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Big Breaking: ज्योतिरादित्य सिंधिया की खाली सीट पर बीजेपी ने जॉर्ज कुरियन को बनाया राज्यसभा उम्मीदवार

मध्य प्रदेश से राज्यसभा के प्रत्याशी केरल के जॉर्ज कुरियन होंगे. केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के गुना अशोकनगर संसदीय क्षेत्र सांसद चुने जाने के बाद यहां से राज्यसभा की सीट खाली हुई थी. भोपाल. मध्य प्रदेश से राज्यसभा के प्रत्याशी केरल के जॉर्ज कुरियन होंगे.

केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के गुना अशोकनगर संसदीय क्षेत्र सांसद चुने जाने के बाद यहां से राज्यसभा की सीट खाली हुई थी. कुरियन का कार्यकाल 9 अप्रैल 2026 तक होगा.

इसके लिए नामांकन के लिए 21 अगस्त आखिरी दिन है. इसके लिए चुनाव विधानसभा में 3 सितंबर को होगा. बता दें, विधानसभा के समीकरण के हिसाब से कुरियन का मध्य प्रदेश से राज्यसभा जाना करीब-करीब तय है

केरल बीजेपी के महासचिव जॉर्ज कुरियन मोदी मंत्रिमंडल में शामिल हैं. वह अभी तक किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं. दूसरी ओर, लोकसभा चुनाव में बीजेपी का दामन थामने वाले पंजाब के रवनीत बिट्टू को भी मोदी कैबिनेट में जगह मिली है.

उन्होंने लुधियाना से लोकसभा चुनाव भी लड़ा. लेकिन, कांग्रेस के अमरिंदर सिंह राजा वारिंग से चुनाव हार गए थे. ऐसे में उन्हें हरियाणा से राज्यसभा भेजा जाएगा.

कौन हैं जॉर्ज  कुरियन

केरल के कोट्टायम के गांव कनककारी के रहने वाले जॉर्ज कुरियन मोदी कैबिनेट में एकमात्र ईसाई मंत्री हैं। वे
1980 के दशक में जनता दल छोड़कर बीजेपी में मात्र 19 साल की उम्र में शामिल हुए थे। एक ईसाई परिवार से आने वाले कुरियन ने जब यह फैसला लिया तो उन्हें काफी
आलोचना का सामना भी करना पड़ा था। जॉर्ज कुरियन चार दशकों से बीजेपी को मजबूत करने का काम कर रहे हैं।
वह पार्टी में कई पदों पर रहे हैं। जिसमें राष्ट्रीय कार्यकारी समिति सदस्य, युवा मोर्चा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के उपाध्यक्ष रह चुके हैं। मोदी
कैबिनेट में शामिल कुरियन पार्टी की कोर कमेटी के सदस्य और भाजपा की राज्य इकाई के उपाध्यक्ष हैं।उन्होंने राज्य के दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी के लिए ट्रांसलेटर के तौर पर भी काम किया है।

एमपी के नेताओं में निराशा

इधर, राज्यसभा जाने के लिए मध्य प्रदेश के नेता भी सक्रिय हैं. लेकिन, उन्हें निराशा हाथ लग सकती है. इस वजह से बीजेपी के नेतृत्व को केंद्रीय मंत्रियों और सीनियर नेताओं को एडजेस्ट करना होगा. एमपी कोटे से पहले तीन केंद्रीय मंत्री बनाए जा चुके हैं. इस बार किसी के आसार नजर नहीं आ रहे.

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