Monday, May 18, 2026
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चीन की बढ़ेगी टेंशन: समंदर को मिलेगा नया ‘सिकंदर’, भारत-जर्मनी के बीच 99,000 करोड़ रुपये की सबमरीन डील तय

नई दिल्ली / मुंबई: चीन की बढ़ेगी टेंशन: समंदर को मिलेगा नया ‘सिकंदर’, भारत-जर्मनी के बीच 99,000 करोड़ रुपये की सबमरीन डील तय!। भारतीय नौसेना को हिंद महासागर और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अजेय बनाने की दिशा में देश को एक बहुत बड़ी ऐतिहासिक कामयाबी मिली है। भारत के सबसे महत्वाकांक्षी रक्षा सौदों में से एक—‘प्रोजेक्ट-75I’ (Project-75I) को लेकर एक बड़ा अपडेट सामने आया है।

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चीन की बढ़ेगी टेंशन: समंदर को मिलेगा नया ‘सिकंदर’, भारत-जर्मनी के बीच 99,000 करोड़ रुपये की सबमरीन डील तय!

सरकारी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) ने 6 अत्याधुनिक डीजल-इलेक्ट्रिक अटैक सबमरीन्स के स्वदेशी निर्माण के लिए जर्मनी की दिग्गज कंपनी थिसनक्रुप मरीन सिस्टम्स (TKMS) के साथ व्यावसायिक और लागत संबंधी बातचीत (Commercial Negotiations) को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। रक्षा क्षेत्र का यह मेगा सौदा करीब 99,000 करोड़ रुपये (लगभग 10-11 बिलियन डॉलर) का है।

रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, दोनों पक्षों के बीच बातचीत के सभी प्रमुख दौर पूरे हो चुके हैं और जल्द ही इस ऐतिहासिक और रणनीतिक रक्षा सौदे पर औपचारिक हस्ताक्षर किए जाएंगे।

क्यों खास हैं ये पनडुब्बियां? क्या है जर्मन AIP तकनीक?

इस पूरे प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी खासियत यह है कि ये सभी 6 पनडुब्बियां उन्नत ‘फ्यूल-सेल आधारित एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन’ (AIP) तकनीक से लैस होंगी।

  • पारंपरिक पनडुब्बियों की कमजोरी: आमतौर पर पारंपरिक डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों को अपनी बैटरी चार्ज करने के लिए हर 2-3 दिनों में समुद्र की सतह पर या उसके बिल्कुल करीब आना पड़ता है। ऐसा करने से वे दुश्मन के एडवांस सैटेलाइट, रडार या पनडुब्बी-रोधी विमानों की नजरों में आ जाती हैं और उन पर हमले का खतरा बढ़ जाता है।

  • अदृश्य शिकारी (Silent Hunter): जर्मनी की इस अत्याधुनिक ‘फ्यूल-सेल AIP’ तकनीक की मदद से ये पनडुब्बियां बिना सतह पर आए, हफ्तों तक पानी के अंदर गहरे समंदर में छिपी रह सकती हैं।

  • बेहद शांत और घातक: रासायनिक प्रतिक्रिया से बिजली बनाने के कारण यह पूरा प्रोपल्शन सिस्टम बिल्कुल भी आवाज नहीं करता। इसके चलते ये पनडुब्बियां पानी के नीचे पूरी तरह ‘साइलेंट हंटर’ यानी एक अदृश्य शिकारी में बदल जाती हैं, जिन्हें ढूंढ पाना दुश्मन के सोनार सिस्टम के लिए भी लगभग असंभव होगा।

‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ को जबरदस्त बूस्ट

यह मेगा प्रोजेक्ट पूरी तरह से भारत सरकार के रणनीतिक साझेदारी (Strategic Partnership) मॉडल और ‘मेक इन इंडिया’ अभियान के तहत आगे बढ़ाया जा रहा है। सौदे की शर्तों के मुताबिक:

  • जर्मन कंपनी TKMS सबमरीन के डिजाइन और अत्याधुनिक सैन्य तकनीक का पूरी तरह से भारत को ट्रांसफर (Transfer of Technology – ToT) करेगी।

  • इन सभी 6 पनडुब्बियों का निर्माण पूरी तरह से स्वदेशी रूप से मुंबई स्थित मझगांव डॉक (MDL) में किया जाएगा।

  • इस प्रोजेक्ट के जरिए भारत की स्थानीय रक्षा कंपनियों (जैसे टाटा, एलएंडटी, गोदरेज) को भी बड़े ऑर्डर मिलेंगे। पनडुब्बियों में स्वदेशी सामग्री (Indigenisation) का स्तर शुरुआती दौर में 45% से शुरू होकर आखिरी पनडुब्बी तक 60% से अधिक हो जाएगा।

चूंकि MDL पहले भी स्कॉर्पीन क्लास (कलवरी क्लास) की पनडुब्बियों का सफल निर्माण कर चुकी है, ऐसे में इस नए प्रोजेक्ट से भारत की स्वदेशी जहाज निर्माण क्षमता और देश में रोजगार के अवसरों को भारी बढ़ावा मिलेगा।

चीन की नौसैनिक चुनौतियों का करारा जवाब

हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी नेवी (PLAN) की बढ़ती दखलअंदाजी और परमाणु व पारंपरिक पनडुब्बियों के बढ़ते नेटवर्क को देखते हुए भारतीय नौसेना के लिए यह डील एक बड़ा ‘गेम-चेंजर’ साबित होने वाली है।

परमाणु पनडुब्बियों के मुकाबले ये डीजल-इलेक्ट्रिक AIP पनडुब्बियां बेहद कम लागत में लगभग परमाणु पनडुब्बी जैसा ही दम रखती हैं। अपनी बेहतरीन मारक क्षमता (भारी टॉरपीडो और एंटी-शिप मिसाइलें) और अदृश्य रहने की खूबी के कारण ये नई सबमरीन्स भारतीय नौसेना की पानी के नीचे युद्ध लड़ने की क्षमता (Subsurface Warfare Capability) को एक नई और अभेद्य ऊंचाई पर ले जाएंगी।

Usha Pamnani

20 वर्षों से डिजिटल एवं प्रिंट मीडिया की पत्रकारिता में देश-विदेश, फ़िल्म, खेल सहित सामाजिक खबरों की एक्सपर्ट, वर्तमान में यशभारत डॉट कॉम में वरिष्ठ जिला प्रतिनिधि