफर
रास्ते में थपेड़े मारती बारिश और आंधी की वजह से ट्राइसाइकिल चलाना बेहद मुश्किल हो रहा था, लेकिन दोस्त की आंखों के सामने सिर्फ अपने साथी की जान बचाने का मकसद था। वह लगातार ईश्वर से प्रार्थना करते हुए और तूफान को चीरते हुए करीब 10 किलोमीटर दूर स्थित अस्पताल पहुंचा।
जब वह हांफता हुआ अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में दाखिल हुआ, तो वहां मौजूद हर शख्स इस जज्बे को देखकर हैरान रह गया। मगर, होनी को कुछ और ही मंजूर था। डॉक्टरों ने जांच के बाद शेख जमील को मृत घोषित कर दिया। डॉक्टरों का कहना था कि अस्पताल पहुंचने से कुछ देर पहले ही उसकी सांसें थम चुकी थीं।
भले ही जंग हार गया, पर दिल जीत गया दोस्त
भले ही वह युवक अपने दोस्त की जिंदगी की जंग नहीं बचा सका, लेकिन उसकी इस निस्वार्थ कोशिश ने पूरे इलाके के लोगों का दिल जीत लिया है। सोशल मीडिया से लेकर अस्पताल परिसर तक, जिसने भी इस दोस्त का समर्पण देखा, उसकी आंखें भर आईं। यह घटना हमें सिखाती है कि सच्ची दोस्ती केवल अच्छे दिनों की मोहताज नहीं होती, बल्कि मौत के सामने भी डटकर खड़े होने का नाम है।
मौसम विभाग और प्रशासन ने इस हादसे के बाद एक बार फिर लोगों से अपील की है कि तेज बारिश या आंधी-तूफान के दौरान कभी भी खुले मैदान या पेड़ के नीचे शरण न लें, क्योंकि यह जानलेवा साबित हो सकता है।

