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Chandrayan 3 INDIA भारत पर दुनिया की निगाह, चंद्रयान-3 लॉन्चिंग के लिए तैयार

Chandrayan 3 INDIA भारत का यह मिशन चंद्रयान-2 की क्रैश लैंडिंग के चार साल बाद भेजा जा रहा है। चंद्रयान-3 मिशन सफल होता है, तो अंतरिक्ष के क्षेत्र में ये भारत की एक और बड़ी कामयाबी होगी। इस बीच जानना जरूरी है कि चंद्रयान-3 मिशन क्या है? इसको चांद तक पहुंचाने वाला रॉकेट एलवीएम क्या है? चंद्रयान-3 को LVM3 के साथ क्यों जोड़ा गया है? अब तक कितनी तरह के चंद्र मिशन भेजे जा चुके हैं?

ISRO Moon Mission Chandrayaan 3 Launch Live Updates: चंद्रयान-3 दोपहर ढाई बजे श्रीहरिकोटा से लॉन्च किया जाएगा। 23-24 अगस्त को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर विक्रम लैंडर की सॉफ्ट लैंडिंग कराई जाएगी। अगर दक्षिणी ध्रुव पर लैंडर की सॉफ्ट लैंडिग होती है, तो भारत दक्षिणी ध्रुव पर पहुंचने वाला विश्व का पहला देश बन जाएगा

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) का बहुप्रतीक्षित मिशन चंद्रयान-3 शुक्रवार को लॉन्चिंग के लिए तैयार है। इसकी उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है। इसे इसरो के ‘बाहुबली रॉकेट’ लॉन्च व्हीकल मार्क-3 (एलवीएम-3) से प्रक्षेपित किया जाएगा। चंद्रयान-3 मिशन का उद्देश्य चंद्रमा की सतह पर सुरक्षित लैंडिंग का है। भारत का यह तीसरा चंद्र मिशन है, जबकि चंद्र सतह पर सुरक्षित लैंडिंग का दूसरा प्रयास है। इससे पहले केवल तीन ही देश अमेरिका, रूस और चीन चंद्रमा पर सॉफ्ट लैंडिंग करा सके हैं।

चंद्रयान-3 है क्या? 
चंद्रयान-3 मिशन चंद्रयान-2 का ही अगला चरण है, जो चंद्रमा की सतह पर उतरेगा और परीक्षण करेगा। इसमें एक प्रणोदन मॉड्यूल, एक लैंडर और एक रोवर होगा। चंद्रयान-3 का फोकस चंद्रमा की सतह पर सुरक्षित लैंड करने पर है। मिशन की सफलता के लिए नए उपकरण बनाए गए हैं। एल्गोरिदम को बेहतर किया गया है। जिन वजहों से चंद्रयान-2 मिशन चंद्रमा की सतह नहीं उतर पाया था, उन पर फोकस किया गया है।

इस दिन कर सकता है लैंडिंग
मिशन 14 जुलाई को दोपहर 2:35 बजे श्रीहरिकोटा केन्द्र से उड़ान भरेगा और अगर सब कुछ योजना के अनुसार हुआ तो 23 या 24 अगस्त को चंद्रमा पर उतरेगा। मिशन चंद्रमा के उस हिस्से तक लॉन्च होगा, जिसे डार्क साइड ऑफ मून कहते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि यह हिस्सा पृथ्वी के सामने नहीं आता।

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