अरहर उत्पादन की ‘धारवाड़ पद्धति’ से तीन गुना तक बढ़ सकती है आय: विजयराघवगढ़ कॉलेज में विद्यार्थियों को दिया गया जैविक खेती का प्रशिक्षण

अरहर उत्पादन की ‘धारवाड़ पद्धति’ से तीन गुना तक बढ़ सकती है आय: विजयराघवगढ़ कॉलेज में विद्यार्थियों को दिया गया जैविक खेती का प्रशिक्षण

कटनी: शासकीय महाविद्यालय विजयराघवगढ़ में व्यावसायिक शिक्षा के अंतर्गत स्नातक विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ-साथ स्वरोजगार से जोड़ने के उद्देश्य से एक विशेष जैविक कृषि तकनीकी प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। प्राचार्य डॉ. अरुण कुमार सिंह के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम में जैविक कृषि विशेषज्ञ रामसुख दुबे ने विद्यार्थियों को अरहर (तुअर) उत्पादन की आधुनिक ‘धारवाड़ पद्धति’ और जैविक खेती के विभिन्न पहलुओं का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया।

धारवाड़ पद्धति: पौध तैयार करने से लेकर भंडारण तक की प्रक्रिया

विशेषज्ञ रामसुख दुबे ने विद्यार्थियों को कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त करने के लिए धारवाड़ पद्धति की संपूर्ण प्रक्रिया समझाई:

तीन गुना अधिक आय का आर्थिक विश्लेषण

कृषि विशेषज्ञ ने अरहर की पारंपरिक और धारवाड़ पद्धति के बीच का आर्थिक अंतर समझाते हुए बताया:

विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए बताया गया कि उन्नत एवं वैज्ञानिक कृषि तकनीकों को अपनाकर खेती को एक बेहद लाभप्रद और सफल स्वरोजगार के रूप में विकसित किया जा सकता है।

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