Thursday, May 28, 2026
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Bhopal Heatwave Crisis: भोपाल में भीषण गर्मी का तांडव- अस्पतालों की OPD में 30% मरीज बढ़े; हीट स्ट्रोक से दिमाग में खून जमने (CVT) का बढ़ा जानलेवा खतरा

Bhopal Heatwave Crisis: भोपाल में भीषण गर्मी का तांडव- अस्पतालों की OPD में 30% मरीज बढ़े; हीट स्ट्रोक से दिमाग में खून जमने (CVT) का बढ़ा जानलेवा खतरा

भोपाल: राजधानी भोपाल में सूर्यदेव का रौद्र रूप जारी है। लगातार कई दिनों से तापमान $44^\circ\text{C}$ के पार बने रहने से जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो चुका है। पिछले सात दिनों के भीतर भोपाल के तीन सबसे बड़े सरकारी अस्पतालों—हमीदिया, जेपी और एम्स (AIIMS) की ओपीडी और इमरजेंसी वार्डों में मरीजों की संख्या में $30\%$ का भारी उछाल आया है।

अस्पतालों में सुबह 10 बजे से ही पर्चा काउंटरों पर मरीजों की लंबी कतारें लग रही हैं। कॉर्डियोलॉजी और मेडिसिन विभागों के अनुसार, इस बार रात का तापमान भी कम नहीं हो रहा है, जिससे लोगों की नींद पूरी नहीं हो पा रही है। इसके कारण ब्लड प्रेशर (BP), हार्ट अटैक और ब्रेन स्ट्रोक के मामलों में अचानक तेजी देखी जा रही है।

घरों के अंदर भी खतरा: ‘हेल्थ इमरजेंसी’ की कगार पर शहर

चिकित्सकों के अनुसार, पहले हीट स्ट्रोक के मामले केवल कड़ी धूप में बाहर मजदूरी या काम करने वाले लोगों में ही देखे जाते थे, लेकिन इस बार हालात बिल्कुल बदल चुके हैं। $43^\circ\text{C}$ से ऊपर जा रहे पारे, उमस (Humidity) और घरों में वेंटिलेशन की कमी के कारण अब घरों के अंदर रहने वाले लोग भी हीट स्ट्रोक के शिकार हो रहे हैं। शरीर का तापमान $40^\circ\text{C}$ से ऊपर पहुंचते ही स्थिति जानलेवा हो रही है, जिसे स्वास्थ्य विभाग अब ‘हेल्थ इमरजेंसी’ की तरह ले रहा है। Bhopal Heatwave Crisis: भोपाल में भीषण गर्मी का तांडव- अस्पतालों की OPD में 30% मरीज बढ़े; हीट स्ट्रोक से दिमाग में खून जमने (CVT) का बढ़ा जानलेवा खतरा

क्या है सीवीटी (CVT)? हीट स्ट्रोक के 20% मरीजों में मिल रहे लक्षण

हमीदिया अस्पताल के न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. आयुष दुबे ने एक बेहद चौंकाने वाला और डराने वाला खुलासा किया है। उनके अनुसार, भीषण गर्मी और गंभीर डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) के कारण हीट स्ट्रोक के करीब $20\%$ मरीजों में सीवीटी (Cerebral Venous Thrombosis – CVT) की स्थिति देखी जा रही है।

  • ऐसे जमता है दिमाग में खून: जब शरीर का तापमान $40^\circ\text{C}$ को पार करता है, तो पसीने के जरिए पानी और नमक तेजी से खत्म हो जाता है। पर्याप्त पानी न मिलने पर खून गाढ़ा होने लगता है।

  • ब्रेन हेमरेज का खतरा: दिमाग की ड्रेनेज नसों (वेनस साइनस) में खून गाढ़ा होने से थक्का (Clot) जम जाता है। समय पर इलाज न होने से दिमाग के अंदर का प्रेशर (ICP) अचानक बढ़ जाता है, जिससे दिमाग की नस फटने या ब्रेन हेमरेज का खतरा रहता है। हालांकि, शुरुआती स्टेज में केवल ‘ब्लड थिनर’ (खून पतला करने वाली) दवाओं से मरीज पूरी तरह ठीक हो सकता है।

Usha Pamnani

20 वर्षों से डिजिटल एवं प्रिंट मीडिया की पत्रकारिता में देश-विदेश, फ़िल्म, खेल सहित सामाजिक खबरों की एक्सपर्ट, वर्तमान में यशभारत डॉट कॉम में वरिष्ठ जिला प्रतिनिधि