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वायुसेना के सबसे बड़े अभ्यास में शामि‍ल होगा अमेरिका का घातक विमान ‘मौत का क्रॉस’

वायुसेना के सबसे बड़े अभ्यास में शामि‍ल होगा अमेरिका का घातक विमान 'मौत का क्रॉस'

वायुसेना के सबसे बड़े अभ्यास में शामि‍ल होगा अमेरिका का घातक विमान ‘मौत का क्रॉस’। भारतीय वायुसेना की पहली मल्टीनेशनल एय़र एक्सरसाइज तरंग शक्ति इस साल अगस्त-सितंबर में आयोजित की जाएगी। इस सबसे बड़ी एयर एक्सरसाइज में अमेरिका, यूके, स्पेन, जर्मनी, फ्रांस सहित 10 देशों की वायु सेनाएं और 18 देश पर्यवेक्षक के तौर पर हिस्सा लेंगे। वायुसेना के सीनियर अधिकारियों के मुताबिक इस अभ्यास में भारत समेत लगभग 30 देशों की भागीदारी होगी और भारतीय वायुसेना समेत बाकी देशों के लगभग 150 विमान शामिल होंगे। खास बात यह है कि अमेरिका इस एक्सरसाइज में एफ-16 और ए-10 वॉर्थोग जैसे फाइटर जेट हिस्सा ले रहे हैं। ऐसा पहली बार होगा जब अमेरिका भारत में पहली बार ए-10 वॉर्थोग का किसी एक्सरसाइज का हिस्सा बना रहा है।

 

रूस और इस्राइल समेत 51 देशों को किया था इनवाइट

वायुसेना से मिली जानकारी के अनुसार भारतीय वायुसेना 6 अगस्त से 14 सितंबर तक अपना पहला अंतरराष्ट्रीय हवाई अभ्यास ‘तरंग शक्ति’ आयोजित करने जा रहा है। इस आयोजन का मुख्य आकर्षण फेयरचाइल्ड रिपब्लिक ए-10 थंडरबोल्ट II होगा, जिसे प्यार से ‘वॉर्थोग’ के नाम से जाना जाता है। इस अभ्यास में अमेरिका अपना एफ-16 फाइटर एयरक्राफ्ट भी भेजेगा। एयरफोर्स के वाइस चीफ एयर मार्शल एपी सिंह ने बताया कि तरंग शक्ति सबसे बड़ी इंटरनेशनल एयर एक्सरसाइज होगी। भारत ने इस अभ्यास में हिस्सा लेने के लिए रूस और इस्राइल सहित कुल 51 देशों को निमंत्रण भेजा था। लेकिन दोनों देशों ने अपने मौजूदा हालात के चलते इस मल्टीनेशनल एक्सरसाइज का हिस्सा बनने से इंकार कर दिया।

दो चरणों में होगा तरंग शक्ति का आयोजन

वाइस चीफ एयर मार्शल एपी सिंह के मुताबिक एक्सरसाइज तरंग शक्ति का पहला फेज सुलूर (तमिलनाडु) में आयोजित होगा, जो 6 अगस्त से 14 अगस्त तक चलेगा। पहले फेज में फ्रांस, जर्मनी, स्पेन और यूके की वायुसेनाएं अपने एयरक्राफ्ट के साथ शामिल हो रही हैं। पहले चरण में 32 देशों के जहाज हिस्सा लेंगे, जिनमें फाइटर एयरक्राफ्ट और ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट भी होंगे।

वहीं, दूसरा फेज 29 अगस्त से 14 सितंबर तक जोधपुर में होगा, जिसमें ऑस्ट्रेलिया, बांग्लादेश, ग्रीस, सिंगापुर, यूएई और अमेरिका की एयरफोर्स अपने एयर एसेस्ट्स के साथ शामिल होंगी। इस फेज में 27 लड़ाकू विमान, दो ईंधन भरने वाले विमान, दो हवाई चेतावनी विमान (AWACS) और चार सी-130 विमान शामिल होंगे। सुलूर और जोधपुर बेस पर तैनात भारतीय वायुसेना के अग्निवीर (वायुवीर) भी इस अभ्यास के दौरान कुछ जमीनी भूमिकाओं में भागीदारी करेंगे। वहीं, भारतीय वायुसेना के प्रत्येक चरण में 40 से अधिक जहाज शामिल होंगे, जिसमें नौसेना के मिग-29के जेट भी पहले चरण में शामिल होंगे।

भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमानों में राफेल, सुखोई-30 एमकेआई, मिराज 2000, जगुआर और मिग-29 शामिल हैं। वाइस चीफ एयर मार्शल एपी सिंह ने बताया कि दूसरे देशों के लड़ाकू विमानों में एफ-18, एफ-16, राफेल और यूरोफाइटर टाइफून शामिल हैं। एयर मार्शल सिंह के मुताबिक इस एक्सरसाइज का मकसद दुनिया को यह दिखाना है कि कैसे भारत में डिफेंस इकोसिस्टम लगातार बढ़ रहा है, हम दूसरे देशों को भारत की स्वदेशी इंडस्ट्री की ताकत भी दिखाएंगे। इसके लिए एग्जिबिशन भी आयोजित होंगाी, जिसमें डीआरडीओ, भारत की एविएशन इंडस्ट्री, पीएसयू स्वदेशी क्षमता दिखाएंगे।

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