MP में नल जल योजना में बड़ा बदलाव: अब पंचायतें संभालेंगी जिम्मेदारी, 1,000–10,000 रुपये तक देना होगा सहयोग शुल्क
MP में नल जल योजना में बड़ा बदलाव: अब पंचायतें संभालेंगी जिम्मेदारी, 1,000–10,000 रुपये तक देना होगा सहयोग शुल्क।पानी समितियों में 50% महिलाएं अनिवार्य, जलकर 60 से 200 रुपये मासिक प्रस्तावित।
मध्य प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में जल आपूर्ति व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित और टिकाऊ बनाने के लिए राज्य सरकार बड़ा बदलाव करने जा रही है। नल जल योजनाओं के संचालन, संधारण और प्रबंधन की जिम्मेदारी अब ग्राम पंचायतों को सौंपी जाएगी।
इस व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए गांव स्तर पर पानी समितियों का गठन किया जाएगा, जिनके अध्यक्ष सरपंच होंगे। खास बात यह है कि इन समितियों में 50 प्रतिशत महिलाओं की भागीदारी अनिवार्य की गई है।
सरकार ने पहली बार जल कनेक्शन के लिए जन सहयोग राशि लेने का प्रावधान भी किया है, जो 1,000 से 10,000 रुपये तक हो सकती है। इसके लिए “मध्य प्रदेश पंचायत (ग्रामीण नलजल योजना संचालन, संधारण एवं प्रबंधन) नियम 2026” का प्रारूप जारी कर सुझाव आमंत्रित किए गए हैं।
पंचायतों को मिलेगी पूरी जिम्मेदारी
नई व्यवस्था के तहत ग्राम पंचायतें नल जल योजनाओं के संचालन, रखरखाव, मरम्मत और उन्नयन का कार्य संभालेंगी। समय पर जलापूर्ति सुनिश्चित करना, पाइपलाइन की मरम्मत, खराब कनेक्शन सुधारना और छूटे हुए परिवारों को नए कनेक्शन देना पंचायतों की जिम्मेदारी होगी। साथ ही जल संरक्षण और पानी के अपव्यय को रोकने में भी पंचायतें सक्रिय भूमिका निभाएंगी।
पानी समितियां तय करेंगी शुल्क
गांवों में गठित पानी समितियां जलकर और जन सहयोग शुल्क की अनुशंसा करेंगी, जिसके आधार पर पंचायतें अंतिम दर तय करेंगी।
नए कनेक्शन पर एकमुश्त सहयोग राशि ली जाएगी, जबकि पहले से जुड़े उपभोक्ताओं से यह राशि किस्तों में वसूली जा सकेगी। प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार जलकर 60 से 200 रुपये प्रति माह तक हो सकता है। वहीं संस्थानों और गैर-घरेलू उपयोग के लिए अलग दरें लागू की जाएंगी।
सरकार का मानना है कि इस नई व्यवस्था से ग्रामीण क्षेत्रों में जल प्रबंधन अधिक प्रभावी होगा और स्थानीय स्तर पर जवाबदेही भी बढ़ेगी।

