Underwater Superpower: ₹70,000 करोड़ के ‘प्रोजेक्ट-76’ से समंदर में मचेगा तहलका- MDL और L&T स्वदेशी पनडुब्बी बनाने की रेस में आमने-सामने

Underwater Superpower: ₹70,000 करोड़ के 'प्रोजेक्ट-76' से समंदर में मचेगा तहलका- MDL और L&T स्वदेशी पनडुब्बी बनाने की रेस में आमने-सामने

Underwater Superpower: ₹70,000 करोड़ के ‘प्रोजेक्ट-76’ से समंदर में मचेगा तहलका- MDL और L&T स्वदेशी पनडुब्बी बनाने की रेस में आमने-सामने

डिफेंस डेस्क: भारतीय नौसेना की भविष्य की अंडरवॉटर (पानी के नीचे) युद्ध क्षमता को फौलादी बनाने वाले सबसे महत्वाकांक्षी ‘प्रोजेक्ट-76’ (Project-76) को लेकर बड़ी और बेहद सकारात्मक खबर आई है। सरकारी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) और निजी क्षेत्र की महारथी लार्सन एंड टुब्रो (L&T) अब पूरी तरह स्वदेशी पनडुब्बी (Submarine) के डिजाइनों को अंतिम रूप देने में जुट गई हैं।

यह प्रोजेक्ट विदेशी डिजाइनों पर भारत की निर्भरता को पूरी तरह खत्म कर देगा और देश को पनडुब्बी निर्माण के मामले में दुनिया के एलीट देशों की कतार में खड़ा कर देगा।

क्या है प्रोजेक्ट-76 और कितनी है इसकी ताकत?

यह भारतीय नौसेना का पहला ऐसा रक्षा कार्यक्रम है, जिसमें बिना किसी विदेशी मदद के पूरी तरह भारत की जरूरतों के अनुरूप अगली पीढ़ी की 12 डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियां विकसित की जाएंगी। ये नई पनडुब्बियां नौसेना के बेड़े में शामिल पुरानी हो रही पनडुब्बियों की जगह लेंगी।

‘साइलेंट किलर’ पनडुब्बियों की 6 जादुई क्षमताएं:

प्रोजेक्ट-76 के तहत बनने वाली इन अत्याधुनिक पनडुब्बियों में ऐसी घातक तकनीकें होंगी, जिससे दुश्मन का समंदर में टिकना नामुमकिन हो जाएगा:

  1. हफ्तों तक पानी में छिपने की ताकत: डीआरडीओ (DRDO) द्वारा विकसित स्वदेशी एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन (AIP) सिस्टम और एडवांस लिथियम-आयन बैटरियों की बदौलत ये पनडुब्बियां बिना सतह पर आए लगातार 2 से 3 सप्ताह या उससे अधिक समय तक पानी के नीचे दुश्मन का शिकार कर सकेंगी।

  2. ब्रह्मोस मिसाइल से होगी लैस: इसमें लंबी दूरी की क्रूज मिसाइलों (जैसे ब्रह्मोस) को दागने के लिए वर्टिकल लॉन्च सिस्टम (VLS) दिया जाएगा।

  3. स्टील्थ तकनीक: एडवांस स्टील्थ और स्वदेशी कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम के कारण इन्हें दुश्मन के रडार या सोनार से पकड़ पाना नामुमकिन होगा।

  4. डिस्प्लेसमेंट: लगभग 3000 टन डिस्प्लेसमेंट के साथ ये भारी-भरकम हथियार और खतरनाक टॉरपीडो ले जाने में सक्षम होंगी।

MDL बनाम L&T: देश की दो दिग्गज कंपनियों में महा-मुकाबला

इस प्रोजेक्ट को समय पर पूरा करने के लिए भारत की दो सबसे बड़ी रक्षा कंपनियां अपने-अपने स्तर पर बेस्ट डिजाइन तैयार कर रही हैं:

क्या है इस प्रोजेक्ट की पूरी टाइमलाइन (Timeline)?

हिंद महासागर में भारत की कूटनीतिक और रणनीतिक जीत

डिफेंस एक्सपर्ट्स का मानना है कि MDL और L&T के बीच यह प्रतिस्पर्धा देश के लिए बेहद फायदेमंद है। इससे पनडुब्बियों में 80% से 95% तक स्वदेशीकरण हासिल होगा, जिससे कलपुर्जों के लिए विदेशी प्रतिबंधों का खतरा हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा। इस प्रोजेक्ट से देश के MSME इकोसिस्टम और घरेलू रक्षा उद्योगों को हजारों करोड़ के ऑर्डर मिलेंगे। सबसे बड़ी बात, भविष्य में भारत इन पनडुब्बियों को मित्र देशों को निर्यात (Export) भी कर सकेगा।

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