आरजीपीवी का बड़ा एक्शन: बिना कॉपियां जांचे मनमाने अंक देने वाले जबलपुर JEC के अतिथि शिक्षक पर 2 साल का बैन, छात्रों में भारी आक्रोश
जबलपुर / भोपाल: राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (RGPV) से संबद्ध जबलपुर शासकीय इंजीनियरिंग कॉलेज (JEC) में कॉपियों के मूल्यांकन में एक बड़ी लापरवाही और धांधली का मामला सामने आया है। कंप्यूटर साइंस विभाग के अतिथि व्याख्याता सचिंद्र दुबे द्वारा बिना उत्तरपुस्तिकाएं (Answer Sheets) जांचे, मनमाने ढंग से अंक चढ़ाने की गंभीर गड़बड़ी पकड़ी गई है। शिकायत सही पाए जाने पर विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक ने संबंधित शिक्षक पर दो वर्ष के लिए मूल्यांकन कार्य करने पर प्रतिबंध लगा दिया है, साथ ही उनके देयकों (Payments) के भुगतान पर भी रोक लगा दी है।
हालांकि, इतनी बड़ी लापरवाही पर केवल मूल्यांकन से रोकने की ‘नरम’ कार्रवाई से छात्र बिल्कुल संतुष्ट नहीं हैं और उनमें भारी नाराजगी है।
पुनर्मूल्यांकन (Revaluation) में खुली पोल, अंदर पन्ने खाली… बाहर चढ़ा दिए नंबर
जबलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज (JEC) आरजीपीवी का नोडल मूल्यांकन केंद्र है, जहां विश्वविद्यालय से जुड़े तमाम इंजीनियरिंग कॉलेजों की उत्तरपुस्तिकाओं की जांच होती है। मामला तब उजागर हुआ जब कंप्यूटर साइंस विभाग के कुछ छात्रों ने कम अंक मिलने पर पुनर्मूल्यांकन (Revaluation) के लिए आवेदन किया।
जब कॉपियां दोबारा जांची गईं, तो अधिकारी भी हैरान रह गए। उत्तरपुस्तिकाओं के अंदर कई महत्वपूर्ण प्रश्नों का मूल्यांकन (चेक) ही नहीं किया गया था, यानी उन पर कोई पेन तक नहीं चलाया गया था। इसके बावजूद, कॉपी के अंतिम मुख्य पृष्ठ पर मनमाने ढंग से टोटल अंक दर्ज कर दिए गए थे।
8 साल से जांच रहे थे हर सेमेस्टर 4000 कॉपियां, हजारों छात्रों के भविष्य पर संकट!
इस खुलासे के बाद छात्रों ने शिक्षक के इतिहास को लेकर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। छात्र नेताओं और विद्यार्थियों का कहना है कि संबंधित अतिथि शिक्षक पिछले करीब 8 वर्षों से मूल्यांकन कार्य से जुड़े हुए थे। वे हर सेमेस्टर में लगभग 4,000 उत्तरपुस्तिकाएं जांचते थे। आरजीपीवी का बड़ा एक्शन: बिना कॉपियां जांचे मनमाने अंक देने वाले जबलपुर JEC के अतिथि शिक्षक पर 2 साल का बैन, छात्रों में भारी आक्रोश
छात्रों का आरोप: “अगर इस बार री-टोटलिंग में यह खेल पकड़ा गया है, तो पिछले 8 वर्षों में उन्होंने न जाने कितने हजारों छात्रों का भविष्य अंधकार में धकेला होगा। कई छात्र फेल हुए होंगे और कइयों का साल खराब हुआ होगा।”
छात्रों की मांग: सिर्फ बैन क्यों? हो उच्च स्तरीय जांच और दर्ज हो FIR
यूनिवर्सिटी द्वारा की गई इस सीमित कार्रवाई से छात्रों में गहरा रोष है। विद्यार्थियों ने मांग की है कि:
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इस पूरे मामले की एक उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच कमेटी गठित की जाए।
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दोषी अतिथि शिक्षक द्वारा पिछले वर्षों में जांची गई सभी उत्तरपुस्तिकाओं की दोबारा समीक्षा (Review) कराई जाए।
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छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करने के आरोप में शिक्षक को कॉलेज से तत्काल निष्कासित कर कठोर कानूनी कार्रवाई (FIR) की जाए।
अब देखना यह होगा कि आरजीपीवी प्रशासन छात्रों के इस आक्रोश और उनके भविष्य को ध्यान में रखते हुए इस कार्रवाई को और सख्त करता है या मामला यहीं दबा दिया जाता है।
