Exclusive: इन दस मौकों पर फेल हुआ मध्यप्रदेश का इंटेलिजेंस सिस्टम

भोपाल। मध्य प्रदेश में किसान आंदोलन के दौरान हिंसा का मामला हो या फिर दलितों के उग्र आंदोलन का मामला, हर बार इंटेलिजेंस सिस्टम की विफलता ही सामने आई है. एक साल में कई ऐसी बड़ी घटनाएं हुई हैं, जिसने इंटेलिजेंस सिस्टम पर सवाल खड़े किए हैं.
मध्य प्रदेश में किसान आंदोलन के हिंसक रूप लेने का पहले से अंदेशा होने के बावजूद कई किसानों की मौत के बाद बेकाबू हालातों ने पहले ही इंटलिजेंस सिस्टम की पोल खोल कर रख दी थी. ऐसे में दलित आंदोलन में हुई हिंसक घटना ने एक बार फिर सिस्टम पर सवाल खड़े किए हैं. पिछली कुछ घटनाओं पर नजर डालें तो खुफिया तंत्र पूरी तरह फेल साबित हुआ है.
नंबर-1: मंदसौर गोलीकांड
6 जून 2017 को मंदसौर में किसान उग्र हुए. इंटेलिजेंस का इनपुट नहीं होने की वजह से पुलिस हालात को काबू में नहीं कर पाई. उग्र हुए किसानों ने आगजनी की और पुलिस फायरिंग में कई किसानों की मौत हो गई.
नंबर-2: आईएसआई एजेंटों का नेटवर्क
2017 में मध्य प्रदेश में पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई एजेंट का एक नेटवर्क पकड़ा गया. एक दर्जन से ज्यादा लोगों में एक भाजपा कार्यकर्ता भी शामिल था. करीब तीन साल से ये आईएसआई के लिए सूचना तंत्र बने हुए थे, लेकिन पुलिस बेखबर थी. जम्मू-कश्मीर पुलिस और केंद्रीय एजेंसी से इनपुट मिलने के बाद एटीएस की नींद खुली और इस नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ.
नंबर-3: उज्जैन ट्रेन बम ब्लास्ट
2017 फरवरी में उज्जैन ट्रेन में ब्लास्ट करने वाला आईएस नेटवर्क तीन साल से प्रदेश में सक्रिय था. लेकिन उसकी भनक इंटेलिजेंस को नहीं लगी.
नंबर-4: नर्मदा बचाओ आंदोलन
4 मई 2017 को सरदार सरोवर डूब क्षेत्र के विस्थापितों के साथ नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेत्री मेधा पाटकर ने मंत्रालय का घेराव किया. इंटेलिजेंस सिस्टम फेल होने के कारण पुलिस को घंटो बाद खबर मिली.
नंबर-5: भोपाल में हिंसा
30 मई 2017 को भोपाल में दो पक्ष आमने-सामने आए. लोगों ने गाड़ियों और दुकान में आगजनी की. पुलिस ने शुरुआत से घटना को हल्के में लिया. इंटेलीजेंस का इनपुट नहीं मिलने से हालात बिगड़े.
नंबर-6: भोपाल जेल ब्रेक
30-31 अक्टूबर 2016 की दरमियानी रात सिमी के आठ कैदी एक सिपाही की हत्या कर जेल से भागे. अगले दिन सुबह ही पुलिस ने इन्हें मार गिराया, लेकिन बाद में पता चला कि ये कैदी कई दिनों से जेल ब्रेक की तैयारी कर रहे थे, लेकिन पुलिस को खबर तक नहीं लग पाई.
नंबर-7: राजभवन के सामने आत्मदाह की कोशिश
2016 में सात सितंबर को भी पूर्व राज्यपाल रामनरेश यादव की विदाई के दौरान उनके काफिले के सामने आरटीआई कार्यकर्ता मनोज त्रिपाठी ने आत्मदाह का प्रयास किया था. इस मामले में भी इंटेलिजेंस फेल रहा था. मनोज त्रिपाठी ने घटना के एक दिन पहले ही आत्मदाह करने को लेकर मीडियाकर्मियों सहित सोशल मीडिया में भी इसकी जानकारी दी थी.
नंबर-8: खंडवा जेल ब्रेक
अक्टूबर 2013 में सिमी के सात कैदी खंडवा जेल से भाग गए थे, जिसमें अबु फैजल भी शामिल था. सिमी कैदियों की इस साजिश का पर्दाफाश करने में भी पुलिस नाकाम साबित हुई थी. ये सभी कैदी जेल के बाथरूम तोड़कर भागे थे. इससे पहले उन्होंने खासी तैयारी भी की थी.
नंबर-9: नक्सल हथियार कारखाना
भोपाल के बीएचईएल इलाके में जनवरी 2007 में नक्सलियों का हथियार बनाने का कारखाना पकड़ा गया था, जिसमें नक्सली मशीन गन, रॉकेट लांचर और मोर्टार बना रहे थे. हथियार कारखाना कई महीनों से चल रहा था, लेकिन पुलिस को भनक नहीं लगी थी.
नंबर-10
2016 में एनआईए ने भोपाल में कई महीनों से रह रहे आईएस के एजेंट अजहर इकबाल को गिरफ्तार किया था. इंटेलिजेंस को कई महीनों से अजहर की संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी नहीं थी.
जब इंटेलिजेंस सिस्टम का फेल होने का मामला सामने आता है, तो इंटेलिजेंस के अधिकारी बस मामले की समीक्षा कर कार्रवाई करने की बात कहते हैं. लेकिन बीते कई सालों से इंटेलिजेंस सिस्टम पर सवाल उठ रहे हैं.
इंटेलिजेंस सिस्टम को लेकर सवाल यही है कि क्या एमपी में इंटेलिजेंस नाम का कोई सिस्टम है? यदि सिस्टम है, तो ये सिस्टम किसके लिए 24 घंटे काम कर रहा है. ऐसा क्यों होता है कि घटना के बाद ही एमपी का इंटेलिजेंस सिस्टम काम करना शुरू करता है.








