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भगवान की समस्त लीलाएं जगत मंगल के लिए की गई है प्रभु श्री राम के मिथिला पुरी की लीला परमात्मा एवं जीवात्मा के संबंध को दर्शाता है- स्वामी श्रीरामकृष्णाचार्य

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भगवान की समस्त लीलाएं जगत मंगल के लिए की गई है
प्रभु श्री राम के मिथिला पुरी की लीला परमात्मा एवं जीवात्मा के संबंध को दर्शाता है- स्वामी श्रीरामकृष्णाचार्

कटनी श्रीसीतारामाचार्य गोष्टी अंतर्गत श्री वेंकटेश सत्संग समिति कटनी के तत्वाधान में श्री राम कथा के तृतीय दिवस
व्यास पीठ पर विराजमान इटारसी से पधारे श्री श्री 1008 स्वामी श्री रामकृष्णाचार्य जी द्वारा आगे की कथा का वर्णन करते हुए बताते हैं कि श्री विश्वामित्र जी ताड़का वध एवं अहिल्या उद्धार के पश्चात भगवान राम एवं लक्ष्मण के साथ महाराजा जनक के आमंत्रण पर धनुष यज्ञ का बहाना लेकर मिथिला पधारे.
महाराजा जनक को जब महर्षि आगमन की जानकारी प्राप्त हुई तो उन्होंने शीघ्रता से पहुंचकर सभी प्रकार का आदर सत्कार कर राजमहल लेकर आए.
रामायण का यह चरित्र हमें इस बात की सीख देता है कि हमारे घर में पधारे हुए अतिथियों का उचित आदर सत्कार हमेशा करना चाहिए, यह हमारी सनातन परंपरा का अभिन्न हिस्सा है
महाराजा दशरथ भगवान राम लक्ष्मण का दर्शन करके अत्यंत प्रसन्न होते हैं और महर्षि से उनका परिचय पूछते हैं महर्षि द्वारा बताया जाता है कि यह दोनों राजकुमार अयोध्या के राजा दशरथ के पुत्र राम एवं लक्ष्मण है इसके साथ ही विश्वामित्र जी द्वारा भगवान राम के पराक्रम का वर्णन जनक जी के समक्ष किया जाता है.
महाराजा जनक द्वारा महर्षि एवं राजकुमारों के समक्ष दिव्य धनुष की जानकारी रखी जाती है एवं अपनी चिंता व्यक्त की जाती है और बताया जाता है कि मेरे द्वारा रचे गए स्वयंवर में अभी तक पृथ्वी के समस्त राजा, महाराजा, देव, दानव, किन्नर आदि सब पधार चुके हैं किंतु किसी के अंदर इतना सामर्थ भी नहीं था कि वह इस धनुष को उसके स्थान से हिला भी सके.
लगता है मेरी बेटी सीता का विवाह संभव नहीं हो पाएगा किंतु महर्षि ने उन्हें विश्वास दिलाया कि आप चिंतित ना हो आपके ली गई प्रतिज्ञा अवश्य पूरी होगी और उन्होंने भगवान राम की तरफ इशारा करके दिव्य धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाने का आदेश दिया भगवान श्री राम द्वारा गुरुवर एवं समस्त बड़ों को प्रणाम करके दिव्य धनुष को उठाया एवं उसमें प्रत्यंचा चढ़ाने के लिए जैसे ही प्रयास किया तो वह धनुष टूट गया चारों तरफ भगवान के नाम की जय जयकार होने लगी मधुर ध्वनि बजने लगी सभी रानियां, राजा जनक अत्यंत आनंदित हुए.
सभा में उपस्थित समस्त गुरुजनों द्वारा आशीर्वाद दिया गया.
राजकुमारी सीता को बुलाया गया और मंगल गीतों के साथ राजकुमारी सीता पधार कर भगवान श्री राम के गले में वरमाला डाली गई.
चारों तरफ आनंद का वातावरण छाया हुआ था जय जयकार हो रही थी.
राजा जनक द्वारा तुरंत ही अपने विशेष मंत्रियों को अयोध्या भेज कर यह शुभ समाचार प्रेषित किया गया.
भगवान के विवाह पर कथा पंडाल में सुंदर भजनों की प्रस्तुति की गई जिसमें समस्त भक्तजनों द्वारा मंत्रमुग्ध होकर नित्य किया गया.
भक्त जनों द्वारा विवाह से जुड़ी हुई मंगल सामग्रियों का वितरण किया गया, मिष्ठान वितरण किया गया, कथा में आज विवाह के उपलक्ष्य पर विशेष सजावट की गई एवं युगल जोड़ी के रूप में भगवान को मंच पर विराजमान किया गया.

व्यास पीठ से स्वामी रामकृष्णाचार्य जी द्वारा भगवान के स्वयंवर के साथ संपूर्ण विवाह का विस्तृत वर्णन किया जिसे सुनकर समस्त भक्तजन भाव विभोर हो उठे.
कथा के अगले दिन अयोध्या कांड केवट चरित्र एवं भगवान का वन प्रवेश सहित अन्य लीलाओं का वर्णन किया जावेगा
श्री वेंकटेश सत्संग समिति कटनी द्वारा संपूर्ण कटनी नगर की जनता से अधिक से अधिक संख्या में पधारकर श्री राम कथा का श्रवण कर पुण्य लाभ अर्जित करने का आग्रह किया गया है ।

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