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दिल्ली बम ब्लास्ट में फंसाने की धमकी देकर साइबर ठगों ने किया शहर के चिकित्सक दंपति को डिजिटल अरेस्ट, बेटे का फोन आते ही लाखों की ठगी से बाल बाल बचे

कटनी(YASHBHARAT.COM)। शहर में डिजिटल अरेस्ट का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें गहोई समाज के वरिष्ठ सदस्य और आजाद चौक–गाटरघाट निवासी डॉ. हजारीलाल गुप्ता और उनकी पत्नी शुक्रवार दोपहर करीब डेढ़ घंटे तक साइबर अपराधियों के जाल में फंसे रहे। खुद को एनआईए और दिल्ली क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताने वाले साइबर ठगों ने डॉक्टर को यह कहकर डराया कि दिल्ली के लाल किले के पास हुए हालिया बम विस्फोट में उनके नाम से खरीदी गई सिम कार्ड का दुरुपयोग हुआ है और वे अब आतंकवाद से जुड़े गंभीर मामले में फंस चुके हैं। अपराधियों ने डॉक्टर दंपत्ति को मानसिक रूप से इतना डरा-धमका दिया कि उन्होंने घर का कमरा अंदर से बंद कर लिया और किसी से बात तक नहीं कर पाए। पूरी अवधि के दौरान वे अपराधियों के वीडियो कॉल पर डिजिटल अरेस्ट में रहे।

 

इस तरह किया डिजिटल अरेस्ट

 

डॉ. गुप्ता के मोबाइल पर नंबर 6913516533 से कॉल आया। कॉल करने वाले ने अपना नाम इंस्पेक्टर कुशल सिंह बताते हुए कहा कि वे “ट्रस्ट इन्वेस्टिगेशन एजेंसी” दिल्ली से बोल रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि कुछ दिन पहले हुए बम विस्फोट में पकड़े गए आरोपी डॉ. अमर अल्वी के ठिकाने से जो 140 संदिग्धों की सूची मिली है, उसमें डॉ. गुप्ता का नाम भी है।

 

साइबर ठगों ने कहा

 

  • आपके नाम की सिम का आतंकियों ने दुरुपयोग किया है।

 

  • यह सिम मुंबई बांद्रा की एक दुकान से खरीदी गई है।

 

  • यदि आप सहयोग नहीं करेंगे तो आपको जेल जाना पड़ेगा।

 

इसके बाद ठग ने उनका पूरा पता, परिवार में कौन-कौन हैं, यह जानकारी लेकर तुरंत कमरे में बंद होने का दबाव बनाया।

 

वीडियो कॉल पर 123 कैमरों की निगरानी का झांसा

 

कुछ ही मिनट बाद डॉक्टर को नंबर 9332893852 से वीडियो कॉल आया। कॉल पर मौजूद व्यक्ति ने स्वयं को “वरिष्ठ अधिकारी” बताया और कहा कि उन्हें बचाने के लिए “एनआईसी से सुरक्षा प्रमाणपत्र” बनाना होगा, जिसके लिए उनके बैंक खातों और आधार कार्ड की जानकारी आवश्यक है।

 

डर कर चिकित्सक ने दे दी खाते की जानकारी

 

  • एक बैंक खाते में 10 लाख रुपये होने की जानकारी दे दी,

 

  • आधार कार्ड का विवरण भी साझा कर दिया।

 

  • इसके बाद ठग उनके मोबाइल पर आने वाले ओटीपी मांगने लगे, ताकि रकम निकाल सकें।

 

बेटे की सतर्कता और दोस्तों की तत्परता ने बचाई लाखों की ठगी

 

इसी दौरान डॉक्टर के बेटे का फोन आया। बातचीत के दौरान बेटे ने मां की घबराहट को महसूस किया और तुरंत कटनी में रहने वाले अपने परिचित अभय त्रिसोलिया और अन्य दोस्तों को घर भेजा। लोग जब घर पहुंचे तो दरवाजा अंदर से बंद था। बहुत देर तक आवाज देने और दरवाजा पीटने के बाद डॉ. गुप्ता ने दरवाजा खोला। अभय त्रिसोलिया ने तुरंत डॉक्टर के हाथ से फोन लेकर कॉल बंद किया और मोबाइल स्विच ऑफ कर दिया। इसी कदम से लाखों की संभावित साइबर लूट टल गई।

 

सायबर सेल में शिकायत, खाते कराए लॉक

 

घटना के बाद डॉक्टर दंपत्ति गहन सदमे में हैं। उन्होंने पूरी घटना की लिखित शिकायत साइबर सेल में दर्ज कराई। सुरक्षा के तौर पर सभी बैंक खातों को भी लॉक करा दिया गया है।

 

शहर का चिकित्सक समुदाय चिंतित 

 

इस हाई-प्रोफाइल डिजिटल अरेस्ट मामले ने कटनी शहर, खासकर चिकित्सक समुदाय में चिंता बढ़ा दी है। साइबर अपराधियों द्वारा नई-नई तकनीकों से लोगों को फंसाने की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं।

 

साइबर विशेषज्ञों की राय 

  • किसी भी सरकारी एजेंसी का अधिकारी वीडियो कॉल पर जांच नहीं करता।

 

  • धमकी देकर पैसे या व्यक्तिगत जानकारी मांगना 100% साइबर ठगी का तरीका है।

 

  • ऐसी किसी भी कॉल को तुरंत डिस्कनेक्ट कर साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करें।

साइबर ठगों से सावधान रहें लोग 

डॉ. गुप्ता और उनके परिवार के जीवन में यह एक बड़ा आघात था, लेकिन समय रहते लोगों की सतर्कता ने उन्हें भारी आर्थिक नुकसान से बचा लिया। यह घटना पूरे जिले के लिए चेतावनी है कि साइबर अपराधियों से सावधान रहें और किसी भी अंजान कॉल पर विश्वास न करें।

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