खरीफ फसलों की बोवनी करने किसानों को पहली बारिश का इंतजार, अलनीनो के असर से कमजोर पड़ा मानसून

कटनी(YASHBHARAT.COM)। जिले में खरीफ फसलों (धान, सोयाबीन, मक्का आदि) की बुवाई के लिए किसान बेसब्री से मानसून की पहली व पर्याप्त बारिश (लगभग 100 मिमी) का इंतजार कर रहे हैं। जून का महीना खत्म होने को है लेकिन मानसून की धीमी चाल और कम बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। मौसम विभाग द्वारा इस साल कम बारिश की संभावना जताने के बाद किसानों की चिंताएं बढ़ गई हैं। किसान परेशान हैं कि कम बारिश या सूखे की स्थिति में किस फसल की बुवाई करें। इस साल जून में बारिश न के बराबर हुई है, अधिकांश किसानों ने खेत तैयार किए हैं लेकिन वे असमंजस में हैं। ऐसे में कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को बेहद अहम सलाह दी है। जिले में खरीफ सीजन में एक लाख 30 हजार हेक्टयर के लगभग रकबे में बोवनी की जाती है। खरीफ सीजन की सबसे प्रमुख फसल धान, सोयाबीन, मक्का और तुअर है। मौसम विभाग ने अल नीनो प्रभाव के चलते इस साल मानसून में सामान्य से कम बारिश होने का अनुमान जताया है। कई किसान दीर्घकालिक फसलों की खेती भी करते हैं, जिसमें पानी की अधिक आवश्यकता पड़ती है।

कम पानी वाली फसलें अपनाने की सलाह

किसानों की चिंता को देखते हुए कृषि वैज्ञानिकों ने सलाह दी है कि अगर पानी की पर्याप्त व्यवस्था हो तो ही बोवनी करें अन्यथा कम अवधि और कम सिंचाई वाली फसलें लगाएं ताकि कम अवधि वाली फसल से बेहतर उपज लें सके। कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों की चिंता को जायज ठहराया है। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार अल नीनो का प्रभाव है। प्रशांत महासागर का तापमान दो डिग्री बढ रहा है, इससे बारिश सामान्य से कम हो सकती है।

किसानों की प्रमुख चिंताएं

धीमा मानसून:-दक्षिण-पश्चिम मानसून की गति धीमी होने के कारण मध्य और उत्तर भारत में बारिश सामान्य से काफी कम हुई है, जिससे कई जगह खेतों में दरारें पडऩे लगी हैं।

बढ़ती लागत:-बारिश नहीं होने से किसानों को धान की नर्सरी और अन्य फसलों को बचाने के लिए निजी पंपसेट और डीजल का उपयोग करना पड़ रहा है, जिससे खेती की लागत बढ़ रही है।

बुवाई में असमंजस:-कृषि विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि किसानों को पहली हल्की बारिश देखकर जल्दबाजी में बुवाई नहीं करनी चाहिए। बीज बर्बाद होने से बचाने के लिए कम से कम 3 से 4 इंच अच्छी बारिश का इंतजार करना चाहिए।

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