असम में बड़ा फैसला: 3 से ज्यादा बच्चे होने पर गर्भवती महिलाओं को सरकारी अस्पताल में नहीं मिलेगी ‘फ्री जांच’, 1 जुलाई से नियम लागू
गुवाहाटी/बारपेटा: जनसंख्या नियंत्रण को लेकर असम सरकार की ‘टू-चाइल्ड पॉलिसी’ (Two-Child Policy) के बीच अब राज्य के एक सरकारी अस्पताल ने बेहद चौंकाने वाला और बड़ा फैसला लिया है। असम के बारपेटा जिले के एक सरकारी अस्पताल में अब उन गर्भवती महिलाओं को मुफ्त डायग्नोस्टिक (फ्री जांच और अल्ट्रासाउंड) की सुविधा नहीं मिलेगी, जिनके पहले से तीन या उससे ज्यादा बच्चे हैं। यह नया नियम आगामी 1 जुलाई से पूरी तरह लागू होने जा रहा है।
असम विधानसभा के स्पीकर और स्थानीय विधायक रंजीत कुमार दास ने सोमवार को इस फैसले की जानकारी दी। इतना ही नहीं, उन्होंने असम के स्वास्थ्य मंत्री अशोक सिंघल को सलाह दी है कि इस कड़े नियम को सिर्फ एक अस्पताल तक सीमित न रखकर पूरे असम राज्य के सभी सरकारी अस्पतालों में अनिवार्य कर दिया जाए।
3 से ज्यादा बच्चे तो अल्ट्रासाउंड के देने होंगे पैसे
दरअसल, रंजीत कुमार दास बारपेटा रोड शहर में स्थित ‘फर्स्ट रेफरल यूनिट’ (FRU) अस्पताल की मैनेजमेंट कमिटी के अध्यक्ष हैं। अस्पताल में नई अत्याधुनिक अल्ट्रासाउंड मशीन के उद्घाटन के दौरान उन्होंने बताया:असम में बड़ा फैसला: 3 से ज्यादा बच्चे होने पर गर्भवती महिलाओं को सरकारी अस्पताल में नहीं मिलेगी ‘फ्री जांच’, 1 जुलाई से नियम लागू
“मैनेजमेंट कमिटी ने सर्वसम्मति से यह नियम बनाया है कि जिन महिलाओं के 3 से ज्यादा बच्चे हैं या जो चौथी बार मां बनने वाली हैं, उन्हें अस्पताल में मुफ्त इलाज और जांच की सुविधाएं नहीं दी जाएंगी। अगर ऐसी महिलाओं को फ्री सुविधाएं मिलती रहीं, तो सरकार की जनसंख्या नियंत्रण (Population Control) की योजना पूरी तरह फेल हो जाएगी।”
पूरे असम में नियम लागू करने की मांग
स्पीकर दास ने स्वास्थ्य मंत्री से अपील की है कि वे पूरे राज्य के स्वास्थ्य केंद्रों के लिए एक नई गाइडलाइन जारी करें ताकि लोग छोटे परिवार के महत्व को समझें।
बता दें कि असम सरकार ने जनसंख्या को नियंत्रित करने के लिए पहले से ही ‘दो-बच्चों का नियम’ बेहद कड़ा कर रखा है। पिछले साल दिसंबर 2025 में असम सरकार ने जनसंख्या और महिला सशक्तिकरण नीति (2017) में बड़ा संशोधन किया था, जिसके तहत सरकारी नौकरी, स्वयं-सहायता समूहों (SHG) के लाभ और पंचायत या नगरपालिका चुनाव लड़ने के लिए अधिकतम दो बच्चों की शर्त को अनिवार्य कर दिया गया है।
इन समुदायों को दी गई है विशेष छूट
सरकार की इस जनसंख्या नीति में राज्य के कुछ विशेष समुदायों को जनसंख्या नियमों में ढील दी गई है, जिनमें शामिल हैं:
- अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST)
- चाय बागान जनजाति (Tea Garden Tribes)
- मटक-मोरन समुदाय
इन समुदायों के लोगों के लिए तीन बच्चे होने पर भी सरकारी नौकरी, कल्याणकारी योजनाओं के लाभ और चुनाव लड़ने की योग्यता पर कोई रोक नहीं होगी। 5 दिसंबर 2025 को जारी अधिसूचना के बाद यह नीति पूरे राज्य में प्रभावी है, लेकिन बारपेटा अस्पताल के इस नए ‘फ्री जांच बंद’ करने वाले फैसले ने राज्य की सियासत में एक नई बहस छेड़ दी है।
