मुर्शिदाबाद में हुमायूं कबीर का ‘डबल धमाका’! रेजिनगर और नाओदा दोनों सीटों पर बनाई बढ़त, क्या टीएमसी के गढ़ में मचेगा तहलका?
मुर्शिदाबाद/कोलकाता: मुर्शिदाबाद में हुमायूं कबीर का ‘डबल धमाका’! रेजिनगर और नाओदा दोनों सीटों पर बनाई बढ़त, क्या टीएमसी के गढ़ में मचेगा तहलका?। पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में इस बार का विधानसभा चुनाव बेहद चौंकाने वाले परिणाम लेकर आ रहा है। जिले की सबसे हॉट मानी जाने वाली रेजिनगर और नाओदा सीटों पर ‘आम जनता उन्नयन पार्टी’ (AJUP) के नेता हुमायूं कबीर ने शुरुआती रुझानों में टीएमसी और बीजेपी दोनों के समीकरण बिगाड़ दिए हैं।
मुर्शिदाबाद में हुमायूं कबीर का ‘डबल धमाका’! रेजिनगर और नाओदा दोनों सीटों पर बनाई बढ़त, क्या टीएमसी के गढ़ में मचेगा तहलका?
1. हुमायूं कबीर की ‘दोहरी’ लीड
हुमायूं कबीर इस बार दो सीटों से चुनाव लड़ रहे हैं और ताज़ा अपडेट के अनुसार वे दोनों ही जगह आगे चल रहे हैं:
- नाओदा सीट: यहाँ दो राउंड की गिनती के बाद कबीर 11,320 वोटों के साथ सबसे आगे हैं। उन्होंने टीएमसी की साहिना मोमताज खान पर 5,328 वोटों की मजबूत बढ़त बना ली है।
- रेजिनगर सीट: अपने पुराने गढ़ रेजिनगर में भी कबीर ने शुरुआती रुझानों में बढ़त हासिल कर ली है, जिससे टीएमसी के रबीउल आलम चौधरी की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
2. रेजिनगर का सियासी गणित और इतिहास
रेजिनगर सीट 2011 में अस्तित्व में आई थी और इसका इतिहास बड़ा दिलचस्प रहा है:
- 2021 का नतीजा: टीएमसी के रबीउल आलम चौधरी ने बीजेपी के अरविंद बिस्वास को 68,000 से अधिक वोटों से हराया था।
- मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र: यहाँ लगभग 65.10% मुस्लिम मतदाता हैं, जो हार-जीत का फैसला करते हैं। हुमायूं कबीर की अपनी पार्टी (AJUP) ने इसी वोट बैंक में बड़ी सेंध लगाई है।
- ग्रामीण बेल्ट: यह पूरी तरह से ग्रामीण क्षेत्र है, जहाँ स्थानीय मुद्दे और हुमायूं कबीर का व्यक्तिगत प्रभाव टीएमसी के ‘क्रेज’ पर भारी पड़ता दिख रहा है।
3. लोकसभा के नतीजों से उलट रुझान?
2024 के लोकसभा चुनाव में बहरामपुर संसदीय सीट (जिसके तहत रेजिनगर आता है) से टीएमसी के यूसुफ पठान ने बड़ी जीत दर्ज की थी। लेकिन मात्र दो साल के भीतर विधानसभा चुनाव में हुमायूं कबीर जैसे स्थानीय दिग्गज की बढ़त यह संकेत दे रही है कि मुर्शिदाबाद की जनता ने स्थानीय चेहरे और अपनी पार्टी (AJUP) पर भरोसा जताया है।

