भोपाल। तेजी से बदलते राजनीतिक घटनाक्रम के बीचमध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कमल नाथ को पार्टी नहीं छोड़ने के लिए कांग्रेस हाईकमान और गांधी परिवार ने मनाया। कमल नाथ के अपने सांसद बेटे नकुल नाथ के साथ भाजपा में शामिल होने की हफ्ते भर से अटकलें चल रही हैं। इन पर कल विराम लग गया और यह तय हो गया कि कमल नाथ कांग्रेस का हाथ नहीं छोड़ेंगे। लोकसभा चुनाव से पहले यह कांग्रेस के लिए राहत भरी बात है।
जानकारों के अनुसार कांग्रेस पार्टी ने कमल नाथ को चुनाव से पहले पार्टी बदलने से रोक जरूर लिया, लेकिन इसके लिए कांग्रेस हाईकमान से लेकर गांधी परिवार के सदस्यों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।
दिग्विजय सिंह ने निभाई बड़ी भूमिका
सूत्रों के अनुसार कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने हाईकमान और कमल नाथ के बीच सुलह कराने में बड़ी भूमिका निभाई।
फोन पर हुई एकाधिक बार बात
बताया जाता है कि शनिवार से सोमवार तक तीन दिन पूर्व सीएम कमल नाथ से फोन पर एकाधिक बात की गई। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी रविवार की रात कमल नाथ से फोन पर चर्चा कर उन्हें खासा समझाया। इस दौरान कांग्रेस और गांधी परिवार के साथ उनके दशकों पुराने जुड़ाव का हवाला भी दिया गया।
हाईकमान ने मनाया कमल नाथ को, इनकी रही बड़ी भूमिका
राहुल गांधी ने भी बातचीत की
समझा जाता है कि इसके बाद राहुल गांधी ने भी कमल नाथ को फोन कर उनसे लंबी चर्चा की और पार्टी नहीं छोड़ने का आग्रह किया। सूत्रों की मानें तो गांधी परिवार के एक और सदस्य ने भी कमल नाथ से फोन पर बात की।
यह है कमल नाथ के खफा होने का कारण
उल्लेखनीय है कि मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की हार के बाद कमल नाथ को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाया गया था। इसके साथ ही विरोधी गुट के जीतू पटवारी को प्रदेश कांग्रेस की कमान सौंपी गई। पटवारी को राहुल गांधी का करीबी माना जाता है। कमल नाथ इसके कारण राहुल से खफा बताए जा रहे थे।