कांग्रेस विधायक का बड़ा ऐलान, दो साल तक किसानों से MSP पर खरीदेंगे मक्का
बठिंडा: पंजाब में गिरते भूजल स्तर की समस्या को देखते हुए कपूरथला के विधायक राणा गुरजीत सिंह ने रविवार को किसानों से दो साल तक न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर मक्का खरीदने का आश्वासन दिया. सिंह बठिंडा की मौर मंडी में ‘नई सोच नया पंजाब’ के बैनर तले बड़ी संख्या में जुटे किसानों को संबोधित कर रहे थे.
उन्होंने कहा, “पंजाब का कपास क्षेत्र गुलाबी सुंडी के प्रकोप से तबाह हो रहा है. केवल दो प्रतिशत किसान ही कपास की बुवाई कर रहे हैं और धान का रकबा लगातार बढ़ रहा है, जिससे भूजल स्तर गिर रहा है. यह पंजाब के लिए गंभीर चिंता का विषय है.”
मालवा के किसानों से बड़े पैमाने पर मक्का की बुवाई करने की अपील करते हुए विधायक ने कहा कि वे दो साल तक फसल को एमएसपी पर खरीदेंगे. उन्होंने कहा कि एमएसपी देना सरकार का काम है, लेकिन वे किसानों की मदद करेंगे.
उन्होंने कहा कि एक व्यापारी होने के नाते उन्हें पता है कि कॉरपोरेट क्षेत्र में मक्का की फसल की भारी मांग है. विधायक ने कहा कि वे पंजाब के किसानों का दर्द समझते हैं, इसलिए उन्हें ऐसी फसलें उगाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं, जिससे राज्य की डूबती हुई खेती को फिर से गति मिल सके. मालवा में उनकी टीमें काम कर रही हैं, ताकि पंजाब को फिर से रंगीन बनाया जा सके.
उन्होंने कहा कि मक्के की खेती से बिजली की बचत होती है, इसलिए राज्य सरकार को किसानों को प्रति एकड़ 10 हजार रुपये और केंद्र को 15 हजार रुपये देने चाहिए. सिंह ने कहा कि भले ही राज्य या केंद्र सरकार सहायता न दे, लेकिन वे राज्य के मक्के किसानों की मदद करेंगे.
MSP को लेकर बातचीत
बता दें कि कांग्रेस नेता ने यह घोषणा ऐसे समय में की है, जब दो केंद्रीय मंत्रियों – शिवराज सिंह चौहान और प्रहलाद जोशी के नेतृत्व में एक शीर्ष सरकारी दल ने पंजाब के अधिकारियों के साथ शनिवार को चंडीगढ़ में किसान यूनियनों के साथ गारंटीकृत न्यूनतम कीमतों की उनकी लंबे समय से चली आ रही मांग पर महत्वपूर्ण वार्ता की. इस संबंध में किसान नेताओं और अधिकारियों ने कहा कि दोनों पक्षों ने बातचीत को आगे बढ़ाने और 19 मार्च को अगली बैठक करने का निर्णय लिया हैं.
उम्मीद है कि सरकार अगले दौर में किसानों द्वारा विचार के लिए प्रस्तावों का एक सेट पेश करेगी, जिसमें एक कानून लाने की उनकी एकल-सूत्रीय मांग शामिल है. एक अधिकारी ने कहा कि वे अगले दौर से पहले प्रधानमंत्री कार्यालय को वार्ता की प्रगति की रिपोर्ट भी दे सकते हैं.
गौरतलब है कि सरकार द्वारा 2021 में तीन कृषि कानूनों को रद्द करने और उपज के लिए गारंटीकृत मूल्य और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ आपराधिक मामलों को वापस लेने सहित उनकी अन्य मांगों पर चर्चा करने के लिए सहमत होने के बाद किसान समूहों ने अपनी हड़ताल वापस ले ली थी. हालांकि, किसान फिर से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. वे जानना चाहते हैं कि एमएसपी के मुद्दे पर विचार करने के लिए गठित समिति पर सरकार ने क्या प्रगति की है.
क्या है MSP?
MSP किसानों को दी जाने वाले एक गारंटी की तरह होती है, जिसमें तय किया जाता है कि बाजार में किसानों की फसल किस दाम पर बिकेगी. MSP फसल की बुआई के दौरान ही तय कर दी जाती है. ऐसे में मार्केट में फसलों की कीमत गिरने के बाद भी सरकार किसानों को तय कीमत पर ही फसलें खरीदती है.
किन फसलों पर लगता है MSP?
कृषि मंत्रालय खरीफ, रबी सीजन समेत अन्य सीजन की फसलों के साथ ही कमर्शियल फसलों पर एमएसपी देता है. वर्तमान में देश के किसानों से खरीदी जाने वाली 23 फसलों पर एमएसपी लागू की गई है. केंद्र सरकार फसलों पर एमएसपी दर लागू करती है. हालांकि, राज्य सरकारों के पास भी एमएसपी लागू करने का अधिकार है.

