Ganpati Bappa Moriya: गणेश मंदिर: जहां चिट्ठी लिखकर अर्जी लगाते हैं भक्त और पान के पत्तों का चढ़ता है भोग
Ganpati Bappa Moriya: गणेश मंदिर: जहां चिट्ठी लिखकर अर्जी लगाते हैं भक्त और पान के पत्तों का चढ़ता है भोग

Ganpati Bappa Moriya: गणेश मंदिर: जहां चिट्ठी लिखकर अर्जी लगाते हैं भक्त और पान के पत्तों का चढ़ता है भोग। इंदौर का खड़े गणेश मंदिर, जिसे खजराना गणेश मंदिर के नाम से भी जाना जाता है, एक प्रसिद्ध हिंदू मंदिर है जहां भक्त चिट्ठी लिखकर अर्जी लगाते हैं और पान के पत्तों का भोग चढ़ता है। इस मंदिर का निर्माण 1735 में महारानी अहिल्याबाई होल्कर ने करवाया था ¹। यह मंदिर भगवान गणेश को समर्पित है और यहां की विशेषता है कि भक्त चिट्ठी लिखकर अपनी मनोकामना भगवान गणेश को अर्पित करते हैं। इसके अलावा, यहां पान के पत्तों का भोग चढ़ाया जाता है, जो एक अनोखी परंपरा है।
गणेश चतुर्थी की रौनक पूरे देश में है। इसके साथ ही प्रमुख मंदिरों की भी चर्चा होने लगी है। मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में भी गणेश जी ऐसा ही एक मंदिर है। आमतौर पर भगवान गणेश के बैठे हुए स्वरूप के दर्शन होते हैं, लेकिन यहां बप्पा खड़े हैं।
। राजस्थान के कोटा के विश्व प्रसिद्ध खड़े गणेश मंदिर की तरह ही इंदौर के रावजी बाजार में 300 वर्ष पुराने प्राचीन चिंताहरण गणेश मंदिर (खड़े गणेश) है। आमतौर पर गणेश मंदिरों में भगवान गणेश के बैठे हुए स्वरूप के दर्शन होते हैं, लेकिन यहां 700 वर्ष पुरानी खड़े गणेश की नृत्य मुद्रा वाली पांच फीट ऊंची प्रदेश की एकमात्र मूर्ति है।
मूर्ति का निर्माण हर माह पुष्य नक्षत्र आने पर कारीगर द्वारा किया गया था। मंदिर की वर्तमान इमारत का निर्माण जमींदार परिवार द्वारा इंदौर स्थापना के कुछ अरसे पश्चात हुई। चांदी के आवरण वाले गर्भगृह में लोग घरों में होने वाले मांगलिक कार्यों के लिए उनकी पूजा-अर्चना करते हैं।
मनोकामना पूर्ति के लिए एक से ज्यादा परिक्रमा
- मनोकामना पूर्ति के लिए श्रद्धालु एक से ज्यादा (3 या 7) परिक्रमा लगाते हैं।
- पहले बड़े दरवाजे के पास कलकल बहती कान्ह नदी शोभायमान बनाती थी।
- शयन आरती के दौरान भक्तों को गणेश नृत्य मुद्रा की अनुभूति होती थी।
- सचिव राजेंद्र व्यास बताते हैं, श्रद्धालु गणनायक के नाम चिट्ठी भेजते हैं।
- गणेश व्रत संकल्प पूर्ण होने पर रीति रिवाज के साथ अनुष्ठान होते हैं।
भक्त कलावा बंधवाकर ग्रहण करते प्रसाद
भक्त मंडल के निलेश तिवारी बताते हैं कि विवाह तथा उपनयन संस्कार की पत्रिका खड़े गणेश मंदिर में भी प्रेषित की जाती है। गणनाथ के आशीर्वाद से सभी मांगलिक कार्य निर्विघ्न संपन्न होते हैं। भक्त कलावा बंधवा कर प्रसाद ग्रहण करते है।

गर्भगृह में प्रवेश हेतु नियम पालन आवश्यक है। बुधवार और प्रतिमाह की चतुर्थी पर विशेष साज सज्जा होती है। हार फूल के साथ पान के पत्ते अर्पित किए जाते हैं।








