वोडाफोन आइडिया (Vi) के निवेशकों के लिए बड़ा झटका: शेयर में आ सकती है 47% तक की भारी गिरावट, एचएसबीसी ने दी ‘रिड्यूस’ रेटिंग

वोडाफोन आइडिया (Vi) के निवेशकों के लिए बड़ा झटका: शेयर में आ सकती है 47% तक की भारी गिरावट, एचएसबीसी ने दी ‘रिड्यूस’ रेटिंग

नई दिल्ली (YASHBHARAT.COM): वोडाफोन आइडिया (Vi) के निवेशकों की मुश्किलें आने वाले समय में बढ़ सकती हैं। विदेशी ब्रोकरेज फर्म एचएसबीसी (HSBC) ने टेलीकॉम कंपनी वोडाफोन आइडिया को लेकर एक नई और चिंताजनक रिपोर्ट जारी की है। ब्रोकरेज का अनुमान है कि कंपनी के शेयरों में मौजूदा स्तर से लगभग 47 प्रतिशत की बड़ी गिरावट आ सकती है। वर्तमान में वोडाफोन आइडिया के शेयर 15.60 रुपये के आसपास ट्रेड कर रहे हैं, हालांकि पिछले एक साल में इनमें करीब 115 फीसदी की तेजी जरूर देखने को मिली है।

क्या है ‘रिड्यूस’ रेटिंग का मतलब?

एचएसबीसी ने इस शेयर को ‘रिड्यूस’ (Reduce) रेटिंग दी है। शेयर बाजार की भाषा में इसका अर्थ यह है कि निवेशकों को इस शेयर में अपना निवेश कम रखना चाहिए। हालांकि यह सीधे तौर पर शेयर बेचने की सलाह नहीं है, लेकिन यह इस बात का साफ संकेत है कि इस स्टॉक में आगे चलकर जोखिम (Risk) काफी अधिक है। ब्रोकरेज फर्म ने इस शेयर का टारगेट प्राइस घटाकर 8.25 रुपये तय किया है। यदि किसी निवेशक ने इसे ऊंचे भाव पर खरीद रखा है, तो उनके लिए यह चिंता का विषय बन सकता है।

भारी-भरकम कर्ज और स्पेक्ट्रम देनदारियों की बड़ी चुनौती

कंपनी के सामने सबसे बड़ी समस्या उसकी कमाई से ज्यादा भारी-भरकम खर्चों और देनदारियों की है। वित्त वर्ष 2028-29 में कंपनी के सामने स्पेक्ट्रम पेमेंट का एक बड़ा भुगतान खड़ा होने वाला है। मार्च 2026 तक कंपनी पर लगभग 1.27 लाख करोड़ रुपये की स्पेक्ट्रम देनदारी थी। आंकड़ों के मुताबिक, अगले तीन सालों में वोडाफोन आइडिया को लगभग 49,000 करोड़ रुपये की स्पेक्ट्रम किस्तें चुकानी होंगी। इतने बड़े भुगतान को पूरा करने के लिए कंपनी के पास फिलहाल पर्याप्त कैश फ्लो (Cash Flow) नहीं है।

ब्रोकरेज रिपोर्ट के अनुसार, यदि आने वाले समय में मोबाइल रिचार्ज प्लान महंगे भी हो जाते हैं, तब भी कंपनी की मुश्किलें पूरी तरह हल नहीं होंगी। वोडाफोन आइडिया को अगले तीन सालों में अपने ऑपरेटिंग कैश फ्लो को कम से कम तीन गुना बढ़ाना होगा। कंपनी मैनेजमेंट का अनुमान है कि आने वाले वर्षों में लगभग 60,000 करोड़ रुपये का कैश एबिटा (EBITDA) जनरेट किया जा सकता है, लेकिन इस बड़े प्लान को बिना किसी बाधा के पूरा करना एक चुनौतीपूर्ण काम होगा।

निवेशकों को क्या करना चाहिए?

मौजूदा हालात को देखते हुए यह शेयर अब सुरक्षित निवेश के दायरे से बाहर हो चुका है और इसे एक ‘हाई-रिस्क’ दांव माना जा रहा है। कंपनी अपने नेटवर्क को बेहतर बनाने के लिए 45,000 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना बना रही है, जिससे उसके मौजूदा ग्राहक तो जुड़े रह सकते हैं, लेकिन रिलायंस जियो और एयरटेल जैसी कंपनियों से नए ग्राहकों को तोड़कर लाना आसान नहीं होगा। इसके अलावा, साल 2030 के बाद कंपनी को एक बार फिर स्पेक्ट्रम रिन्यूअल के लिए पैसों की जरूरत पड़ेगी। ऐसे में, केवल शेयर का भाव सस्ता देखकर पैसा लगाने से बचने की सलाह दी जाती है और किसी भी निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार (Financial Advisor) की राय अवश्य लें।

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