इंदौर के भागीरथपुरा में नर्मदा जल पर बड़ा खुलासा: पानी में हैजा-डायरिया के खतरनाक बैक्टीरिया, स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा

इंदौर। भागीरथपुरा क्षेत्र में पिछले कई दिनों से सप्लाई हो रहे नर्मदा जल को लेकर चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। सरकारी और निजी लैब में कराई गई सैंपलिंग रिपोर्ट में पुष्टि हुई है कि इस पानी में हैजा और डायरिया जैसी जानलेवा बीमारियां फैलाने वाले खतरनाक बैक्टीरिया मौजूद हैं। स्वास्थ्य विभाग ने इस पानी को घरेलू उपयोग और पीने के लिए पूरी तरह अनुपयुक्त बताया है, हालांकि अब तक रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है।
लैब रिपोर्ट में क्या आया सामने
स्वास्थ्य विभाग और निजी लैबों से जुड़े सूत्रों के मुताबिक जांच रिपोर्ट में पानी को अनसैटिस्फैक्ट्री (Unsatisfactory) श्रेणी में रखा गया है। सैंपल में
फीकल कॉलिफॉर्म,
ई-कोलाई,
विब्रियो (Vibrio Species)
और प्रोटोजोआ जैसे अत्यंत खतरनाक जीवाणु पाए गए हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि इन जीवाणुओं की मौजूदगी इस बात का सीधा संकेत है कि पीने के पानी की पाइपलाइन में कहीं न कहीं सीवर का गंदा पानी मिल रहा है (सीपेज)।
100 से अधिक कॉलेजों और निजी अस्पतालों की लैब में पहुंचे सैंपल
क्षेत्र में लगातार बढ़ती बीमारियों और मौतों के बाद रविवार से पानी और मरीजों के सैंपल लिए जा रहे हैं। शहर के 100 से अधिक कॉलेजों और निजी अस्पतालों की लैब में भेजे गए सैंपल्स ने स्थिति को बेहद गंभीर बताया है।
हालांकि, कलेक्टर शिवम वर्मा ने क्षेत्र का दौरा कर खुद पानी पीकर रहवासियों को भरोसा दिलाने की कोशिश की, लेकिन उसी अवधि में लिए गए सैंपल्स की लैब कल्चर रिपोर्ट कुछ और ही कहानी बयां कर रही है।
हैजा फैलने की आशंका, मरीजों की संख्या बढ़ी
रिपोर्ट में विब्रियो कोलेरी बैक्टीरिया की पुष्टि हुई है, जो सीधे तौर पर हैजा (Cholera) फैलाने के लिए जिम्मेदार होता है। सूत्रों का आरोप है कि सरकारी तंत्र अब भी रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं कर रहा और मामले को टालने का प्रयास किया जा रहा है, जबकि क्षेत्र में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
दूषित पानी में मिले बैक्टीरिया और उनके दुष्प्रभाव
1. फीकल कॉलिफॉर्म (Fecal Coliform)
स्रोत: मानव व पशुओं का मल
खतरा: पानी में सीवर मिलावट का स्पष्ट संकेत, अन्य घातक रोगजनकों की आशंका
2. ई-कोलाई (E. coli)
प्रभाव: पाचन तंत्र पर सीधा हमला
लक्षण: गंभीर दस्त, उल्टी, तेज पेट दर्द
3. विब्रियो कोलेरी (Vibrio Cholerae)
प्रभाव: हैजा फैलाने वाला मुख्य बैक्टीरिया
जोखिम: अत्यधिक डिहाइड्रेशन, समय पर इलाज न मिलने पर जान का खतरा
4. स्यूडोमोनास एरूजिनोसा (Pseudomonas Aeruginosa)
खतरा: कमजोर इम्यूनिटी वालों के लिए बेहद घातक
संक्रमण: फेफड़ों का संक्रमण, ब्लड इंफेक्शन
5. क्लेबसेला स्पीशीज (Klebsiella Species)
प्रभाव: कई अंगों को नुकसान
संक्रमण: निमोनिया, यूटीआई, पेट की गंभीर बीमारियां
6. सिट्रोबैक्टर स्पीशीज (Citrobacter Species)
स्रोत: गंदा व दूषित पानी
जोखिम: छोटे बच्चों के लिए जानलेवा
7. प्रोटोजोआ (Protozoa)
प्रभाव: आंतों में संक्रमण
लक्षण: लंबे समय तक चलने वाले दस्त








