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मप्र हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: एलएलएम छात्र को तृतीय सेमेस्टर की परीक्षा में शामिल होने की अनुमति

जबलपुर: मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने एक अहम फैसला सुनाते हुए एलएलएम तृतीय सेमेस्टर के छात्र को परीक्षा में शामिल होने की अस्थायी अनुमति दी है। यह निर्णय उस याचिका के संदर्भ में आया है, जिसमें छात्र ने विश्वविद्यालय द्वारा प्रथम सेमेस्टर की एटीकेटी परीक्षा में देरी के कारण शैक्षणिक नुकसान की शिकायत की थी।

याचिकाकर्ता के वकील आर्यन उरमलिया ने अदालत में दलील दी कि विश्वविद्यालय की लापरवाही के कारण छात्र तृतीय सेमेस्टर की परीक्षा में शामिल नहीं हो सका। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि यह देरी संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 के तहत छात्रों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।

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माननीय न्यायालय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए विश्वविद्यालय को नोटिस जारी करते हुए छात्र को तृतीय सेमेस्टर और प्रथम सेमेस्टर की एटीकेटी परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दी।

अदालत का आदेश:
अदालत ने अपने आदेश में कहा, “याचिकाकर्ता को तृतीय सेमेस्टर और प्रथम सेमेस्टर की एटीकेटी परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दी जाती है।”

यह फैसला उन छात्रों के लिए एक बड़ी राहत है, जो प्रशासनिक देरी के चलते अपने शैक्षणिक और व्यावसायिक लक्ष्यों में बाधा का सामना कर रहे थे।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता आर्यन उरमलिया ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा, “यह निर्णय छात्रों के शैक्षणिक अधिकारों की रक्षा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।”

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