GST: पंजीयन के पहले पैन वेरीफिकेशन होगा, खंगालेंगे रिकार्ड
GST: जीएसटी पंजीयन के पहले पैन वेरीफिकेशन होगा, खंगालेंगे रिकार्ड
। जीएसटी में रजिस्ट्रेशन के लिए नई गाइडलाइन जारी कर दी गई है। जीएसटी का पंजीयन देने से पहले आवेदन करने वाले व्यवसायी के स्थायी खाता क्रमांक (पैन) का सत्यापन भी अधिकारी करेंगे। उसका पुराना रिकार्ड खंगालेंगे और जरूरत पड़ने पर भौतिक सत्यापन भी होगा।
वित्त मंत्रालय व केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीआइसी) ने दो दिन पहले सभी प्रिंसिपल चीफ कमिश्नरों और जीएसटी के उच्चाधिकारियों को इस बारे निर्देश भेजे हैं।
बीते वर्षों में बोगस जीएसटी पंजीयन के हजारों मामले सामने आने के बाद अब नई गाइडलाइन के जरिये पंजीयन देने से पहले ही फर्जीवाड़े पर रोक लगाने की कोशिश की जा रही है। जीएसटी में रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया आसान रही है।
कोई भी व्यक्ति आधार कार्ड प्रमाणीकरण के बाद आवेदन करता है तो सात दिन में रजिस्ट्रेशन जारी करना अनिवार्य था। यदि आधार प्रमाणीकरण नहीं किया है तो 30 में रिजस्ट्रेशन देना अनिवार्य है।
इसी प्रक्रिया का लाभ उठा कर चोरी करने वाले लोगों ने फर्जी रजिस्ट्रेशन हासिल किए। इनसे करोड़ों के बोगस इनवाइस जारी कर जीएसटी क्रेडिट जारी की जा रही है।
रिस्क रेटिंग सिस्टम : पता चलेगी व्यवसायी की श्रेणी
फर्जी रजिस्ट्रेशन की रोकथाम के लिए सीबीआइसी ने 14 जून को नई गाइडलाइन जारी की है। इसमें रिस्क रेटिंग सिस्टम लागू किया गया है। अब जीएसटी नेटवर्क और डायरेक्टरेट जनरल आफ एनालिटिक्स के द्वारा विभिन्न पैरामीटर के आधार पर रेटिंग दी जाएगी। अधिकारी देख सकेंगे कि व्यवसायी हाई रिस्क की श्रेणी में है या लो रिस्क की श्रेणी में। कोई व्यवसायी हाई रिस्क श्रेणी में है तो व्यवसाय स्थल का भौतिक सत्यापन और सब उचित पाने के बाद ही रजिस्ट्रेशन जारी होगा। आवेदनकर्ता के पैन के आधार पर पूर्व में कभी आवेदन आया या नहीं यह देखा जाएगा।
व्यवसाय स्थल की भी पड़ताल
अब यह भी जांच होगी कि ग्रीन बेल्ट या खेती की जमीन या सरकारी जमीन पर व्यवसाय स्थल बताकर तो आवेदन नहीं किया है। सीए जय नागपाल के अनुसार, जीएसटी पोर्टल पर यह व्यवस्था भी की जा रही है कि यदि विभागीय अधिकारी को रजिस्ट्रेशन के आवेदन में कुछ शंका होती है तो वे व्यवसाय स्थल के सत्यापन के बाद ही आवेदन पर निर्णय लेंगे।
इसलिए किया नियमों में बदलाव
रिकार्ड का मिलान होगा
रजिस्ट्रेशन देने से पहले बिजली के बिल, संपत्ति के दस्तावेजों और नगर पालिका के रिकार्ड से संबंधित के दस्तावेज व रिकार्ड का मिलान होगा। इसका लाभ ईमानदार व्यापारियों को मिलेगा, क्योंकि ईमानदार व्यापारी को पता नहीं होता था और विभाग बोगस व्यापारी के भागने पर व्यापार करने वाले ईमानदार पर कार्रवाई कर देता था। -आरएस गोयल, कर सलाहकार

