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किसान क्रेडिट कार्ड लोन मंजूरी के लिए बैंक मैनेजर ने मांगी थी रिश्वत, 4 साल की कैद की सजा

किसान क्रेडिट कार्ड लोन मंजूरी के लिए बैंक मैनेजर ने मांगी थी रिश्वत, 4 साल की कैद की सजा

किसान क्रेडिट कार्ड लोन मंजूरी के लिए बैंक मैनेजर ने मांगी थी रिश्वत, 4 साल की कैद की सजा सुनाई।

एक बैंक मैनेजर को किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) लोन मंजूर करने के नाम पर 10 हजार रुपए की रिश्वत मांगने के मामले में 4 साल कैद की सजा सुनाई गई है। यह सजा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दी गई है।

मामले के अनुसार, बैंक मैनेजर ने एक किसान से KCC लोन मंजूर करने के लिए रिश्वत मांगी थी। किसान ने इसकी शिकायत भ्रष्टाचार निवारण ब्यूरो में की थी। जांच के बाद, बैंक मैनेजर को दोषी पाया गया और उसे 4 साल कैद की सजा सुनाई गई है।

यह सजा भ्रष्टाचार के खिलाफ एक मजबूत संदेश देती है और यह सुनिश्चित करती है कि भ्रष्ट अधिकारियों को उनके कृत्यों के लिए जवाबदेह ठहराया जाएगा।

मालूम हो केसीसी लोन स्वीकृत करने के लिए दस हजार रुपये की रिश्वत लेने के मामले में न्यायालय ने सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की आलोट शाखा के तत्कालीन शाखा प्रबंधक (बैंक मैनेजर) 60 वर्षीय मांगीलाल चौहान पुत्र बलदेव चौहान निवासी यश नगर, इंदिरा कालोनी मंदसौर को दोषी पाया।

भष्टाचार निवारण अधिनियम विशेष न्यायालय ने उसे भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 में चार वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। उस पर दो हजार रुपये का जुर्माना भी किया गया। सजा सुनाने के बाद उसे जेल भेज दिया गया। फैसला शुक्रवार को विशेष न्यायाधीश आदित्य रावत ने सुनाया।

जिला अभियोजन अधिकारी गोविंद प्रसाद घाटिया व अतिरिक्त जिला लोक अभियोजन अधिकारी विजयकुमार पारस ने बताया कि 9 मार्च 2022 को शिकायतकर्ता बालूसिंह रेवाड़िया पुत्र रामचन्द्र रेवाडिया ने लोकायुक्त एसपी कार्यालय उज्जैन में लिखित शिकायत की थी कि उनके तथा पत्नी शारदाबाई के नाम आठ बीघा जमीन है।

उक्त जमीन पर उन्होंने सेंट्रल बैंक आफ इंडिया की आलोट शाखा से 2.72 लाख रुपये का केसीसी लोन स्वीकृत कराया था। स्वीकृत लोन के रूपए निकालने जब वे बैंग गए थे तो तत्कलीन बैंक मैनेजर मांगीलाल चौहान ने उन्हें बुलाकर कहा कि तुम्हारा लोन स्वीकृत कर दिया है तथा उन्होंने लोन स्वीकृत करने के एवज में 15 हजार रुपये रिश्वत के मांगे थे।

इसके बाद सात मार्च को बैंक मैनेजर ने उनके ही मोबाइल फोन से उन्हें कॉल कर लोन स्वीकृत करने के लिए रिश्वत मांगी थी। शिकायत की पुष्टि के लिए लोकायुक्त के तत्कालीन निरीक्षक बलवीरसिंह यादव ने रिश्वत संबंधी बातचीत टेप करने के लिए बालूसिंह को डिजिटल वाईस रिकॉर्डर देकर बैंक मैनेजर से उनकी रिश्वत संबंधी बातचीत टेप कराई थी।

टेबल पर मोबाइल फोन के लिए रखे थे रुपये
बालूसिंह ने रुपये देने के बाद तत्काल बाहर आकर लोकायुक्त दल के सदस्यों को बताया था कि उसने बैंक मैनेजर मांगीलाल चौहान को हाथ में रुपये दिए है, जो उसने अपनी टेबल पर मोबाइल फोन के नीचे रख लिए हैं।

इसके बाद दल सदस्यों ने कक्ष में पहुंचकर मांगीलाल चौहान को पकड़ लिया था तथा पूछताछ करने पर उसने रुपये मोबाइल फोन के नीचे रखना बताया था। दल सदस्यों ने उक्त रुपये जब्त कर अग्रिम कार्रवाई की थी।

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