धर्मेंद्र प्रधान का संसद में ज़ोरदार स्वागत: एनडीए सांसदों ने पहनाया ‘पाग’, लगाए जिंदाबाद के नारे; इस्तीफा देने के बाद पहली बार पहुंचे पार्लियामेंट
नई दिल्ली: हाल ही में शिक्षा मंत्री के पद से नैतिकता के आधार पर इस्तीफा देने वाले वरिष्ठ नेता धर्मेंद्र प्रधान सोमवार को जब संसद पहुंचे, तो राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के सांसदों ने उनका अभूतपूर्व और गर्मजोशी से स्वागत किया। संसद के मकर द्वार (Makar Dwar) पर एनडीए सांसदों ने “धर्मेंद्र प्रधान जिंदाबाद” के नारे लगाए और उन्हें पारंपरिक ‘पाग’ (पगड़ी) पहनाकर सम्मानित किया।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि एनडीए सांसदों द्वारा संसद परिसर में किया गया यह स्वागत यह स्पष्ट संदेश देता है कि धर्मेंद्र प्रधान ने अपना त्यागपत्र किसी दबाव में नहीं, बल्कि विशुद्ध रूप से नैतिक मूल्यों और छात्र हित को सर्वोपरि रखते हुए दिया है।
क्या होता है ‘पाग’?
‘पाग’ एक विशेष प्रकार की पारंपरिक पगड़ी है। मिथिला, राजस्थान और गुजरात जैसे क्षेत्रों में यह सम्मान, आदर, स्वागत और स्नेह का प्रतीक मानी जाती है। संसद भवन के द्वार पर उन्हें पाग पहनाकर एनडीए ने एकजुटता और उनके प्रति सम्मान का प्रदर्शन किया।
सीजेपी के उग्र प्रदर्शन के बाद दिया था इस्तीफा: एक्स (X) पर लिखी थी भावुक पोस्ट
सीजेपी के उग्र प्रदर्शन और देश में उपजे हालात के बीच धर्मेंद्र प्रधान ने पद से इस्तीफा देकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक विस्तृत संदेश साझा किया था। उन्होंने लिखा था:
“मैं सदैव हमारे प्रजातंत्र की शक्ति में अटूट विश्वास रखने वाला रहा हूं तथा युवाओं की आकांक्षाओं और सपनों का गहरा सम्मान करता हूं। युवा केवल भारत का भविष्य ही नहीं, बल्कि विकसित भारत के शिल्पकार हैं। पिछले 10 दिनों के घटनाक्रम से मेरा मन दुःखी है। यह मेरे लिए व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का विषय नहीं है। देश की युवाशक्ति को भ्रम के कुचक्र में नहीं फंसने देंगे।”
“जंतर-मंतर और देश में बनी स्थिति का फायदा कोई राष्ट्रविरोधी ताकतें न उठाएं और विद्यार्थियों का भविष्य कानूनी पेचीदगियों में न उलझे, इसी बात पर विचार करते हुए मैंने अपना त्यागपत्र माननीय प्रधानमंत्री जी को भेज दिया है।”
विपक्ष के हंगामे के कारण दोनों सदन स्थगित
एक तरफ जहां संसद परिसर के बाहर धर्मेंद्र प्रधान के स्वागत का मामला चर्चा का केंद्र बना रहा, वहीं दूसरी तरफ सदन के भीतर विपक्ष ने इस मुद्दे और शिक्षा व्यवस्था को लेकर जमकर हंगामा किया। भारी हंगामे और नारेबाजी के चलते लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों की कार्यवाही को स्थगित करना पड़ा।
