
कटनी । आगामी 28 अगस्त को अतिशेष शिक्षकों की काउंसलिंग कराके उन्हें ग्रामीण क्षेत्रों में पदस्थ करने संबंधी शासकीय फरमान को अधिकारी -कर्मचारी संयुक्त मोर्चा संघ द्वारा अनुचित ठहराते हुये, इस प्रक्रिया के क्रियान्वयन पर सख़्ती से रोक लगाये जाने की मांग की गयी है ।
प्रवक्ता कुंवर मार्तण्ड सिंह राजपूत द्वारा जारी प्रेस नोट्स में स्पष्ट किया गया है, कि शालाओं में निर्मित हुई अतिशेष शिक्षकों की स्थिति में अभी तक शासन की ही महत्वपूर्ण भूमिका देखने को मिली है. जाहिर है,यदि विद्यालयों में शिक्षकों की कमी नहीं थी, तो फिर वहाँ स्थान्तरण के माध्यम से सीनियर शिक्षको के विरुद्ध जूनियर शिक्षकों को पदस्थ ही क्यों किया गया।
.दूसरी बात आज ज़ब शिक्षकों के बच्चे शहर के विभिन्न विद्यालयों में दाखिला लेकर अपनी पढ़ाई लिखाई कर रहे हैं, तब बीच सत्र में शिक्षकों को अतिशेष मानकर उन्हें देहाती क्षेत्र में खदेड़ना कहाँ की इंसाफ़ी है?तीसरी बात,इन दिनों युद्ध स्तर पर उच्च पद प्रभार की प्रक्रिया चलने से शिक्षा पोर्टल को बगैर अपडेट किये ही शिक्षकों के अतिशेष रुपी जिन्न को बाहर निकालकर शिक्षकों का माखोल बनाना पूरे शैक्षणिक वातावरण को दूषित करने जैसा कृत्य है.।
आज ज़ब शहर और उसके आस पास के सभी विद्यालय स्थातरणों और उच्चपद रूपी झुनझुना से भर गये हैं, तब सीनियर शिक्षकों को हटाना, शिक्षकों के साथ वेइंसाफी है।
. यही वजह है, कि शिक्षकों का पक्ष जवरजस्त तरीके से उन्होंने प्रदेश के यसस्वी मुख्यमंत्री सहित शिक्षामंत्री और प्रमुख सचिव को इ- मेल द्वारा रखकर उन्हें न्याय दिलाने हेतु अधिकारी -कर्मचारी संयुक्त मोर्चा संघ अपना कदम आगे बढ़ाया है।
अतिशेष शिक्षकों से जुड़ी उनकी निर्दोष व्यथा को आयुक्त लोक शिक्षण संस्थान को दूरभाष पर बताते हुये प्रवक्ता ने इस प्रक्रिया को आगामी शिक्षा सत्र तक के लिये विराम देने की उनसे अपील किये हैं.








