High Court Action on PWD: हाई कोर्ट के हंटर से झुका लोक निर्माण विभाग-कनिष्ठों को मलाईदार पदों पर बैठाने वाले तबादले किए संशोधित; प्रमुख सचिव सुखवीर सिंह को कोर्ट की कड़ी चेतावनी

प्रशासनिक डेस्क: मध्य प्रदेश लोक निर्माण विभाग (PWD) में वरिष्ठता (Seniority) को दरकिनार कर चहेते कनिष्ठ (Junior) अधिकारियों को उच्च और मलाईदार पदों पर पदस्थ करने के खेल पर माननीय हाई कोर्ट ने अपना सबसे कड़ा चाबुक चलाया है। कोर्ट के बेहद सख्त और आक्रामक रवैये के बाद विभाग में हड़कंप मच गया है।

इस मामले में हाई कोर्ट ने लोक निर्माण विभाग के प्रमुख सचिव सुखवीर सिंह द्वारा समय पर उत्तर (जवाब) न देने को बेहद गंभीरता से लिया। कोर्ट ने प्रमुख सचिव को भविष्य के प्रति कड़े शब्दों में सचेत (चेतावनी) भी किया है। हाई कोर्ट के इस कड़े एक्शन का असर यह हुआ कि विभाग ने आनन-फानन में उन सभी विवादित अधिकारियों के तबादले फिर से संशोधित कर दिए हैं, जिनकी नियुक्ति को लेकर कोर्ट में सवाल उठाए गए थे।

‘जब खुद पर आती है तो तुरंत बदल जाते हैं आदेश’- कर्मचारी संगठनों का फूटा गुस्सा

हाई कोर्ट की इस फटकार और विभाग द्वारा तुरंत कदम पीछे खींचने के बाद प्रदेश के कर्मचारी संगठनों ने मोर्चा खोल दिया है। कर्मचारी नेताओं का कहना है कि यह कोई पहला मामला नहीं है जब अधिकारियों को बचाने के लिए नियमों को रातों-रात बदल दिया गया: High Court Action on PWD: हाई कोर्ट के हंटर से झुका लोक निर्माण विभाग-कनिष्ठों को मलाईदार पदों पर बैठाने वाले तबादले किए संशोधित; प्रमुख सचिव सुखवीर सिंह को कोर्ट की कड़ी चेतावनी

  • अधिकारियों के लिए अलग, कर्मचारियों के लिए अलग नियम?: कर्मचारी संगठनों ने तीखा सवाल उठाते हुए कहा कि जब-जब भी उच्च अधिकारियों के ऊपर कोई आंच आती है या कोर्ट की अवमानना का खतरा होता है, तो सरकार और विभाग तुरंत अपने आदेश संशोधित कर देते हैं।

  • लाखों कर्मचारियों के मामलों में कोर्ट-कचहरी क्यों?: इसके विपरीत, जब प्रदेश के लाखों गरीब और आम कर्मचारियों के हितों (जैसे पदोन्नति, एरियर, पेंशन या क्रमोन्नति) से जुड़े मामले सामने आते हैं, तो विभाग महीनों तक फाइलें दबाए रखता है और कर्मचारियों को कोर्ट-कचहरी के चक्कर काटने के लिए मजबूर किया जाता है।

‘सबके लिए एक जैसी नीति हो’-सरकार से बड़ी मांग

प्रशासन के इस दोहरे रवैये को लेकर अब प्रदेशभर के कर्मचारी संगठनों ने लामबंद होना शुरू कर दिया है। संगठनों ने मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव से मांग की है कि चाहे लोक निर्माण विभाग हो या कोई अन्य सरकारी महकमा, नियमों और कोर्ट के आदेशों के पालन में सबके लिए एक जैसी पारदर्शी नीति (Uniform Policy) रखी जानी चाहिए। कनिष्ठों को उपकृत करने और वरिष्ठों के हक मारने की इस परंपरा को हमेशा के लिए बंद किया जाना चाहिए।